झालावाड़.जिले में डेंगू,मलेरिया जैसी बीमारियों के साथ अब स्क्रब टाइफस बीमारी का खतरा भी मंडराने लगा है। चिकित्सकों की माने तो हर साल बारिश के मौसम में स्क्रब टाइफस के केसो में बढ़ोतरी होती है।इसमें मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी आना आदि इसके लक्षण है। अगर समय पर इलाज नहीं लिया जाए तो यह बीमारी जानलेवा साबित होती हैं। जिले में भी इन दिनों स्क्रब टाइफस बीमारी के केस बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। झालावाड़ सहित एमपी के कई इलाकों में इस बीमारी के मरीज इन दिनों देखे जा रहे हैं। एसआरजी चिकित्सालय के मेडिसीन विभाग में स्क्रब टाइफस से पीडि़त मरीज की संख्या बढ़ती जा रही है। एक दिन में आधा दर्जन मरीज आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो झालावाड़ शहरी इलाके में तो इस बीमारी का असर ना के बराबर है। अभी तक झालावाड़ शहर से एक ही मरीज सामने आया है, लेकिन बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों से ही मरीज आ रहे हैं।जिले में 16 अगस्त तक 90 मरीज स्क्रब टाइफस के आ चुके हैं। पिस्सू के काटने से हो रही ये बीमारी- फिजिशियन डॉ.पीयूष बैंसला ने बताया कि ये बीमारी पशुओं के शरीर में पाए जाने वाले पिस्सू से फैलने वाली बीमारी है। जो पिस्सू के खून चूसने से होती है। पिस्सू काटने पर लार छोड़ देते है, इससे रिकेट्सिया नाम का वायरस इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाता है। जो खून की प्लेटलेट्स को तेजी से कम करता है और रोगी की हालत बिगड जाती है। बरसात के दौरान घांस, झाडिय़ों और गंदगी वाले क्षेत्र में यह कीट अधिक पाया जाता है।