
सुनेल. आज से तीन दशक पहले तक घर में हर बड़े सदस्य के लिए चारपाई होती थी, लेकिन समय के साथ यह घरों में कम होती गई। आज शहरों में चारपाई की जगह घर में लग्जरी डबल बेड और दीवान ने ले ली है। चारपाई सिर्फ गांवों में ही अपनी पहचान बनाए हुए है। हालांकि अब यहां भी डबल बेड और दीवार का चलन बढ़ गया है। बेड और दीवान की तुलना में चारपाई को स्वास्थ्य की दृष्टि से ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। यहीं कारण है कि आज भी कई पीढ़ी पुरानी चारपाई घरों में सुरक्षित रखी हुई है। सदियों से घरों में चारपाई का उपयोग होता रहा है। घुमंतू परिवार की जरुरी चीजों में चारपाई भी होती है। वे जहां भी जाते है, उनकी जरुरत की चीजों के साथ चारपाई भी होती है। तीन दशक पहले तो घरों में परिवार के हर बड़े सदस्य के लिए एक चारपाई होती थी। कई घरों छोटे बच्चों के लिए चारपाई बनाई जाती थी, लेकिन जिस तरह से घरों में चारपाई का चलन कम हो रहा है। भविष्य में म्यूजियम में ही चारपाई नजर आएगी।
विवाह के उपहार में चारपाई
गंावों में पुत्री की शादी में परिवार की ओर से उपहार में आकर्षक चारपाई दी जाती थी। यह गांव तथा बारातियों के लिए कौतूहल का विषय होती थी, तब कीमती सागवान, रोहिड़ा की लकड़ी तथा रंगीन सूत से निर्मित चारपाई दी जाती थी। इस पर वर-वधू का नाम, विवाह की तारीख के आकार में बुनाई होती थी।
ढाबों में दिखती है खाट
अब गंावों में या फिर हाइवे के किनारे हाटलों व ढाबों पर ही खाट या चारपाई देखनेको मिलती है। ये ट्रक चालक, खलासी के सोने, आराम करने का लेकर रखी जाती है। आती है। खाट या चारपाई बनाने में माहिर लोग आजकल इसे तैयार करने में रोजाना 500 से 1000 हजार रुपए तक की मजदूरी ले लेते है।
बाराती कहते थे शाही शादी
आजकल भलेही बारातों को होटलों में ठहराया जा रहा है, लेकिन पहले शादी में जहां बारातियों को सोने के लिए चारपाई गद्दा और तकिया दिया जाता था, उसे शाही शादी माना जाता था। फाइव स्टार होटल में प्रत्येक बाराती का एसी रूप उपलब्ध करवाना साधारण बात हो गई है। चूंकि उस समय बड़े संयुक्त परिवार रहते थे, जिस घर में शादी होती थी, वे घर वाले आसपास के घरों से बारातियों के लिए चारपाई की व्यवस्था करते थे।
महंगी हो गई चारपाई
Updated on:
17 Jun 2024 10:48 pm
Published on:
17 Jun 2024 10:41 pm
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