27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

शाकाहारी लोगों में प्रोटीन की पूर्ति के लिए मशरूम अच्छा आहार

हॉर्टिक्लचर कॉलेज में प्रशिक्षण शिविर

2 min read
Google source verification
शाकाहारी लोगों में प्रोटीन की पूर्ति के लिए मशरूम अच्छा आहार

हॉर्टिक्लचर कॉलेज में प्रशिक्षण शिविर

झालरापाटन. उद्यानिकी और वानिकी महाविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत आयोजित मशरूम की खेती उद्यमिता प्रशिक्षण शिविर का समापन हुआ।
मुख्य अतिथि कृषि विश्वविद्यालय कोटा के छात्र कल्याण निदेशक डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बताया कि भारत में खाने योग्य मशरूम की लगभग 200 प्रजातियां पाई जाती हैं, इनमें अधिकांश प्रजातियां पहाड़ी क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगती हंै। खेती योग्य मशरूम में बटन, ढिंगरी, दूध छता एवं पुआल प्रमुख हंै। मशरूम अत्यंत पोष्टिक, स्वादिष्ट व सुपाच्य खाद्य है, यह औसतन भारतीयों का प्राथमिक भोजन अनाज है। अनाज में ऊर्जा प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, परंतु प्रोटिन का अभाव रहता है, इसीलिए हमारे देश में विशेष रूप से बच्चों एवं महिलाओं में व्याप्त प्रोटिन कुपोषण सबसे बड़ी पौषकीय समस्या है। हमारे आहार में प्रोटीन का प्रमुख स्त्रोत दाल है। जिसके दाम दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं, जिससे प्रतिव्यक्ति दाल की उपलब्धता प्रभावित हो रही है ऐसे में हमारे देश में सर्वाधिक शाकाहारी लोगों के आहार में प्रोटीन की पूर्ति के लिए मशरूम अच्छा आहार है। शुष्क भार के आधार पर मशरूम में 25 से 35 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है जो कि सब्जी व फल की तुलना में अधिक सुपाच्य व उच्च कोटि का होता है।
अभाव रहता है
सहआचार्य डॉ. पीएस चौहान ने बताया कि हमारे शरीर के लिए आवश्यक दो अमीनो अम्ल लाइसीन और ट्रिप्टोफेन भी मशरूम में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हंै। जबकि अनाज में इनका अभाव रहता है। मशरूम में गुणात्मक प्रोटीन के अलावा विटामीन सी एवं बी कांपलेक्स भी मौजूद रहते हैं। कॉलस्ट्रोल मुक्त, कम वसा, अधिक पोटेशियम के अलावा औषधीय गुण भी इसमें भरपूर होते हैं, जिससे उच्च रक्तचाप, ह्दय रोगियों एवं मोटापा वालों के लिए यह एक उपयुक्त आहार है।
काफी उपयोगी
सहआचार्य डॉ. एसबीएस पांडे ने बताया कि न्यूनतम शर्करा एवं स्टार्च की अनुपस्थिति के कारण मशरूम मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी आहार है। क्षारीय भस्म और रेशों की अधिकता के कारण मशरूम उच्च अम्लता एवं कब्ज रोगियों के लिए काफी उपयोगी है।
खेती बहुत आसानी
सहआचार्य डॉ. वीसी प्रहलाद ने बताया कि इससे स्वादिष्ट व्यंजन, सब्जियां, सूप, पुलाव, पकोड़ा, पीजा व अचार बनाए जाते हैं। ढिंगरी मशरूम की खेती बहुत आसानी से की जा सकती है। प्रशिक्षणार्थी राजकुमार, मनीष मेहरा, अशोक ने बताया कि ढिंगरी मशरूम की पोष्टिकता एवं स्वाद सफेद बटन मशरूम के समान है, इसकी पैदावार के लिए खेती की आवश्यकता नहीं होती इसे घर के खाली कमरे व झोपड़ी में भी आसानी से लगाया जा सकता है। परिशोधित मशरूम निर्यात कर विदैशी मुद्रा भी कमाई जा सकती है।
घर पर उगाया
अध्यापक शिव कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने घर पर मशरूम लगा रखी है। आयस्टर मशरूम को ढिंगरी मशरूम के नाम से जाना जाता है। इसका आकार सीपनुमा होता है। दूसरे छत्र की भांति इसका शीर्ष गोल व टोपीनुमा छत्रक दंड से अलग नहीं होता बल्कि यह दंड उपर जाकर हथेली की तरह फैल जाता है। छत्रक की नीचली सतह पर बारिक पर्ते होती है, जिसमें असंख्य बीजाणु होते हंै। ढिंगरी तेजी सेे बढऩे वाली स्वादिष्ट मशरूम है, इसे छाया में सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
छायादार जगह खेती
इसकी खेती भी छायादार जगह आसानी से हो जाती है। समन्वयक हनुमान सिंह ने मशरूम उगाने के उद्ेश्य, ऋतुओं पर आधारित मशरूम की वर्षभर खेती, पौषक उपयोगिता औषधीय महत्व, बीज उत्पादन, इनके उत्पादन के लिए कंपोस्ट बनाने, उत्तम खाद के गुण इसमें लगने वानली बीमारी व निदान के बारे में जानकारी दी। संचालन डॉ. हेमराज छीपा ने किया।