15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

झालावाड़

एमएससी पास युवक ने थाई एप्पल बेर की खेती कर बदली किस्मत

उन्नत तकनीक से नवाचार

Google source verification

खानपुर. उपखंड क्षेत्र के गुरजेनी गांव निवासी एक 22 वर्षीय छात्र द्वारा कृषि में एमएससी की पढ़ाई पूरी कर गांव में अपनी पैतृक 5 बीघा जमीन में उन्नत तकनीक से खेती में नवाचार कर प्रतिवर्ष लाखों का मुनाफा कमाया जा रहा है।
गांव में गत 4 वर्ष पूर्व छात्र अजय नागर के पिता बृजराज नागर ने परम्परागत खेती को छोडकऱ सर्वप्रथम करीब ढाई बीघा में थाई एप्पल बेर की खेती कर इसकी शुरुआत की थी। किसान द्वारा थाई बेर से वर्षपर्यन्त बिना सिंचाई के प्रति बीघा 1 लाख से अधिक का मुनाफा कमाया जा रहा है।
छात्र अजय नागर द्वारा अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद मल्चिंग विधि से 1 बीघा में हरी मिर्च व शिमला मिर्च की खेती की जा रही है। इस विधि में प्रति बीघा 200 से 250 क्विंटल हरी मिर्च की पैदावार होने का अनुमान है। साथ ही मिर्च की क्यारियों में बूंद बूंद सिंचाई के उपयोग से कम से कम पानी में अधिक से अधिक फसल उत्पादन लिया जा रहा है। यह मिर्च की क्यारियां मल्चिंग विधि से प्लास्टिक की थैलियों से ढकी होने के कारण खेत में खरपतवार नहीं हो पाती। खेत की मेढ़ व किनारों पर पीले गेंदे के पौधे लगाए गए हैं, ताकि कीट मेढ़ पर ही रूक जाए। जबकि जैविक कीट नियंत्रण के लिए बीच बीच में चिपचिपे ट्रेप किट लगाए हैं। इनसें अकस्मात आने वाला कीट चिपककर रह जाता है। किसान द्वारा पूर्व में लहसुन की खेती को बन्द कर यह नवाचार किया था। अब अगले वर्ष खरबूज व तरबूज की फसल की प्लानिंग की जा रही है। 15 मार्च तक बैर की फसल तैयार होने पर मई माह में पौधों की कटाई करने के बाद बरसात में आई नई टहनियों से प्रतिवर्ष जोरदार फलाव आ रहा है।
रसायनों का कम प्रयोग
खानपुर गुरजेनी गांव के किसान अजय नागर द्वारा 5 बीघा में की जा रही उन्नत खेती में रसायनों का नाममात्र का उपयोग किया जाकर जैविक खाद उपयोग में लिया जा रहा हैै। थाई एप्पर बेर के बगीचे में गोबर की खाद व जैविक पेस्टीसाइड का उपयोग करने से बैर में मिठास होने के साथ प्रति किलोग्राम में 8 से 10 बैर व अधिकतम 125 ग्राम तक के बेर पौधों पर लदे हैं। किसान ने बताया कि 4 वर्ष पहले उन्होंने सर्वप्रथम थाई एप्पल बेर की खेती प्रारंभ की थी। इसके सफल होने पर गांव के अन्य किसानों ने भी प्रेरित होकर वर्तमान में 6 से 7 किसानों द्वारा बेर की खेती की जा रही है।
बाजार में थोक में 35 से 40 रुपए किलो बिक रहा
किसान द्वारा करीब ढाई बीघा में लगाए गए बगीचे में प्रतिदिन क्विंटलों बेर की तुडा़ई की जा रही है। इस बेर को कैरेटों में भरकर पिकअप वाहन में भरकर कोटा फल मण्डी में थोक में 35 से 40 रुपए किलो की दर से बेचा जा रहा है। किसान ने बताया कि प्रतिवर्ष ढाई बीघा के बेर से उन्हें 3 लाख रुपए की आय हो रही है। जबकि परम्परागत खेती में नाममात्र की आय होने से घर की आर्थिक खराब थी।
बीज रहित नींबू की फसल से वर्षभर उत्पादन
किसान द्वारा खेत किनारों पर बीजरहित वर्षपर्यन्त उत्पादन देने वाले हाइब्रिड नींबू की भी फसल ली जा रही है। इस नींबू में प्रति पौधा 50 किलो की उपज मिल रही है। गर्मियों के मौसम से इस नींबू को 80 से 100 रुपए किलो की दर से बेचकर अच्छा मुनाफा मिल रहा है। खेत में केवल 28 पौधों से ही उसे 15 हजार का मुनाफा मिला है। साथ ही नींबू के फल में एक भी बीज नहीं होने से बाजार व होटलों में इसकी अच्छी मांग है।
विभाग के प्रशिक्षण में लेते जानकारी
गुरजेनी निवासी किसान को विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाता है। किसान ने बताया कि कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी व वानिकी, कृषि विज्ञान केन्द्र सहित उपखंड क्षेत्र में आयोजित होने वाले सभी प्रशिक्षणों में उसे आमंत्रित किया जाने से कृषि व वानिकी की उन्नत खेती की उसे समुचित जानकारी हो चुकी है। ऐसे में खानपुर में धरणीधर नर्सरी खोलकर किसानों को फलदार पौधों, फूलदार व सजावटी पौधों के पौधे तैयार कर बेचे जा रहे हैं। इसके अलावा खेत में जैविक खाद का उपयोग कर सब्जी के पौध भी तैयार कर बेचे जा रहे हैं।