
पुराने आंगनबॉडी भवन जर्जर, फिर से नए की घोषणा
झालावाड़.जिले में नौनिहालों के पालन-पोषण और शुरुआती शिक्षा के लिए सरकार द्वारा संचालित आंनगबाड़ी केंद्रों के हाल आज भी बेहाल है। कहने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के पास माताओं और बच्चों के लिए करोड़ों रुपए के बजट का आवंटन हर साल होता है,लेकिन यह बजट कहां से आकर कहां चला जाता है यह सिर्फ अधिकारी और उनके द्वारा बनाए गए कागज ही जानते है। करोड़ों रुपए का बजट हर साल स्वीकृत होने के बाद भी आंगनबाड़ी केंद्रों के हाल बेहाल है। विभाग के पास स्वयं के आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या भी सिमित है। शेष सभी आंगनबाडिय़ां या तो किराए के भवनों में चल रही है या फिर अन्यत्र स्थान पर। ऐसे में राजस्थान सरकार ने अपने पांचवे बजट में फिर से प्रदेश में 2000 नए आंगनबॉड़ी केन्द्र खोलने की घोषणा कर दी। इससे अच्छा तो ये होता कि प्रदेश में बड़ी संख्या में जर्जर व सुविधाहीन आंगनबॉड़ी केन्द्रों को सर्व सुविधायुक्त बनाने व मरम्मत के लिए अलग से बजट की घोषणा की जानी चाहिए थी। सूत्रों ने बताया कि नई घोषणा के अनुसार जिले में करीब 150 नए आंगनबॉड़ी केन्द्र खोले जाएंगे। जिसमें करीब 80 मिनी आंगनबॉड़ी केन्द्र होंगे। लेकिन सवाल उठता है कि बरसों से संचालित हो रहे जर्जर केन्द्रों को आखिर सरकार मरम्मत क्यों नहीं करवा रही है या ध्वस्त कर बनाने योग्य का पुन: निर्माण क्यों नहीं करवा रही।
726 भवन जर्जर, फिर से 150 की घोषणा-
सूत्रों ने बताया कि जिले में 594 भवन क्षतिग्रस्त है, जो मरम्मत योग्य है। वहीं करीब 132 भवन जीर्ण-क्षीर्ण है। ऐसे में राज्य सरकार को बजट में इनके नवनिर्माण के लिए अलग से बजट की घोषणा करनी चाहिए थी, इसकी बजाए राज्य सरकार ने बजट में फिर से 2000 नए आंगनबॉड़ी केन्द्रों की घोषणा की, जिसमें से करीब 150 नए केन्द्र झालावाड़ जिले में भी बनाए जाएंगे।
लाखों का बजट फिर भी किराए के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र
इतना ही नहीं कुछ आंगनबाड़ी केंद्र कच्चे तो कुछ अधूरे भवनों में भी चल रहे है। जिले में कुल 1513 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे है जिनमें से करीब एक हजार बड़े केंद्र है जबकि 513 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे है, जिनके माध्यम से बच्चों का विकास करने का प्रयास किया जा रहा है।
भवन किराए के-
महिला एवं बाल विकास विभाग के पास 1513 में से स्वयं के भवन 1020 ही है। इसके अतिरिक्त 493 आंगनबाडिय़ां किराए के भवनों में संचालित हो रही है। इसके साथ ही कई आंगनबाडिय़ां राजकीय स्कूलों के कक्षों में चल रही है, तो कई पंचायत भवनों में बने अतिरिक्त कक्ष के माध्यम से संचालित हो रही है। लंबा समय होने के बाद भी विभाग स्वयं के भवन स्थापित नहीं कर पाया है।
जिले में 304 में सुविधा ही नहीं-
जिले में संचालित होने वाले आंगनबॉडी केन्द्रों में करीब 304 आंगनबॉडी केन्द्र में तो ऐसे है जहां शौचालय तक की सुविधा नहीं है। करीब 938 भवन ऐसे है जहां बिजली की सुविधा तक नहीं है।
जिले में संचालित जर्जर/ क्षतिग्रस्त आंगनबॉडी केन्द्र
परियोजना क्षतिग्रस्त भवन जीर्ण-शीर्ण भवन
अकलेरा 83 9
बकानी 61 20
भवानीमंडी 95 23
डग 46 22
झालरापाटन 38 13
खानपुर 8 13
मनोहरथाना 92 13
पिड़ावा 171 19
कुल 594 132
मरम्मत के लिए बजट मांगा-
जिन केन्द्रों में बिजली नहींहै उनकी सूचना भेज दी गई है। विद्युत विभाग में डिमांड के लिए फाइल लगा रखी है। जर्जर भवन तो है, लेकिन उनमें किसी में भी आंगनबॉडी केन्द्र संचालित नहीं किया जा रहा है। 400 से अधिक भवन किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में 2 हजार नए आंगनबॉडी की घोषणा की है,उसमें से झालावाड़ जिले में काफी केन्द्र नाए खोले जाएंगे। मरम्मत के लिए बजट का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
महेश चन्द गुप्ता, उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग, झालावाड़।
Updated on:
19 Feb 2023 09:25 pm
Published on:
19 Feb 2023 09:15 pm
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