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अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से पुल बांट कमा लिए लाखों

उधर बिना बाजार भाव का आंकलन किए नगरपरिषद ने कबाड़ को ठिकाने लगा दिया।

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बिना बाजार भाव का आंकलन किए नगरपरिषद ने कबाड़ को ठिकाने लगा दिया।


झालावाड़. नगरपरिषद के लाखों रुपए के कबाड़ के सामान को महज कुछ रुपयों में बेचने के मामले में धांधली की बू आ रही है। उधर बिना बाजार भाव का आंकलन किए नगरपरिषद ने कबाड़ को ठिकाने लगा दिया।

परिषद के अधिकारियों ने इसे बेचने में इतनी जल्दबाजी की कि बिना समिति के निस्तारण कर शुक्रवार सुबह उसके रुपए जमा कराए और तुरंत सामान को संबंधित पार्टी को रीलिज भी कर दिया। फिलहाल दो ट्रैक्टर ले जाने के बाद सभापति ने इस नीलाम हुए कबाड़ के ले जाने पर रोक लगा दी।

सूत्रों ने बताया कि नगरपरिषद के मोटर गैराज स्थित स्टोर में करीब पांच वर्ष से कबाड़ में करीब २० से २५ लाख रुपए का सामान रखा था। इसके तहत पुराने कंडम ऑटो एवं कंडम ट्यूबलाइट सहित, लोहे की कुर्सी, टेबल, पुरानी लाइटों के स्ट्रक्टचर समेत कई सामान थे। इनका नीलामी कर निस्तारण होना था।

नगरपरिषद ने बकायदा कबाड़ के लिए नीलामी गुपचुप तरीके से गुरुवार को आयोजित कर लोगों में पुल बांट इस २० से २५ लाख के कबाड़ के सामान को महज २ लाख १६ हजार रुपए बेच दिया। इसमें कंडम ऑटो के करीब २ लाख रुपए अलग हंै। ऐसे में कुल ४ लाख १६ हजार रुपए में इस सामान का निस्तारण कर दिया।
-बिना समिति कर दिया निस्तारण
उधर जानकारों का मानना है कि कबाड़ के निस्तारण के लिए पहले समिति का गठन कर इस सामान का आंकलन कराया जाता। इसके बाद इसको बेचा जाता तो हो सकता है, इसके राजस्व में बढ़ोतरी होती। वहीं नगरपरिषद को करीब १०-१५ लाख रुपए का राजस्व अतिरिक्त मिलता। ऐसे में नगरपरिषद को करीब इस कबाड़ के बेचने में करीब २० से २५ लाख का चूना लग गया।
-यह हो सकता है इन रुपयों में
परिषद के कबाड़ से अधिक रुपए आने से करीब एक मोहल्ले में सड़क बन सकती थी। इसके अलावा एक पार्क में बच्चों के लिए कुछ मनोरंजन के साधन भी लग सकते थे। वहीं यह नहीं होता तो इसके अलावा फुटपाथ का निर्माण भी किया जा सकता था।
-इस तरह होता निस्तारण
करीब पांच वर्षों से ये कबाड़ धूल खा रहा था। पहले खुली नीलामी के लिए शहर में ऑटों से पूरे शहर में इसकी घोषणा की जाती। इसके बाद एक दिन तय कर खुली नीलामी की जाती। वहीं यह बोली उसकी न्यूनतम दर पहले निश्चित कर शुरू होती। बाजार भाव तय होता। लेकिन इस तरह का कुछ भी नहीं किया गया। ऐसे में नगरपरिषद को राजस्व की हानि हुई।
राजस्व संग्रहण पर ध्यान नहीं
सरकारी मातहतों को देखें तो इनका ध्यान शायद नगरपरिषद के राजस्व पर कम है। यहीं कारण है कि नगरपरिषद के अधिकारियों का ध्यान इस और नहीं है। इसी कारण २० से २५ लाख रुपए के कबाड़ के सामान महज ४ लाख १६ हजार में बेच इतिश्री कर ली गई है। यदि तरीके से निस्तारित किया जाता तो हो सकता है। परिषद की खुली नीलामी इससे अधिक रुपए भी आ सकते थे, जो परिषद के राजस्व में इजाफा करते।

कबाड़ बेचने के मामले में निश्चित रूप से धांधली हुई है। इस मामले में जांच की जा रही है। फिलहाल नगरपरिषद के स्टोर शाखा से दो ट्रैक्टर ही कबाड़ गया है। इसके बाद सामान ले जाने पर रोक लगा दी है। इस मामले में मेरे हस्ताक्षर के पहले बिना मेरी सहमति के ही नीलामी कर दी जो गलत है। राजस्व का नुकसान तो है ही। इस माामले में बाजार भाव से कबाड़ का आंकलन करेंगे।
मनीष शुक्ला, सभापति नगरपरिषद
& नगरपरिषद में कबाड़ के सामानों का निस्तारण पारदर्शी तरीके से ही किया गया है।
आरएस चारणआयुक्त नगरपरिषद