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रजिस्टे्रशन के अभाव में बैंक पट्टों को लोन के लिए पात्र नहीं मान रहा

रजिस्टे्रशन के अभाव में बैंक पट्टों को लोन के लिए पात्र नहीं मान रहा

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रजिस्टे्रशन के अभाव में बैंक पट्टों को लोन के लिए पात्र नहीं मान रहा

चक्कर पर चक्कर, फिर भी नहीं मिल रहा मालिकाना हक
झालावाड़. नगरपरिषद ने राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप स्टेट ग्रांट एक्ट के पट्टे तो जारी कर दिए लेकिन अब ऐसे अभ्यर्थियों के पट्टों के पंजीयन के लिए आयुक्त द्वारा पंजीयक कार्यालय को पत्र नहीं लिखने के कारण इन पट्टों से लोगों को लोन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोग चक्कर लगाने को मजबूर हैं। रजिस्टे्रशन के अभाव में बैंक पट्टों को लोन के लिए पात्र नहीं मान रहा। वहीं ऐसे लोगों को पट्टे मिलने के बाद भी मालिकाना हक मिलने में परेशानी हो रही है।
उधर बैंक प्रबंधन लोन के लिए ऐसे लोगों के मालिकाना हक के लिए पट्टों का रजिस्ट्रेशन मांग रहा है। ऐसे में बैंक से लोन चाहने वाले लोगों को नगरपरिषद के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि राज्य सरकार ने मई 2017 में लोगों को मालिकाना हक देने के लिए स्टेट ग्रांट एक्ट के पट्टे देने के लिए नगरपरिषद के 35 वार्डों में शिविरों का आयोजन किया गया। इसके तहत नगरपरिषद क्षेत्र में करीब 54 पट्टे जारी किए लेकिन अब इन पट्टों का रजिस्ट्रेशन पंजीयक कार्यालय झालरापाटन में नहीं होने के कारण यह लोग परेशान हो रहे है। उधर नगरपरिषद कार्यालय में ऐसे लोगों की कोई सुनने वाला भी नहीं है।
रजिस्ट्रेशन जरूरी
जानकारों के मुताबिक आरबीआई (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) ने बैंक के लोन के लिए स्टेट ग्रांट एक्ट के पट्टों के लिए रजिस्ट्रेशन पंजीयक कार्यालय से किया जाना अनिवार्य शर्त में शामिल किया हुआ है। इसके बिना बैंक आवेदक को मालिकाना हक का पात्र नहीं मान रहे है। इसके चलते दर्जनों आवेदन अभी तक बैंकों में लंबित चल रहे है। लेकिन नगरपरिषद के अधिकारियों के जूं तक नहीं रेंग रही है। पंजीयक कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि स्टेट ग्रांट एक्ट के पट्टे जारी करने में एक पत्र नगरपरिषद आयुक्त की ओर से जारी किया जाना है। इसमें नगरपरिषद द्वारा रजिस्ट्रेशन के लिए रिकमंडेशन रजिस्ट्रार को किया जाना है। इसी आधार पर इन पट्टों के रजिस्ट्री करने की कार्रवाई होगी।

आयुक्त आरएस.चारण से सीधी बात
प्रश्न. आप पट्टों के रजिस्ट्रेशन के लिए ध्यान क्यों नहीं दे रहे है।
उत्तर. ऐसे पट्टों के लिए रजिस्ट्रे्रशन की अनिवार्यता नहीं है।
प्रश्न. इसके पहले भी तो पट्टे रजिस्टर्ड हुए हैं।
उत्तर. हां तो हुए होंगे लेकिन ये पट्टे रजिस्टर्ड होना मुश्किल है।
प्रश्न. यदि पट्टे रजिस्टर्ड नहीं हुए तो आवेदकों को लोन में बाधा हो रही है। फिर आप क्या कर रहे हैं।
उत्तर. रजिस्टर्ड होकर लोन देना यह बात मेरी समझ से परे हैं। बैंक वालों को आप मेरे पास भेज दो। में समझा दूंगा उन्हें।
प्रश्न. सरकार का स्टेट ग्रांट एक्ट के पट्टे देने के बाद भी मालिकाना हक का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ। ऐसे पट्टे देने का क्या मतलब है।
उत्तर. इसमें हम क्या कर सकते हैं। हम तो नियमों के मुताबिक ही कार्य कर रहे हैं।
प्रश्न. आपको इन पट्टों के रजिस्ट्रेशन के लिए पत्र लिखने में क्या परेशानी हो रही है।
उत्तर. नहीं, मेरी जानकारी में स्टेट ग्रांट एक्ट के पट्टों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है। इसलिए पत्र नहीं लिख सकता।
नगरपरिषद में स्टेट ग्रांट एक्ट के पट्टों के रजिस्ट्रे्रशन मामले में आयुक्त से बात कर इसका सकारात्मक हल निकालेंगे।
डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, जिला कलक्टर