इधर-उधर घूमते रहे-
करीब एक घंटे तक तो वे ब्लड बैंक में इधर-उधर घूमते रहे। आखिर में बताया गया कि यहां तो मशीन खराब हो रही है। निजी ब्लड बैंक से खून लेकर आओ। ऐसे में रक्तदाता झालरापाटन रोड स्थित एक निजी ब्लड बैंक में गया और वहां से बी पॉजिटिव खून लेकर आए, तब जाकर गंभीर मरीज की डायलिसिस की गई। यह यहां रोज मरीजों की जान सांसत में आ रही है, इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज प्रशासन आंखे बंद कर मूकदर्शक बना हुआ है।