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स्कूल से छुट्टी होते ही आकाशीय बिजली गिरी, तीन स्कूली छात्रों की मौत

झालावाड़ के सीमावर्ती क्षेत्र मध्यप्रदेश के सोयतकलां के पास मंगलवार को दोपहर तीन बजे एक स्कूल के पास पेड़ पर बिजली गिर गई है। इसमें तीन बच्चों की मौत हो गई।
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झालावाड़

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Ranjeet Singh Solanki

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Updated: 12 Jul 2022, 6:27 PM IST

स्कूल से छुट्टी होते ही आकाशीय बिजली गिरी, तीन स्कूली छात्रों की मौत

स्कूल से छुट्टी होते ही आकाशीय बिजली गिरी, तीन स्कूली छात्रों की मौत

झालावाड़, सोयतकलां। झालावाड़ के सीमावर्ती क्षेत्र मध्यप्रदेश के सोयतकलां के पास मंगलवार को दोपहर तीन बजे एक स्कूल के पास पेड़ पर बिजली गिर गई है। इसमें तीन बच्चों की मौत हो गई। मंगलवार को दोपहर 3:00 बजे के लगभग स्कूल की छुट्टी होने के बाद बच्चे स्कूल के बाहर निकले और अचानक बारिश आ गई । बारिश के कारण स्कूल से कुछ ही दूरी पर स्थित बरगद के पेड़ के नीचे बच्चे खड़े हो गए जहां पर आकाशीय बिजली गिरी ।

बिजली गिरने के कारण तीन बच्चों की मौत हो गई और 5 गंभीर रूप से घायल हो गए घायलों का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सोयतकलाां में इलाज करा कर उनको गंभीर अवस्था में झालावाड़ रेफर किया । स्कूली बच्चों पर बिजली गिरने की घटना पर सोयतकलां क्षेत्र गमगीन हो गया । देखते ही देखते घटना की जानकारी आग की तरह फैल गई और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सोयतकला व ग्रामीण जन की भीड़ उमड़ पड़ी ।

स्कूली बच्चों में मृतक भोला पिता जगदीश वर्मा,चंदन पिता हरिश्चंद्र भील , कुंदन पिता हरिश्चंद्र भील तथा चार अन्य बच्चे घायल हुए । सभी घायल बच्चों की उम्र 10 वर्ष से लेकर 12 - 13 वर्ष की है । घटना के बाद एसडीएम,नायब तहसीलदार ,पुलिस प्रशासन तथा मौके पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे । प्राथमिक स्वास्थ्य में अव्यवस्था के चलते ग्रामीण जन आक्रोशित हुए । झुलसे बच्चों को झालावाड़ रैफर कर दिया है।

हरिश्चद्र के दो चिराग बुझे
हरिश्चंद्र भील निवासी सोयतखुर्द के दोनों पुत्र कुंदन और चंदन दोनों की मौत आकाशीय बिजली के कारण गिरने के कारण हरिश्चंद्र के परिवार के दोनों चिराग बुझ गए इस घटना से पूरे परिवार स्तब्ध रह गया ।

बच सकती थी जान समय पर नहीं मिला इलाज
ग्रामीणों में आक्रोश है सोयतखुर्द से सोयतकलां की दूरी 9 किलोमीटर है यह सड़क इतनी जर्जर हो चुकी है 9 किलोमीटर का सफर 40 मिनट में तय होता है बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं, अगर सड़क ठीक रहती तो घायलों का इलाज समय पर होता तो बच्चों की जान बच सकती थी ।