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पीले सोने के घटते दामों को लेकर अन्नदाताओं ने पकड़ी आंदोलन की राह

भवानीमंडी. प्रदेश के कोटा संभाग में सबसे ज्यादा सोयाबीन की फसल होती है। भवानीमंडी सहित झालवाड़ जिले में भी भरपूर मात्रा में यह उपज होती है। खरीफ सीजन में 95 फीसदी क्षेत्र में सोयाबीन की फसल है लेकिन यह खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा हो रही है। कभी अतिवृष्टि व तो कभी अल्पवृष्टि […]

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  • भवानीमंडी. प्रदेश के कोटा संभाग में सबसे ज्यादा सोयाबीन की फसल होती है। भवानीमंडी सहित झालवाड़ जिले में भी भरपूर मात्रा में यह उपज होती है। खरीफ सीजन में 95 फीसदी क्षेत्र में सोयाबीन की फसल है लेकिन यह खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा हो रही है। कभी अतिवृष्टि व तो कभी अल्पवृष्टि से उत्पादन पर असर पड़ता है तो कभी मंडी में पर्याप्त दाम नहीं मिल पाते।

भवानीमंडी. प्रदेश के कोटा संभाग में सबसे ज्यादा सोयाबीन की फसल होती है। भवानीमंडी सहित झालवाड़ जिले में भी भरपूर मात्रा में यह उपज होती है। खरीफ सीजन में 95 फीसदी क्षेत्र में सोयाबीन की फसल है लेकिन यह खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा हो रही है। कभी अतिवृष्टि व तो कभी अल्पवृष्टि से उत्पादन पर असर पड़ता है तो कभी मंडी में पर्याप्त दाम नहीं मिल पाते। पीले सोने के घटते दामों के कारण अब जिले के अन्नदाताओं में उबाल है और आंदोलन की राह पर है। मध्यप्रदेश के मालवा में भी सोयाबीन के भाव को लेकर आंदोलन किया जा रहा है।

कृषि मंडी व्यापारियों का भी कहना है कि किसानों को सोयाबीन के भाव में बढ़ोतरी होनी चाहिए जिससे किसानों को उनकी मेहनत का सही भाव मिल सके। प्रदेशभर मे सबसे ज्यादा सोयाबीन कि फसल का उत्पाद झालवाड़, बारां व कोटा जिले के कुछ हिस्सों मे होता है वही मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में भी ज्यादा पैदावर होती है।

धरना प्रदर्शन होगा

भारतीय किसान संघ के नेता पीरू सिंह ने बताया कि संघ द्वारा सोयाबीन के दाम बढ़ाने को लेकर हर वर्ष ज्ञापन दिया जा रहा है। सरकार द्वारा किसानों की मांग अभी तक पूरी नहीं की गई है। अब 9 सितंबर को किसान संघ द्वारा जिला मुख्यालयों पर सोयाबीन के दामों को लेकर धरना प्रदर्शन कर राष्ट्रपति व राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया जाएगा।

विधायक ने लिखा कृषि मंत्री को पत्र

विधायक कालूराम मेघवाल ने बताया कि केन्द्रीय कृषि शिवराज सिंह को पत्र लिखकर मांग कि गइ कि किसानों को उनकी उत्पाद का सही भाव मिले। बढ़ती लागत के बीच दामों को 6 हजार रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग की।

2 लाख 60 हजार हैक्टेयर में बुवाई

जिले में सबसे अधिक क्षेत्र में खरीफ सीजन में सोयाबीन की खेती होती है। जिले में विभिन्न जिसों की 3 लाख 40 हजार 710 हैक्टेयर क्षेत्र में बोवनी हुई। सोयाबीन का रकबा 2 लाख 60 हजार हैक्टेयर है।

गिरते दामों के कारण घाटे का सौदा

गुराडिय़ा जोगा निवासी किसान सुल्तान सिंह ने बताया कि साढ़े 4 हजार में सोयाबीन बिकी है। 10 सालों से यही दाम चल रहे हैं। लागत लगातार महंगी होती जा रही है। बोवनी से लेकर मंडी आने तक बड़ी राशि खर्च होती है। गिरते दामों के कारण सोयाबीन घाटे का सौदा साबित हो रही है।

सबकुछ महंगा हुआ दाम वहीं

कृषक पूजा नागर ने बताया कि 17 सालों से सोयाबीन की खेती कर रहे है। भाव जो मिल रहा है उससे तो लागत नहीं निकल पा रही है। इल्लियों के प्रकोप के कारण उत्पादन भी घट रहा है। मजदूरी, दवाइयां सब महंगा हो रहा है।

10 साल पहले जो दाम था आज भी वही

  • सुलिया गांव निवासी सरपंच बहादुर सिंह गुर्जर ने बताया कि सोयाबीन में इल्ली का प्रभाव अधिक है। इल्लियां नुकसान कर रही है। उत्पादन भी घट रहा है और दाम भी घट रहे है। महंगाई लगातार बढ़ रही है लेकिन दाम में आज तक बढ़ोतरी नहीं हु़ई है।