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रामलीला : सिर पर खड़ाऊ, अंखियों में पानी, राम भक्त ले चला रे…

रामलीला: राम-भरत मिलाप दृश्य का मंचन देख भावुक हुए लोग
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झालावाड़

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Ranjeet Singh Solanki

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Updated: 23 Oct 2021, 9:30 PM IST

रामलीला : सिर पर खड़ाऊ, अंखियों में पानी, राम भक्त ले चला रे...

रामलीला : सिर पर खड़ाऊ, अंखियों में पानी, राम भक्त ले चला रे...

अकलेरा. सुशांत अकलेरा. क्षेत्र के ग्राम देवली में आदर्श नवयुवक मंडल की ओर से चल रही रामलीला में पांचवें दिन राम-भरत मिलाप का मंचन हुआ। मंचन के दौरान भरत अपने भाई शत्रुघ्न व परिवार व प्रजावासियों को लेकर राम को मनाने के लिए निकल पड़ते हैं। रास्ते में उन्हें निषादराज मिलते हैं, जो उन्हें लेकर चित्रकूट की तरफ निकल पड़ते हैं। चित्रकूट में राम भरत मिलाप होता है। जहां राम अपने खड़ाऊ भरत को देकर अयोध्या को लौट जाने को कहते हैं। सिर पर खड़ाऊ, अंखियों में पानी, राम भक्त ले चला रे राम की निशानी भरत खड़ाऊ को ले जाकर अयोध्या के सिंहासन पर विराजमान कर देते हैं। इधर एक दिन राम लक्ष्मण जानकी चित्रकूट में बैठे थे, तभी इंद्र का पुत्र जयंत माता-सीता की परीक्षा लेने के लिए काग का भेष धारण कर वहां आता है तथा माता सीता के पैर में चोट मार कर चला जाता है। इससे राम क्रोधित हो जाते हैं। राम जयंत को मारने के लिए आतुर हो जाते हैं, जयंत भागा भागा फिरता है। फिर नारदराज उसे फिर से राम की शरण में जाने को कहते हैं और राम उसे दंड स्वरूप उसकी एक आंख फोड़ देते हैं। उसके बाद राम चित्रकूट को छोड़ देते हैं। आगे चलने पर उन्हें अत्रि मुनि व माता अनसूइया मिलती है, जो सीता माता को नारी के बारे में बताती है, कहती कि नारी चार प्रकार की होती है। अति उत्तम, उत्तम, मध्यम और नीच। इसके बाद अत्री मुनि राम से कहते हैं कि यत्र नार्यस्तु पूज्यंते एरमंते तत्र देवता अर्थात् जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवता विचरण करते हंै। जयंत की भूमिका में राहुल किराड़, अनुसुइया की भूमिका में मानसिंह चौधरी, अत्रि मुनि की भूमिका में पवन शर्मा आदि ने मंचन किया।
सरड़ा में 76 वीं रामलीला आज से
अकलेरा. सरड़ा में आदर्श रामलीला कला मंडल एवं जन कल्याण सेवा संस्थान की ओर से 24 अक्टूबर रविवार से स्थानीय कलाकारों की ओर से रामलीला का मंचन शुरु होगा। मंडल अध्यक्ष महावीर प्रसाद गोयल ने बताया कि रामलीला मंच पर 4 नवंबर तक प्रतिदिन रात 8 बजे से स्थानीय कलाकारों की ओर से रामलीला का मंचन किया जाएगा। स्थानीय लोगों की ओर से लोककला और लोक संस्कृति को बचाने के उद्देश्य से रामलीला का मंचन किया जाता हैं।