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Rajasthan News : राजस्थान में यहां बेरोक टोक हो रहा ये काम, मुसीबत में है लोगों की जान

Rajasthan News : प्रदेश में ईंट भट्टों के कारण प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) गंभीर है। एनजीटी ने इस मामले पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से सख्ती दिखाने को कहा। वहीं प्रदेश के ईंट भट्टों से धुंए को निकालने के लिए जिग-जैग तकनीक वाली चिमनी अपनाने की बाध्यता करने के निर्देश दिए।

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झालावाड़. शहर के पास बिना चिमनी के चल रहे ईंट-भट्टे। इनके धुएं से आसपास के लोगों को परेशानी हो रही है।

Jhalawar News : प्रदेश में ईंट भट्टों के कारण प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) गंभीर है। एनजीटी ने इस मामले पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से सख्ती दिखाने को कहा। वहीं प्रदेश के ईंट भट्टों से धुंए को निकालने के लिए जिग-जैग तकनीक वाली चिमनी अपनाने की बाध्यता करने के निर्देश दिए। लेकिन झालावाड़ जिले में एनजीटी के निर्देशों की खुले आम अवहेलना की जा रही है। झालावाड़ जिले में करीब 500 से अधिक ईंट भट्टे नियम विरूद्ध चल रहे हैं, इससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ ही लोगों की सेहत से भी खिलवाड़ हो रहा है। लेकिन जिम्मेदारों को इनसे निकलने वाला धुुंआ नजर नहीं आ रहा है। परेशानी आस-पास रहने वाले लोगों को हो रही है।


एक मामले में कोर्ट में सुनवाई के दौरान पर्यावरण सचिव ने प्रदूषण में कमी लाने के पर्याप्त प्रयास करने का भरोसा दिलाया। लेकिन झालावाड़ जिले में लंबे समय से ईंट भट्टों के संचालित होने के बाद भी आज तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है।सूत्रों ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण के कारण उत्पन्न श्वसन रोगों से दुनिया में सबसे अधिक मौत हो रही हैं और 40 प्रतिशत से ज्यादा स्कूली बच्चों के लंग्स पर प्रदूषण का असर हो रहा है।


प्रदेश में 2037 ईंट-भट्ट है, जिनमें से मात्र 267 ने ही धुंआं बाहर निकालने के लिए जिग-जैग तकनीक को अपनाया है। वहीं झालावाड़ जिले में 500 से अधिक ईंट भट्टे है। लेकिन किसी में भी जिग-जैग तकनीक को नहीं अपनाया गया है। डॉ.रवीन्द्र मोदी ने बताया कि देश में चारों तरफ फैल रहे पर्यावरण प्रदूषण के दुष्प्रभाव इंसानों के शरीर पर नजर आ रहे हैं। प्रदूषण के कारण ब्रेन, किडनी व हृदय को खतरा होने के साथ ही मधुमेह की समस्या भी बढ जाती है। धुएं से आंखों को भी नुकसान पहुंचता है।


एनजीटी ने सुझाव देते हुए प्रदूषण में कमी लाने को कहा, वहीं ईंट-भट्टों से निकलने वाली राख के समुचित उपयोग व ईंटों के परिवहन के संबंध में समुचित कदम उठाने के निर्देश दिए। भट्टों के लिए कच्चा माल ढंककर ले जाने सहित चिमनी वाली ईंट भट्टों का निर्माण करने व ईंट भट्टों को नियमानुसार आबादी क्षेत्र व शहरी से दूर जहां पर्यावरण प्रदूषित नहीं हो ऐसे स्थान पर लगाने के लिए कहा।

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शहर के गागरोन व राडी के बालाजी रोड निवासी लल्लीबाई, संतोष, लालचन्द, बरदीबाई आदि ने बताया कि दिन में तो ईंट भट्टों के धुएं की पता नहीं चलती है। लेकिन सुबह-सुबह 4 से 6 बजे के बीच तो घरों के आस-पास धुंआ ही धुंआ रहता है। सांस लेने में भी दिक्कत होती है। विनोद, रामनारायण माली ने बताया कि धुंए से लोग बीमार हो रहे हैं, आंखों में भी खुजली चलती है। रातभर सांस में जहर घुलता है।


उपखंड में जहां-जहां भी ईंट भट्टे चल रहे हैं उनको चिन्हीकरण करने के निर्देश आज बैठक में दिए है। सोमवार तक रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर शहर के निकट ईंट भट्टे लगे हुए है उनसे लोगों को परेशानी है तो इन पर कार्रवाई करेंगे।
संतोष मीणा, उपखंड अधिकारी, झालावाड़


मैंने अभी कुछ दिन पूर्व ही ज्वाइन किया है, हां एनजीटी के निर्देश है। जिलेभर में इसकी रिपोर्ट लेकर कार्रवाई करेंगे। कहीं भी पर्यावरण प्रदूषण होता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
अनुराग यादव, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, झालावाड़