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एक ऐसा शहर जहां चोर मस्त के बिजली चोरी में , आम उपभोक्ता सांसत में

इस बार जितनी सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली चोरी के मामलों में मिली है।

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झालावाड़. जयपुर डिस्कॉम द्वारा इस बार बिजली चोरी में रोचक तथ्य सामने आए हैं। इन तथ्यों में सर्वाधिक बिजली चोरी शहरी क्षेत्रों में होने की बात सामने आई है।
इसका प्रमुख कारण डिस्कॉम के अभियंताओं ने नगरपरिषद एवं कॉलोनियों की लाइटों का बेवजह जलना एवं सीधे आंकड़ों से चोरी करना प्रमुख कारण है। दिनभर बिजली जलने के मामलों में यदि नोटिस व कार्रवाई की जाए तो ऐसे बिजली चोरी के मामले रोके जा सकते है।

इस बार जितनी सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली चोरी के मामलों में मिली है।
उससे कई गुना पीछे अभी शहरी क्षेत्र है। बिजली चोरी के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले वर्ष २०१६ में अकलेरा में ५५.८६ प्रतिशत बिजली चोरी थी जो जनवरी २०१७ में अब २९.८६, मनोहरथाना में ५३.१६ से ३५.६८, डग में ३५.४४ से २९.४, पिड़ावा में ४५.५८ से ३२.५५, बकानी में ३२.२७ से १७.३१, भवानीमण्डी में ३१.७३ से १२.४४, सुनेल में ३३.८३ से १७.०७ रह गई।
डिस्कॉम के आंकड़ों पर नजर
डिस्कॉम के आंकड़ों पर गौर करें तो झालावाड़ में चोरी २७.९१ से बढ़कर ३४.८२ एवं झालरापाटन के शहरी क्षेत्रों में २७.९२ से २७.२२ हो गई है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में डिस्कॉम के आंकड़ों पर गौर करें तो कुल २३.१९ प्रतिशत छीजत चल रही है।
स्वयं भी रहें जागरूक

बिजली बचाने के लिए लोगों को भी पहल करनी चाहिए। इसके लिए जहां बिजली व पंखा चलता मिले उसे तुरंत बंद किया जाए। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर से बिजली लेने के मामले में काम होते ही उसकी सप्लाई बंद करनी चाहिए। इस तरह से भी बिजली का उपभोग कम बिजली चोरी पर अंकुश लगाया जा सकता है।
इसलिए बढ़ रही छीजत
शहरी क्षेत्र में छीजत बढऩे का प्रमुख कारण सरकारी कार्यालयों द्वारा बकाया जमा नहीं कराना है। करीब एक दर्जन सरकारी कार्यालयों पर एक करोड़ रुपए की राशि बकाय चल रही है। इसमें सर्वाधिक बकाया नगरपरिषद के है।

वहीं नगरपरिषद द्वारा मोहल्लों में लगाए अधिकांश पोलों पर दिन में लाइटों का जलना भी एक प्रमुख कारण है। वहीं कई घरों में नए कनेक्शन लेकर पुराना बकाया जमा नहीं करने के कारण यह छीजत का प्रतिशत बढ़ रहा है। शहर के धनवाड़ा, मल मोहल्ला एवं कच्ची बस्ती क्षेत्रों में सीधे लाइन से आंकड़े डालकर बिजली चोरी करने से लोग नहीं चूक रहे है। ऐसे में बिजली की छीजत का प्रतिशत बढ़ा है।
डिस्कॉम का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में कम हुआ है। लेकिन शहरी क्षेत्रों में यह छीजत बढ़ी है। इसको रोकने के प्रयास कर रहे है। शहरी क्षेत्रों में निकायों का बकाया अधिक है। वहीं बिजली के बढ़े बिलों की जानकारी मिली है। ऐसे मामलों को दिखवाते है।
जेके मिश्रा, अधीक्षण अभियंता जयपुर डिस्कॉम