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Municipal Council….खींचतान की राजनीति में अटकी सहवरित पार्षदों की सूची

कोटा नगर निगम में सहवरित पार्षद मनोनीत, लेकिन झालावाड़ की सूची अटकी

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Municipal Council....खींचतान की राजनीति में अटकी सहवरित पार्षदों की सूची

Municipal Council....खींचतान की राजनीति में अटकी सहवरित पार्षदों की सूची

झालावाड़. कांग्रेस में उठा पटक के बीच कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए राजनीतिक नियुक्तियां की जा रही हैं। हाल में कोटा नगर निगम समेत अन्य नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में सहवरित पार्षदों को मनोनीत कर दिया है, लेकिन झालावाड़ जिले की सूची अटक गई है। जो कार्यकर्ता उम्मीद लगाकर बैठे थे वह निराश हो गए हैं। संगठन को कोस रहे हैं। सूची अटकने का कारण नामों पर सहमति नहीं बनना बताया जा रहा है। नगर परिषद में भाजपा का बोर्ड है। इस कारण कार्यकर्ता चाहते हैं कि सहवरित पार्षदों की नियुक्ति होने से उनकी नगर परिषद में ताकत बढ़ेगी तो वह जनता की समस्याओं को अधिक दमदारी से उठा सकेंगे। सरकार ने सहवरित पार्षदों को मनोनीत करने का जो दायरा बनाया है, उसके हिसाब से नगर परिषद में आठ से नौ सहवरित पार्षद नियुक्ति करने की उम्मीद है। एक विशेषजन को नियुक्त किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि शहर में कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के नेताओं ने अपने-अपने खेमे के कार्यकर्ताओं के नाम सहवरित पार्षद के लिए भेजे हैं। प्रदेश मुख्यालय ने सर्वसम्मति से नाम भेजने को कहा है। स्थानीय नेताओं में सहवरित पार्षदों के नामों पर सहमति बनाने का जिम्मा प्रभारी मंत्री को दिया है। प्रभारी मंत्री को पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा कर सहवरित पार्षदों के लिए कार्यकर्ताओं के नाम भेजने को कहा है, लेकिन नेता अपने चेहतों को पार्षद बनाने के लिए अड़े हुए हैं। इस कारण सूची ठण्डे बस्ते में डाल दी है।
पालिकाओं में इंतजार
जिले की झालरापाटन, अकलेरा, भवानीमंडी तथा पिड़ावा नगर पालिका में भी अभी तक सहवरित पार्षदों की नियुक्ति नहीं हुई है। यहां भी कार्यकर्ता पार्षदी का सपना संजोकर बैठे हैं।
नेता प्रतिपक्ष तक नहीं
कांग्रेस की ओर से झालावाड़ नगर परिषद में अभी तक नेता प्रतिपक्ष तक नहीं बना है। नगर परिषद में सभापति, उप सभापति के बाद सबसे महत्वपूर्ण व शक्तिशाली पद प्रतिपक्ष नेता का होता है। परिषद के कामकाज में प्रतिपक्ष नेता का सीधा दखल होता है। लेकिन यह पद खाली है। जिन नगर पालिकाओं में कांग्रेस का बोर्ड है, वहां भाजपा भी अभी तक प्रतिपक्ष नेता नहीं बना सकी है। जहां भाजपा का बोर्ड है, वहां कांग्रेस भी प्रतिपक्ष नेता तय नहीं कर पाई है।