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अफीम पर काली व सफेद मस्सी रोग का हमला, किसान ​चिंता में डूबे, कीटनाशक का ले रहे सहारा

कई कही जगह तो पत्तों में छेद हो गए हैं। इससे फसल की चाल एकदम से रुक सी गई है।

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किसानों ने बताया कि अफीम की फसल की बुआई करीब 80 से 90 दिन पहले की थी। फसल अच्छी खासी चल रही थी। लेकिन अचानक फसल में काली मस्सी का प्रकोप आ गया है, जिसके चलते काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुरू से लेकर आखिर तक रात दिन एक करके फसल को बड़ा किया।

क्षेत्र में अफीम फसल पर सफेद व काली मस्सी रोग का प्रकोप चल रहा है। परेशान किसान कीटनाशक का छिड़काव कर रोग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं।

ग्राम पंचायत कुड़ीखेड़ा, मिश्रोली, करावन व एमपी बॉर्डर के गांव कुंतलखेडी, बड्यिा आदि में अफीम फसल पर फूल और डोडे पूरी तरह आ गए हैं। आठ दिन से लगातार सफेद व काली मस्सी का प्रकोप अफीम फसल पर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जिसके चलते किसानों की चिंता बढती जा रही है।

किसानों ने बताया कि अफीम की फसल की बुआई करीब 80 से 90 दिन पहले की थी। फसल अच्छी खासी चल रही थी। लेकिन अचानक फसल में काली मस्सी का प्रकोप आ गया है, जिसके चलते काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुरू से लेकर आखिर तक रात दिन एक करके फसल को बड़ा किया।

पहले तो मौसम ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है ओर अब अचानक फसलों पर काली मस्सी आने लगी है। जिसके चलते काली मस्सी व सफेद मस्सी दोनों फसल के पौधो पर बैठ कर उन्हें नुकसान पहुंचा रही है।

पीले पड़ने लगे पत्ते

किसान विजय सिंह, सुरेश कुमार, गोविंद सिह परिहार ने बताया कि अफीम फसल ऐसे तो अच्छी है पर फूल व डोडे आने के बाद रोग का हमला हो रहा है। अचानक आठ दिन से लगातार फसलों पर सफेद मस्सी व काला मोयला फसलों के फूलों पर असर डाल रहा है। इससे पत्ते पीलेेपडऩे लग गए हैं। कई कही जगह तो पत्तों में छेद हो गए हैं। इससे फसल की चाल एकदम से रुक सी गई है। इससे फूल अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं खिल पा रहे हैं।