जानकारी के अनुसार कई शिक्षक तो ऐसे हैं जिन्होंने पांच साल में विद्यालयों की शक्ल तक नहीं देखी है। इसमें जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक कार्यालय, अतिरिक्त परियोजना निदेशक समसा, जिले के आठ ब्लॉक के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान, उपखंड अधिकारी कार्यालय, अतिरिक्त जिला कलक्टर, जिला परिषद् कार्यालय, डाइट झालरापाटन, पंचायत समिति एवं सांख्यिकी विभाग कार्यालय सहित अन्य विभागों में लंबे समय से लगभग 80 से 90 शिक्षक विभिन्न कार्यालयों में लगे हुए है। जिले में विद्यालयों की स्थिति वैसे ही शिक्षकों के मामले में दयनीय चल रही है। अधिकांश विद्यालयों में प्रधानाचार्य, व्याख्याता,वरिष्ठ अध्यापकों के पद रिक्त चल रहे है। कई जगह तो द्वितीय श्रेणी और तृतीय श्रेणी के अध्यापकों के पास ही पीईओ का कार्यभार है। ऐसी अव्यवस्था में यदि यह प्रतिनियुक्ति पर लगे शिक्षक अपने मूल पदस्थापन स्थल पर जाते है तो शिक्षा का स्तर और परिणाम में अच्छा रहने की उम्मीद है।