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प्रदेश में तीसरे नंबर का एनआईसीयू, फिर भी प्रतिमाह 50 नवजात की हो रही मौत

- जनाना चिकित्सालय के शिशु विभाग का मामाला
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झालावाड़

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Hari Singh Gujar

•

Updated: 15 Dec 2020, 10:51 PM IST

NICU number three in the state, yet 50 newborn deaths per month

प्रदेश में तीसरे नंबर का एनआईसीयू, फिर भी प्रतिमाह 50 नवजात की हो रही मौत


एक्सक्सूसिव
हरिसिंह गुर्जर
झालावाड़. कोटा के जेेके लोन चिकित्सलय में ही नहीं। जिले के सबसे बड़े जनाना चिकित्सालय के शिुश रोग विभाग में भी मौत का आंकड़ा प्रतिमाह करीब 50 पर पहुंच रहा है।जबकि एनआईसीयू प्रदेश में उपकरण सहित अन्य सुविधाओं में तीसरे स्थान पर है। इसके बाद भी प्रतिमाह 50 बच्चें की मौत होना, चिकित्सालय प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि चिकित्सक मौतों का कारण बाहर से आने वाले गंभीर बच्चों की मौतें ज्यादा होना बता रहे हैं। लेकिन मौत का आंकड़ा चौकाने वाला है।


प्रदेश में ऐसे है तीसरे स्थान पर-
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के जनाना चिकित्सालय का एनआईसीयू (नवजात गहन चिकित्सा इकाई)राजस्थान में तीसरे स्थान पर है। यहां इंफेक्शन दर कम करने, साफ-सफाई, उपकरण की उपलब्धता, प्रीमेच्यौर बच्चों का फॉलोअप सहित करीब 12 पेरामीटर को पूरा करने पर तीसरे स्थान पर रखा गया है। यहां 24 घंटे यानी तीनों शिफ्टों में डॉक्टर मौजूद रहते हैं।

ये उपकरण है जनाना चिकित्सालय में
वेंटीलेटर-10
वार्मर-40
फोटो थैरेपी मशीनें-11
टेम्प्रेचर लोगर्स, सीधे ऑनलाइन जयपुर से कनेक्ट- 29
इन्फ्यूजन पंप-52
ऑइल हीटर-8
पल्स ऑक्सीमीटर-2
मल्टी मॉनीटर- 14

इन उपकरणों की जरूरत-
ब्ल्यूरीबीनोमीटर-2 (एक है लेकिन खराब है)
फोटौथैरपी मशीन-10
पल्स ऑक्सीमीटर 20 हर बेड पर एक होने चाहिए
- ऑटो रूम क्लोजर की जरूरत
- एनआईसीयू नियमों के अनुसार एल्युमिनियम की जगह प्लाईवुड के गेट की जरूरत।
- अभी नर्सिंग स्टाफ 30 ही जबकि नियमानुसार हर बेड पर एक नर्सिंग कर्मी की जरूरत होती है।

तीसरे स्थान पर फिर भी जनाना चिकित्सालय में प्रतिमाह 50 मौतें

माह बच्चों की मौतें
जनवरी 48
फरवरी 41
मार्च 49
अप्रेल 48
मई 37
जून 41
जुलाई 53
अगस्त 51
सितम्बर 51
अक्टूबर 64
नवम्बर 51

ये है मौत के कारण-
1. जिले के सीएचसी, पीएचसी सहित मध्यप्रदेश के आगर, सुसनेर, जीरापुर, शाजापुर तक के बच्चे जो गंभीर स्थिति में आते हैं।
2. जनाना चिकित्सालय में जन्म के समय दम घुटने के मामले में मौतें।
3.संक्रमण के कारण मौतें।
4. प्रीमैच्योर बच्चों का कम वजन होना।

ग्रामीण क्षेत्रों से बच्चे सीरियस आते हैं-
हमारे पास पर्याप्त संसाधन है। लेबर रूम में भी पीजी डॉक्टर रहते हैं। फेरीफैरी में स्थिति खराब हैए वहंा से ही बच्चा सीरियस आता है। फिर भी हमारी तरफ से पूरी कोशिश रहती है कि किसी बच्चे की मौत नहीं हो। इस मेडिकल कॉलेज है जिसमें लेबर रूम में भी पीजी रहते हैं। 24 घंटे डॉक्टरों का सुपरविजन रहता है। अन्य जिलों से अच्छे सुविधाएं है।
डॉ. गौत्तम नागौरी, विभागाध्यक्ष, शिशु रोग विभाग, जनाना चिकित्सालय, झालावाड़।