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जिले में 750 हैक्टेयर में महिलाएं कर ही जैविक खेती

- जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने की कवायद शुरू कर दी गई है। जैविक खेती के तहत महिला किसान रासायनिक खाद व अन्य दवाई का खेत में उपयोग नहीं कर स्वयं के बनाएं परम्परागत उर्वरक व दवाई का ही उपयोग कर रही है

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Only women are doing organic farming in 750 hectares in the district.

जिले में 750 हैक्टेयर में महिलाएं कर ही जैविक खेती

जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने की कवायद शुरू कर दी गई है। जैविक खेती के तहत महिला किसान रासायनिक खाद व अन्य दवाई का खेत में उपयोग नहीं कर स्वयं के बनाएं परम्परागत उर्वरक व दवाई का ही उपयोग कर रही है। इससे इंसान व खेती दोनों की सेहत सुधर रही है। जिले में राजीविका की ओर से महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसके तहत करीब 750 हैक्टेयर में जैविक खेती करवाने का लक्ष्य है। जिले में महिलाओं के करीब 150 समूह इस काम को कर रही है जिन्हे प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए पहले महिला सखी को प्रशिक्षण दिया जाता है, वह अपने समूह में अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देती है फिर महिलाएं स्वयं के स्तर पर अपने खेतों में वर्मीकम्पोस्ट यूनिट लगाती है, जहां देशी पद्धति से वर्मीकपोस्ट खाद तैयार करती है। जिले में ये काम दो साल से किया जा रहा है।

इस तरह से करते हैं बीमारी को कंट्रोल-

समूह में महिलाएं अपने स्तर पर ही प्राकृतिक तरीके से धतूरा, नीम की निबोंली, पत्तियां, जर्दा व अन्य तरह के पत्ते मिलाकर फसलों में लगने वाले कीट व बीमारियों पर कंट्रोल किया जाता है। खुद भी काम में लेती है बेच भी रही- बीज प्रमाणन अधिकारी आरएस वैष्णव ने बताया कि हमने मनोहरथाना व कई जगह ऑडिट की है उसमें देखा कि महिलाएं प्रशिक्षण के बाद स्वयं अपने खेत में वर्मीकपोस्ट को काम में लेती है, उसके बाद बचता है उसे बेचती भी है। महिलाओं ने बताया कि शुरुआत में काफी दिक्कत आई है, अब धीरे-धीरे समझ में आ गया है। तो स्वयं के खेतों मेें पूरी तरह से जैविक खाद काम में लेती है,इससे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। रासायनिक खाद का फसलों में जल्द असर नजर आता है, लेकिन लगातार तीन साल तक जैविक खाद काम में लेने से मिट्टी की उर्वरा क्षमता बढ़ जाती है। फिर वह भी रासायनिक खाद के बराबर पैदा देने लग जाती है।जिले में महिलाओं के 150 समूह जैविक खेती पर काम कर रहे हैं।

मनोहरथाना ब्लॉक में 50 ग्रुप कर रहे काम-

ब्लॉक समन्वयक विनोद कुमार यादव व सतीश सिंह चौहान ने बताया कि मनोहरथाना ब्लॉक में एनआरईपीटी के तहत 50 महिलाओं के लोकल समूह काम कर रहे हैं। जिसमें 786 महिलाएं सदस्य है। जिनके द्वारा 332 हैक्टेयर में जैविक खेती की जा रही है। इसमें हर माह लोकल महिला समूह की बैठक की जाती है। जिसमें उन्हे जैविक खेती के बारे में बताया जाता है। आगे चलकर किसानों को पूरी तरह से जैविक खेती की ओर मोडऩे का मकसद है।

जैविक खाद के फायदे-

- मृदा की उत्पादकता में बढ़ोतरी करता है

- मृदा के वायु संचार में बढ़ोतरी करता है

- मृदा की जल संग्रहण क्षमता में बढ़ोतरी करता है

- पौधों को आवश्यक सभी प्रकार के पोषक तत्व प्रदान करता है।

इस तरह बनाते है जैविक खाद व दवाई-

राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद की ओर से बनाए गए समूह की महिलाएं देवीबाई व रामकन्या ने बताया कि उन्हे पहले प्रशिक्षण दिया जाता है। अब स्वयं दवाई बनती है। जिसमें नीम, करंज, सीताफल, अरंडी, आक, धतूरा, अमरुद्ध, बेल की पत्तियां, तीखी हरी मिर्च, लहसुन, हल्दी, अदरक, गोमूत्र, पानी व गोबर को मिलाकर दशपर्णी नामक अर्क बनाती है। जो पूरी तरह से जैविक है, इससे किसी प्रकार को नुकसान नहीं होता है। फसलों में लगने वाले कीट व अन्य रोग में काम लिया जाता है। फसलों में पूरी तरह जीवामृत व नीम पत्ती का शत आदि काम में लेती है। जैविक दवाईयां ही काम में ले रही- इंसानों में कैंसर जैसी बीमारी का कारण रासायनिक खेती करना ही है। मुझे राजीविका के द्वारा समूह में जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया है, अब मैं पूरी तरह से वर्मी कंपोस्ट व अन्य जैविक दवाईयों के माध्यम से खेती कर रही हूं।

माया बाई, झांसी की रानी समूह, बांसखेडी, मनोहरथाना।

वर्मीकंपोस्ट ही काम में ले रही-

मैं खेतों में नीम,धतूरा व अन्य से बनाई दवाई को काम में ले रही है, खाद भी गोबर से बनी केंचुए की वर्मी कंपोस्ट काम में ले रही हूं। इससे रासायनिक खाद व दवाईयों पर होने वाला खर्च बच गया। धीरे-धीरे आमदनी भी अब अच्छी होने लगी है।

गायत्री शर्मा, टोडरी जगन्नाथ, मनोहरथाना।

किसान जैविक खेती की ओर मुड़े

हमारा प्रयास है कि महिलाओं के माध्यम से किसान जैविक खेती की तरफ मुव हो। इसके लिए महिलाओं को लोकल ग्रुप के माध्यम से जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इससे खेती पर होने वाला खर्च भी कम आ रहा हे। इंसानों में होने वाली कैंसर जैसी घातक बीमारी भी नहीं होगी।किसानों को उनकी फसल का दाम भी अच्छा मिलेगा।

अमित दूबे, जिला प्रबन्धक, राजीविका, झालावाड़।