
सुनेल कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक झालावाड़।
सुनेल। जिले सहित क्षेत्र भर के राजकीय विद्यालयों में इन दिनों वार्षिकोत्सव का आयोजन संस्थाप्रधान और स्कूल स्टॉफ के लिए जी का जंजाल भी बन गए हैं।
स्थितियां ये है कि शिक्षा विभाग ने हर विद्यालय को वार्षिकोत्सव करवाने का फरमान तो जारी कर दिया है। पर, बजट ऊंट के मुंह में जीरे की कहावत को चरितार्थ कर रहा है। इसमें भी आयोजन विभाग के तय मापदण्डों के अनुसार वृहद स्तर पर करवाए जाने के स्पष्ट निर्देश है। अब संस्थाप्रधान पशोपेश में है कि महंगाई के इस दौर में कम बजट में डीजे संग शामियाना सजाते हुए आयोजन को पूरी गरिमा के साथ कैसे निभाएं।
इतना दिया है बजट
शिक्षा विभाग की ओर से गत कुछ वर्षो से वार्षिकोत्सव को वृहद स्तर पर मनाए जाने के निर्देश जारी हुए हैं। इसमें भामाशाहों, पूर्व विद्यार्थियों, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, विभागीय आला अधिकारियों, स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों, विद्यालय परिक्षेत्र के प्रबुद्वजनों, शिक्षाविदों आदि की मौजूदगी में विद्यालयकी शैक्षिक-सहशैक्षिक प्रतिभाओं को प्रशास्ति पत्र मय प्रतीक चिन्ह्र के साथ सम्मानित किए जाने के निर्देश है। साथ ही अतिथियों, भामाशाहों आदि का स्वागत-सत्कार के साथ ही भामाशाहों, विशेष उपलब्धि प्राप्त करने वाले पूर्व विद्यार्थियों, श्रेष्ठ परिणाम देने वाले शिक्षकों आदि का सम्मान भी करना शामिल है। वहीं, कार्यक्रम को रूचिकर बनाने के लिए रंगारंग कार्यक्रम भी करवाने हैं। वार्षिकोत्सव के पीछे विभाग की मंशा है कि अधिक से अधिक लोग विद्यालय से जुड़े। लेकिन, इस पूरे आयोजन के लिए विभाग ने बजट बहुत ही कम दिया है। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के लिए पांच-पांच हजार उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए बजट दस हजार रूपए का दिया है।
संस्थाप्रधान:असमंजस में है हम भी
विद्यालय में वार्षिकोत्सव के आयोजन करवा चुके संस्थाप्रधानों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि महंगाई के हिसाब से बजट मिलना चाहिए। बाजार में फूल की माला न्यूनतम दस रूपए, पगड़ी 100 से 150 रूपए, उपकरण 20 रूपए में मिलती है। टेंट लगवाने के दरम्यान सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए स्टेज बनाना, अतिथियों के लिए गद़्दीदार कुर्सियां भी लगवानी पड़ती है। अतिथियों को आगमन पर उन्हें अल्पाहार करवाना होता है। बाजार में न्यूनतम 400 रूपए किलो मिठाई, 260 रूपए किलो नमकीन, चिप्स 300 रूपए, चाय पांच रूपए में आती है। वहीं, बात प्रतीक चिन्ह्र की करें,तो कम से कम 50 से 100 रूपए में बनता है। ऐसे में यह आयोजन अच्छा है। पर बहुत खर्चिला है। ऐसे में बहुत अधिक दिक्कत होती है।
नाराजगी भी झेल रहे खूब
वार्षिकोत्सव के इन आयोजनों में अतिथियों को आमंत्रित करने को लेकर भी संस्थाप्रधान खासी नाराजगी झेल रहे है। एक को बुलाए जाने पर दूसरे नाराज हो रहे है। अतिथियों की सूची काफी लम्बी बन रही हैं। इसमें भी कोई छूट जाने पर अगले दिन संस्थाप्रधान और स्टॉफ को फोन पर तरह-तरह की बाते सुननी पड़ रही है।
पूर्व में बजट नहीं मिल रहा है। सरकार ने अब बजट का प्रावधान किया है। संस्थाप्रधान कम बजट के बावजूद बेहतर आयोजन कर विभाग की मंशा अनुरूप आयोजन कर रहे हैं। मामला निदेशक स्तर का है।
हुकमचंद मीणा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, झालावाड़
Published on:
05 Feb 2024 12:25 pm
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