
झालावाड़ जिले के ज्यादातर बांध खाली
झालावाड़। जुलाई का आधा पखवाडा बीत जाने के बाद भी बारिश की लम्बी खेंच के चलते व जलस्रोत्रों में पानी की आवक नहीं होना चिन्ता का विषय है। बारिश नहीं होने से क्षेत्र के चंवली बांध का जलस्तर भी नहीं बढ़ा। जानकारी के अनुसार क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने खरीफ की बुआई कर दी है। लेकिन अब बारिश नहीं होने से चिन्ता हो रही है। हालांकि बीच बीच में कही कही बारिश की बोछारे राहत दे जाती है। रविवार को दिनभर आसमान में बादल छाए रहे, लेकिन बरसे नहीं, वर्तमान जलस्तर 348.20 क्षेत्र में चंवली बांध गत वर्ष पूरा नहीं भर पाया। जिससे सिंचाई के लिए कम पानी मिल पाया, इस बार 18 जुलाई तक बांध का लेवल 348.20 चल रहा है व कुल भराव क्षमता 356.50 मीटर है। जल संसाधन विभाग के आंकडे के अनुसार सन 2011 से 15 जुलाई के आंकडे देखे तो 2011 में 348.40, 2012 में 354.40 मीटर, 2013 में 251.20, 2014 में 352.25, 2015 में 349, 2016 में 353.50, 2017 में 349, 2018 में 347.70, 2019 में 346.90, 2020 में 351.20 मीटर लेवल था। बांध से नियमित जल शोधन यंत्र द्वारा पीने का पानी का उत्पादन किया जा रहा है। जिससे पिडावा शहर, रायपुर कस्बे सहित तीस गांवो में पेयजल उपलब्ध करवाया जाता है। चंवली बांध निर्माण से पहले क्षेत्र डार्क जोन में घोषित होने से किसानो के हालात सामान्य नहीं थे, बैंकों से ऋण नही मिल पाता था। सिंचाई के स्रोत्र कम थे ज्यादातर सिंचाई कुओं व जल स्रोत्रों के माध्यम से होता था जो अपर्याप्त था व किसानो की आर्थिक स्थिति सुदृढ नहीं थी। बांध बनने के बाद किसानों की सम्पन्नता बढ़ती गई व डार्क जोन का दंश भी हटगया। चंवली बांध सिंचाई परियोजना का निर्माण सन 2004 में पूर्ण हुआ। बांध से क्षेत्र की सात हजार सात सौ चोरानवे हेैक्टेयर भूमि सिंचित होती है जिसके लिए बांयी, दंायी मुख्य नहर, माइनर, सब माइनर, वितरिका का निर्माण हुआ। बांध से पीने के पानी के लिए चंवली पुर्नगठित पेयजल परियोजना के तहत रायपुर, पिडावा शहर सहित तीस गांवो को पेयजल आपूर्ति की जाती है। बांध निर्माण के पन्द्रह साल हो गए जिनमे से इस वर्ष सहित आठ बार भरा है। बांध सन 2004 में भर गया था, सन 2005 में बांध नही भरा व सन 2006 में बांध भरा। इसके बाद सन 2007, 2008, 2010 में बांध नहीं भरा। सन 2011, 2012, 2013 में बांध भरा, सन 2014 में बांध नहीं भरा, सन 2015 व 2016 में बांध भरा, लेकिन 2017, 2018 व 2020 में बांध नहीं भर पाया। भालता. बारिश नहीं होने से पेयजल व सिंचाई का मुख्य स्रोत छापी नदी पर बने छापी बांध का जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। अक्सर जून महीने के अंतिम सप्ताह के बाद बारिश शुरू हो जाने से बांध में जलस्तर बना रहता था। इस बार जुलाई के आधा माह बीतने तक बारिश नहीं होने से बांध का जल रीतने लगा है। जल संसाधन विभाग छापी परियोजना के अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि बांध की कुल जल भराव क्षमता 82 दशमलव 57 मिलियन घन मीटर है। जुलाई में भी भीषण गर्मी व बढ़ते तापमान के साथ ही मानसून की बेरुखी से जल घटता जा रहा है। वहीं क्षेत्र के भालता बैरागढ़ आसलपुर उमरिया के अलावा मध्यप्रदेश में बारिश नहीं होने से बांध में अभी तक पानी की आवक नहीं हुई।अभी तक क्षेत्र में मात्र 57 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। वर्तमान में बांध में 17.63 मिलियन घन मीटर पानी शेष रह गया है। इस बांध से 9375 हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई की जाती है।
Published on:
19 Jul 2021 10:42 am
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