
पिछले कई वर्षों से संतरे के पौधों में काली मस्सी का प्रकोप होने से पौधा व फूल काले पड़कर झड़ जाने से फलाव नहीं आ पा रहा था। साथ ही बैमोसम बारिश व जलवायु परिवर्तन के कारण प्रतिवर्ष संतरे की फसल खराब हो रही है। इसके चलते पिछले कुछ वर्षो से क्षेत्र में लगे संतरे के बगीचों को किसानो ने नष्ट कर दिया या फिर जेसीबी मशीनों से खेतों में लगे बगीचों को उखड़ा दिया था।
खानपुर उपखंड क्षेत्र में पिछले 3 वर्षो से संतरे की फसल में फलाव नहीं आने व भाव नहीं मिलने से किसानों का इससे मोह भंग हो रहा था। लेकिन इस बार संतरे में बंपर फलाव के साथ भावों में तेजी से किसानों की बल्ले बल्ले हो रही है। पिछले कई वर्षों से संतरे के पौधों में काली मस्सी का प्रकोप होने से पौधा व फूल काले पड़कर झड़ जाने से फलाव नहीं आ पा रहा था। साथ ही बैमोसम बारिश व जलवायु परिवर्तन के कारण प्रतिवर्ष संतरे की फसल खराब हो रही है। इसके चलते पिछले कुछ वर्षो से क्षेत्र में लगे संतरे के बगीचों को किसानो ने नष्ट कर दिया या फिर जेसीबी मशीनों से खेतों में लगे बगीचों को उखड़ा दिया था।
गत वर्ष ही सोजपुर, भरतपुर, जगदीशपुरा सहित गांवों में कई किसानो ने बगीचों को नष्ट किया था लेकिन इसके विपरीत इस बार शेष बचे बगीचों में इस बार जोरदार फलाव आने से खेतों में बगीचे लदकर पौधे जमीन से अड़े हुए है। ऐसे में किसानों द्वारा बल्लियां लगाकर पौधों को सहारा देकर बगीचों की दिन रात सुरक्षा की जा रही है।
उपखंड क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में संतरे के कई बीघा में बगीचे लगे हुए है। क्षेत्र के तारज, बुखारी, सारोलाकलॉ, राजपुरा, सीमलखेडी, जगदीशपुरा, पदमिया, गुरजेनी, कालारेवा, सोजपुर, डूण्डी गाडरवाडा, सूमर सहित आसपास के क्षेत्र में संतरे के बगीेचे लगे हुए है।
क्षेत्र मे लगे संतरे के बगीचों में इस बार जोरदार फलाव आने से प्रति बीघा 80 हजार से एक लाख रूपये तक ठेके हो रहे है। वहीं बगीचों से तोड़े संतरों के थोक भाव भी 35 से 40 रूपए किलो होने से किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। जगदीशपुरा निवासी किसान ओमप्रकाश नागर ने बताया कि इस उन्होने 4 बीघा संतरे का बगीचा 3 लाख 2 हजार में ठेके पर दिया है। बगीचे में इस बार 50 प्रतिशत से अधिक पौधों पर बंपर फलाव आया है।
डोबड़ा के पूर्व सरपंच जितेन्द्र सिंह राजावत ने बताया कि बार संतरे के प्रति बीघा 80 हजार रूपए से एक लाख रूपए तक ठेके हो रहे है। इस बार मौसम अनुकूल होने से 3 वर्ष बाद उनके बगीचे में बंपर फलाव आया है। इस बार पौधों पर 2 क्विंटल तक संतरे लदे हुए है। ऐसे में प्रति पौधा 7 से हजार रूपए की आय हो रही है। संतरे की फसल के साथ ही किसान खेतों में खरीफ व रबी की फसलों की खेती भी कर रहे है। ऐसे में इस बार किसानों को दोहरा लाभ हुआ है। इन दिनों बगीचों में मजदूर संतरों की तुड़ाई कर ठेकेदार दूसरे प्रदेशों में भेज रहे है।
Published on:
18 Mar 2025 11:44 am
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