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छापी बांध में मछलियों का अवैध शिकार

--शिकारियों के आगे ठेकेदार की भी दाल नहीं गल रही- छोटी मछलियां भी मर रही

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छापी बांध में मछलियों का अवैध शिकार

झालावाड़/ जिले के दूसरे सबसे बड़े छापी बांध में अवैध मत्स्याखेट धड़ल्ले जारी है। मत्स्य विभाग ने साढ़े 7 लाख रुपए में ठेकेदार को मछलियां मारने का ठेका तो दे दिया, लेकिन अवैध तरीके से मछली मारने वाले इन शिकारियों के आगे ठेकेदार की भी दाल नहीं गल रही। बरसात के समय से ही यहां गांधीसागर, उज्जैन, महाराष्ट्र से मछलियां मारने के लिए टीमें बुलाई, परन्तु बैखोफ शिकारियों के आगे बैबस होकर लौट गई।

बांध में मत्स्य विभाग द्वारा मछली मारने का ठेका देते ही जल भराव क्षेत्र में निगरानी के लिए चौकीदार भी लगाने होते हैं, लेकिन यहां एक भी नहीं लगाया। हर माह मत्स्य विभाग द्वारा गश्त की मॉनिटरिंग भी होनी चाहिए, पर ऐसा नहीं होने से शिकारियों के हौसलें बुलंद हैं। पहले भी अवैध शिकारियों से ठेकेदार को नुकसान होने पर कई ठेकेदारों ने बीच में ठेका छोड़ दिया था।

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अवैध नावों-ट्यूब से शिकार-
छापी बांध की नदी में भालता से लगाकर कोटड़ा विरान, मानपुरा, खेड़ला, पाटन विरान तक दर्जनों अवैध नावें शिकारियों ने डाल रखी हैं। इतना ही नहीं शिकारी ट्यूब का सहारा भी ले रहे हैं। कई बार ठेकेदार के मछुआरों और शिकारियों के बीच विवाद होने पर मारपीट भी होती है।

पानी में करंट के तार-
छापी बांध में मछुआरों ने शिकार के लिए पानी में करंट के तार भी फैला रखे हैं। बांध के एक छौर से दूसरे तक प्रतिबंधित जाल भी फैला रखा है। ठेकेदार के मछुआरे बाबुलाल गुर्जर ने बताया की अवैध जाल कई बार उनकी मोटर बोट के नीचे के पंखे से उलझ जाते हंै।

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बांध में आधे-आधे किमी पर शिकारियों ने जाल लगा रखे हैं। इससे हमारे मछुआरों की मोटर बोट भी जाल में उलझती हंै। यहां निगरानी के लिए कोई चौकीदार भी नहीं है। ऐसे में बैखोफ शिकारियों के आगे डटे रहना बहुत ही टेढ़ी खीर है। आधिकारी ध्यान नहीं देते हैं।
ईरफान, मत्स्य ठेकेदार, छापी बांध

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यह कहना है अधिकारियों का-
बांध में अवैध मछली मारने वालों की अवैध नावें व प्रतिबंधित जाल जब्त करके कारवाई कराएंगे। भालता व घाटोली थाने में ठेकेदार ने नामजद शिकारियों के बारे में अवगत करा रखा है। शिघ्र ही पुलिस कारवाई करेगी।
इशरत तारीक, जिला मत्स्य अधिकारी, झालावाड़