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राजस्थान पत्रिका स्थापना दिवस

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Magazine story, in the words of readers

सुनेल निवासी राजस्थान पत्रिका के पाठक रामचन्द्र राठौर (82), पाठक देवीलाल सोनी (79), पाठक मुतुजा आरीवाला (81)।

सुनेल. कस्बे के मेला मैदान निवासी राजस्थान पत्रिका के पाठक रामचन्द्र राठौर (82) ने बताया कि राजस्थान पत्रिका की नियमित पाठक हूं। पत्रिका के साथ विश्वास की एक डोर बंधी है। कई बार तो ऐसा होता है कि किसी कार्य से बाहर जाने पर वहां से लौटने के बाद भी पिछले दिनों के अखबार पढ़ता हूं।

उन्होने बताया कि चाहे काला कानून या कोरोना महामारी पत्रिका ने कोरोना यौद्वा का काम किया है। पत्रिका ने अपना भरोसा लोगों के बीच बनाए रखा। गुलाब कोठारी के लेखों का विश्लेषण बेहद सटीक होते है।
जोडऩे का काम किया पत्रिका ने
घाणा चौक निवासी देवीलाल सोनी (79) ने बताया कि पिछले पचास साल से पत्रिका से जुड़ा हूं।
राजस्थान पत्रिका में हर प्रदेश की जानकारी मिल जाती है। सुनेल में रहते हुए ऐसे लगता है कि जैसे हम सभी प्रदेशों से जुड़े हुए हैं।
राजस्थान के समाचार यहां मिल जाते हैँ। वास्तव में पत्रिका एक-दूसरे को जोडऩे का काम कर रही है। चाहे धार्मिक आयोजन हो या फिर सामाजिक-शैक्षिक आयोजन। पत्रिका ने सदैव हर तरह के आयोजनों को स्थान दिया है।

सदैव सच का साथ
सैफीपुरा मोहल्ला निवासी मुतुजा आरीवाला (81) ने बताया कि पत्रिका मीडिया का धर्म निभा रहा है।
समाज को एकजुट करने में पत्रिका का प्रयास हमेशा सकारात्मक रहा है। पत्रिका ने सही मायने में कई बार लेखनी के जरिए समाज की बुराइयों को दूर करने में प्रमुख भूमिका निभाई है। पत्रिका ने सदैव सच का साथ दिया है। आम जन एवं सरकार के बीच सेतु के रूप में पत्रिका निरन्तर कार्य कर रहा है।