
जिले में 9 हजार से अधिक नौनिहाल कुपोषित
इंवेस्टिगेटिव स्टोरी
हरिसिंह गुर्जर
झालावाड़.कुपोषण मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। एक-एक कर नन्हों की जिंदगी कपोषण के पाट में ***** रही है।
द लैंसेंट चाइल्ड एंड अडलसेंट हेल्थए द बर्डन ऑफ चाइल्ड एंड मैटरनल मालन्यूट्रिशन एंड ट्रेंड्स इन इट्स इंडीकेटर्स इन द स्टेट्स आफ इंडियाए ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी नामक रिपोर्ट में इसका भयावह रूप सामने आया है। इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की 1.04 मिलियन मौतों में करीब दो-तिहाई मुत्यु का कारण कुपोषण है।
हालांकि यह दर राजस्थानए उत्तर प्रदेशए बिहार और असम में सर्वाधिक है। इसके बाद मध्यप्रदेशए छत्तीसगढ़ए ओडिशाए नागालैंड और त्रिपुरा का स्थान आता है।
इसे कम करने के लिए केन्द्र सरकार ने पोषण अभियान की शुरूआत की हैए ताकि बच्चों में होने वाला कुपोषण दूर किया जा सके।
झालावाड़ जिले में 9696 बच्चो कुपोषित तथा 204 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए है। जिनका कुपोषण पोषण अभियान के माध्यम से दूर किया जा रहा है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालयए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार पांच वर्ष तक के बच्चों में कुपाषण के कारण होने वाली मुत्यु दर में वर्ष 1990-2017 तक कमी आई है।
आठ राज्य पिछड़े के श्रेणी में-
वर्ष 2017 में भारत में चाइल्ड स्टटिंग का प्रसार 39 प्रतिशत था, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्यप्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तराखंड सहित आठ राज्य हैए जो सामाजिक, आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों के रूप में जाने जाते हैं। यहां शिशु मुत्यु दर भी सबसे अधिक है।
पोषण अभियान-
पूर्ववती राष्ट्रीय पोषण मिशन के तहत 36 राज्योंए केन्द्र शासित प्रदेशों के सभी जिलों को चरणबद्ध तरीके से कवर किया गया है। यह वर्ष 2022 तक कुपोषण मुक्त भारत की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए एक एकीकृत बहुमंत्रालय मिशन है।
राष्ट्रीय पोषण मिशन के 2022 के लक्ष्य.
-जन्म के समय कम वजन में वर्ष 2017 से 2022 तक प्रतिवर्ष 2 प्रतिशत की कमी लाना।
. स्टंटिंग को वर्ष 20200 तक कम करके 25 प्रतिशत के स्तर तक लाना।
. 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों तथा 15.49 वर्ष की महिलाओं विद्यमान एनीमिया के स्तर में वर्ष 2017-2022 तक 3 प्रतिशत की वार्षिक कमी लाना। इसके साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ जैसे संगठन भी सतत् विकास लक्ष्य 2030 के तहत कुपोषण से मुक्ति के लिए कई कदम उठा रहे हैं।
. जन्म के समय कम वजन के प्रसार में वर्ष 2012 के स्तर से वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत तथा चाइल्ड वेस्टिंग में वर्ष 2030 तक 3 प्रतिशत की कमी लाना।
. चाइल्ड स्टंटिंग को वर्ष 2012 के स्तर से वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत कम करना।
. महिलाओं में एनीमिया के स्तर को वर्ष 2012 की तुलना में वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत कम करना।
. पहले 6 महीनों में अनन्य स्तन पान के प्रचलन को वर्ष 2030 तक 70 प्रतिशत कम करना।
जिले में 9 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित
ब्लॉक कुपोषित बच्चे अति कुपोषित बच्चे
1.अकलेरा 2563 12
2.बकानी 986 16
3ण्डग 282 22
4.मनोहरथाना 981 18
5.खानपुर 1934 26
6.भवानीमंडी 1155 35
7.झालरापाटन 1526 50
8ण्पिड़ावा/सुनेल 263 25
कुल 9696 204
(पोषण अभियान कार्यक्रम के तहत मिले बच्च)
हां सही है9 हजार से अधिक कुपोषित-
पोषण अभियान के तहत कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों का चयन कर लिया गया है। अतिकुपोषित बच्चों को माल न्यूट्रेशन ट्रीटमेंट सेंटर भेजा जाता है। कुपोषण दूर करने के लिए माताओं को समझा रहे हैं कि उनको खाना कैसे देना है। सभी केन्द्रों पर पोषण वाटिका तैयार करने के निर्देश दिए गए है। अभी बच्चों को गेहूंए दालए चावल दिया जा रहा है। पोषण अभियान 2022 तक चलेगा। हां ये सही है कि जिले में 9 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित है।
निर्मला चतुर्वेदी,उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग, झालावाड़।
Published on:
04 Oct 2020 09:01 pm
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