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श्राद्ध पक्ष में बढ़ गई दूध की खपत, थैलियों के दूध से चला रहे काम

    - बढ़ गए दूध के दाम

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Milk consumption increased during Shradh Paksha, work being done with

श्राद्ध पक्ष में बढ़ गई दूध की खपत, थैलियों के दूध से चला रहे काम


झालावाड़.श्राद्ध पक्ष में बढ़ती महंगाई का असर लोगों की जेब पर भी दिखाई दे रहा है। हिन्दू धर्म में अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए पितृपक्ष के दौरान प्रियजनों को भोजन कराने की परंपरा है। श्राद्ध पक्ष में भोजन के साथ खीर जरुर बनाई जाती है। ऐसे में शहर में दूध की खपत ज्यादा बढ़ गई है। वहीं लोगों को ताजा दूध नहीं मिल पा रहा हे। लोगों को पूवर्जों को खीर का भोग लगाने के लिए थैलियों के दूध से ही काम चलाना पड़ रहा है। ऐसे में दूध की सप्लाई कम होने से दूध के दाम भी बढ़ गए है। शहर में इन दिनों ताजा दूध 55 से लेकर 60 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से मिल रहा है। इसके बावजूद भी दूध नहीं मिल रहा है। वहीं इन दिनों सब्जी, दूध,मावा, आटा,बेसन,मिर्च मसाला आदि खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। बढ़े हुए दामों के कारण थाली में से पकवानों की संख्या कम होती जा रही है। पितृपक्ष में महंगाई का असर सबसे ज्यादा निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों पर दिखाई दे रहा है। महंगाई का असर सीधा लोगों की जेब पर पड़ रहा है। बाजार में देशी घी 700-800 रुपए किलो तक पहुंच गया है। वहीं दूध 55 रुपए लीटर, मावा 320 रुपए किलो होने के साथ दही, पनीर, मेवा पर भी महंगाई की मार पड़ रही है। इस स्थिति में पितृपक्ष में अपनी मंशा के अनुसार प्रियजनों को भोजन कराना भी कठिन हो रहा है।

खपत ज्यादा दूध कम आ रहा-
बड़े बाजार में दूध डेयरी व मिष्ठान भंडार संचालक हरीश खंडेलवाल ने बताया कि श्राद्ध को देखते हुए इन दिनों दूध की मांग में काफी बढ़ोतरी हुई है। सामान्य दिनों में जहां 200 लीटर दूध की मांग होती है जहां अभी 300 लीटर की मांग हो रही है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से दूधियों ने आना बंद कर दिया। उसका कारण ये है कि दिल्ली की एक दूध डेयरी ने सारा दूध गांव-गांव से एकत्रित कर दिल्ली भेजना शुरु कर दिया। ग्रामीणों को गांव में ही 8 से 9.50 रुपए प्रति फेट के हिसाब से मिल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को घर बैठे ही 60 रुपए से लेकर 70 रुपए लीटर तक दूध के दाम मिल रहे हैं। इस वजह से ग्रामीण दूध वालों ने दूध लाना बंद कर दिया है। उन्हे घर बैठे ही अच्छे दाम मिल रहे हैं, पेट्रोल का पैसा भी नहीं लग रहा। लोगों को ताजा दूध नहीं मिल पा रहा है। सरकार को दूधियों को राहत देने के लिए स्थानीय स्तर पर चारा व अन्य रुप में राहत देना चाहिए। ताकि शहर के लोगों को ताजा व शुद्ध दूध मिल सके।