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Chambal River Master Plan….राजस्थान और मध्यप्रदेश मिलकर बनाएंगे चम्बल नदी का मास्टर प्लान

राजस्थान और मध्यप्रदेश में 30 और 50 साल की पानी की जरूरतों का अध्ययन किया जाएगा

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Chambal River Master Plan....राजस्थान और मध्यप्रदेश मिलकर बनाएंगे चम्बल नदी का मास्टर प्लान

Chambal River Master Plan....राजस्थान और मध्यप्रदेश मिलकर बनाएंगे चम्बल नदी का मास्टर प्लान

झालावाड़. चम्बल का मास्टर प्लान तैयार करने की योजना फिर गति पकड़ेगी। राजस्थान और मध्यप्रदेश के लिए वरदायनी चम्बल नदी का मास्टर प्लान तैयार करने के लिए दोनों राज्यों में सहमति बन गई है। इसके लिए एजेन्सी का चयन किया जाएगा। इसका जिम्मा मध्यप्रदेश को मिला है। इसके लिए जल संसाधन विभाग मुरैना के अधीक्षण अभियंता की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है। मास्टर प्लान तैयार करने में व्यय होने वाली राशि दोनों राज्य आधी-आधी वहन करेंगे। यह मामला तीन साल से अटका हुआ था। मध्यप्रदेश-राजस्थान चम्बल जल नियंत्रण मण्डल के सचिव जितेन्द्र लुहाडिय़ा ने बताया कि मध्यप्रदेश-राजस्थान चम्बल जल नियंत्रण मण्डल की तकनीकी कमेटी की बैठक में दोनों राज्यों में चम्बल नदी का मास्टर प्लान बनाने पर मुहर लगा दी है। मुरैना जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता को मास्टर प्लान का जिम्मा दिया गया है। जल्द मास्टर प्लान तैयार किया जाना तय हुआ है।
ऐसा होगा मास्टर प्लान
इसमें आगामी 30 और 50 साल की पानी की जरूरत के आधार पर आकलन किया जाएगा। नदी में कितने पानी की आवक होती है। इसमें सिंचाई, पेयजल, औद्योगिक उपयोग तथा वाष्पीकरण कितना होता है, इसका अध्ययन किया जाएगा। चम्बल नदी के चारों बांधों की भी वाटर स्टडी की जाएगी।

खुशहाली का कारण चंबल

- चम्बल नदी की कुल लंबाई 965 किलोमीटर है। यह राजस्थान में कुल 376 किलोमीटर तक बहती है।
- इस नदी पर गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज बांध बने हैं।

- चम्बल नदी से हाड़ौती की 2.29 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित होती है।
- कोटा बैराज से निकलने वाली दाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता 6656 क्यूसेक है। इससे मध्यप्रदेश में भी सिंचाई होती है।

- दाईं मुख्य नहर पर होने वाली खर्च में राजस्थान की 24.6 प्रतिशत तथा मध्यप्रदेश की 75.4 फीसदी हिस्सेदारी है।

-1500 क्यूसेक पानी बाईं मुख्य नहर की जल प्रवाह क्षमता
- तीन लाख कोटा, बूंदी व बारां के किसान लाभान्वित

- 124 किमी दाईं मुख्य नहर राजस्थान में
- 248 किमी मध्यप्रदेश की सीमाओं में जल प्रवाहित करती है।