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झालावाड़

इनको दूसरों की प्यास की चिंता, पानी के लिए खोदते पाताल

They are worried about the thirst of others and dig in the underworld for water.

झालावाड़Jun 26, 2024 / 10:59 pm

jagdish paraliya

  • भवानीमंडी. कई गांवों में आज भी बूंद बूंद पानी के लिए हर दिन संघर्ष करना पड़ता हैं। ऐसे हालातों के बीच कुछ परिवार ऐसे में भी जिन्हें दूसरों के प्यास की चिंता रहती है। इसके लिए वे जमीन से जंग लड़ते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है कुआं खोदने वाले श्रमिकों की जो भीषण गर्मी में सुबह से शाम तक कुआं खोदने के काम में जुटे हुए हैं।
भवानीमंडी. कई गांवों में आज भी बूंद बूंद पानी के लिए हर दिन संघर्ष करना पड़ता हैं। ऐसे हालातों के बीच कुछ परिवार ऐसे में भी जिन्हें दूसरों के प्यास की चिंता रहती है। इसके लिए वे जमीन से जंग लड़ते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है कुआं खोदने वाले श्रमिकों की जो भीषण गर्मी में सुबह से शाम तक कुआं खोदने के काम में जुटे हुए हैं।
घटोद गांव में कुआं खोद रहे घनश्याम ने बताया कि वह और उसके चार साथी मिलकर ठेका व हाथ के हिसाब से खुदाई का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि हम दूसरों के लिए पानी की व्यवस्था करते हैं। इसके लिए दिनरात मेहनत करते हैं लेकिन हमारे घर न तो कुआं है और न ही किसी पेयजल योजना का नल कनेक्शन।
भवानीमंडी से पांच किलोमीटर दूर गुराडिया माना गांव में एक परिवार कुआं खोदते हुए मिला। यहां श्याम सिंह व उसका पुत्र व कुछ मजदूर कुएं के अंदर खुदाई का कार्य कर रहे थे। कुएं के बाहर श्याम सिंह की पत्नी व पुत्री मशीन चलाकर मलबा बाहर निकालने में जुटी थी। श्याम सिंह ने बताया कि इस कार्य में पूरा परिवार लगा रहता है।
20 साल से यही कार्य कर रहे

  • श्याम सिंह ने बताया कि वह 20 साल से कुआं खोदने का ही कार्य कर रहा है। 50 हाथ का कुआं खोदने का 5 6 लाख में ठेका लिया जाता है। एक कुआं खोदना में करीब एक माह से अधिक का समय लगाता है। उसने बताया कि वह जो अभी कुआं खोद रहा है उसकी 25 फिट तक खुदाई हो चुकी है पर अभी तक पानी नहीं दिखाई दिया है। पानी दिखाई देने के साथ ही हमारे चेहरे पर मुस्कान आती है कि हमारी मेहनत सफल हो जाती है।

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