
झालावाड़.एआइ को लेकर स्कूली शिक्षा में भी कार्य हो रहा है। सीबीएसई विशषज्ञों का कहना है कि एआइ(आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) नई तकनीक है। भविष्य में इसके उपयोग से छात्रों को अलग-अलग विषयों में लाभ मिल सकता है। इसलिए इस तकनीक से जोडऩे के लिए शिक्षकों की भी ट्रेनिंग दी जा रही है। इन दिनों एआइ का उपयोग सबसे ज्यादा शिक्षा के क्षेत्र में संचार तकनीक को बेहतर करने में हो रहा है। मोबाइल से लेकर ऑनलाइन इसकी जानकारी दी जा रही है। सीबीएसई स्कूलों के करिकुलम में एआइ को प्राथमिकता के साथ 6 से 12वीं तक शामिल किया जा चुका है। भाषा की तरह एआइ और कप्यूटर दोनों में से किसी एक को चुनने का छात्रों के पास विकल्प होगा। एआइ से शिक्षा में छात्रों को मुख्य रूप से लेटेस्ट वर्जन पढ़ाया जा सकेगा। एआइ से छात्रों को भावनात्मकता, सामाजिक व व्यावहारिक ज्ञान से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार की शिक्षा से छात्र भविष्य में एआइ में जो भी कोडिंग और डिकोडिंग करेंगे, उसे वे इनोवेटिव प्रोजेक्ट में शामिल कर सकेंगे। हालांकि एआइ के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों का भी संकट है। कोडिंग और डिकोडिंग पर रखनी होगी नजर- बच्चे का मन स्कूली शिक्षा के दौरान खेलों में ज्यादा रहता है। ऐसे में वे इस मशीन का उपयोग किसी प्रकार के गलत खेलों को खेलने में न करें। इसकी कोडिंग और डिकोडिंग किसी मनोरंजक खेल के लिए न हो। इसलिए शिक्षक एआइ का ज्ञान देते समय इस बात पर नजर रखेंगे कि इसका उपयोग किसी भी प्रकार से नकारात्मक रूप में न हो। इससे सिर्फ व्यावहारिक व मानवीय क्षमताओं को बेहतर करने पर ध्यान दिया जाए।
गेमिंग में न हो उपयोग।
- सिर्फ क्रिएटिविटी पर फोकस।
-संवेदनाओं की डिटेलिंग पर लर्निंग।
-रोबोट्स क्रिएशन पर तवज्जो।
-नई टेक्नोलॉजी समझने में।
-इनोवेटिव मशीन क्रिएशन।
-नए विषयों की अधिकाधिक जानकारी।
-टेक्नोलॉजी को बेहतर करने में।
एआइ तकनीक के माध्यम से स्कूल में बच्चों को ऐसे तकनीकी उपकरण बनाना सिखाए जाएंगे, जो मानवीय मूल्यों को समझें। मशीन में मानवीय सोच को समझने वाले डिटेलिंग की जाएगी। वह इंसान की सोच को समझते हुए उसके कार्यों को आसान बनाने में मदद कर सकेगी।
एआइ की अब समय के साथ आवश्यक हो गई हैं। अब सब आधुनिक होता जा रहा है और इसमें शिक्षा सबसे अहम है। सरकार को इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के दौर में स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के लिए ऐसा माहौल देना होगा जो उन्हें आगे जाकर आधुनिक दौड़ में खड़ा रख सके। लेकिन इसमें सबसे बड़ी दिक्कत कहीं विषय अध्यापक नहीं हैं, तो कहीं जरूरत के अनुसार संकाय तक नहीं खुले हुए। ऐसी छोटी-छोटी जरूरतों को तत्काल पूरा किया जाना चाहिए। जिससे बच्चों को राहत मिल सके। स्कूलों में एआइ के लिए अलग से शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए, तभी इस विषय को खोलने का फायदा विद्यार्थियों को मिल सकेगा।
सभी सीबीएसई स्कूलों में एआइ केरिकूलम में शामिल किया गया है। हमने जयुपर से एक्सपर्ट को बुलाकर कर तीन दिन का प्रशिक्षण करवा दिया है।हमने यहां से कम्प्यूटर टीचर को रिजनल ऑफिस भेजकर प्रशिक्षण करवा दिया गया है। अभी हमने 9-10वीं में इस सब्जेक्ट को लागू किया है।
Updated on:
10 Feb 2025 11:05 am
Published on:
10 Feb 2025 11:04 am
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