
स्क्रब टाइफस पसार रहा पैर, 15 दिन में आए 90 मरीज
झालावाड़.जिले में डेंगू,मलेरिया जैसी बीमारियों के साथ अब स्क्रब टाइफस बीमारी का खतरा भी मंडराने लगा है। चिकित्सकों की माने तो हर साल बारिश के मौसम में स्क्रब टाइफस के केसो में बढ़ोतरी होती है।इसमें मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी आना आदि इसके लक्षण है। अगर समय पर इलाज नहीं लिया जाए तो यह बीमारी जानलेवा साबित होती हैं। जिले में भी इन दिनों स्क्रब टाइफस बीमारी के केस बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। झालावाड़ सहित एमपी के कई इलाकों में इस बीमारी के मरीज इन दिनों देखे जा रहे हैं। एसआरजी चिकित्सालय के मेडिसीन विभाग में स्क्रब टाइफस से पीडि़त मरीज की संख्या बढ़ती जा रही है। एक दिन में आधा दर्जन मरीज आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो झालावाड़ शहरी इलाके में तो इस बीमारी का असर ना के बराबर है। अभी तक झालावाड़ शहर से एक ही मरीज सामने आया है, लेकिन बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों से ही मरीज आ रहे हैं।जिले में 16 अगस्त तक 90 मरीज स्क्रब टाइफस के आ चुके हैं। पिस्सू के काटने से हो रही ये बीमारी- फिजिशियन डॉ.पीयूष बैंसला ने बताया कि ये बीमारी पशुओं के शरीर में पाए जाने वाले पिस्सू से फैलने वाली बीमारी है। जो पिस्सू के खून चूसने से होती है। पिस्सू काटने पर लार छोड़ देते है, इससे रिकेट्सिया नाम का वायरस इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाता है। जो खून की प्लेटलेट्स को तेजी से कम करता है और रोगी की हालत बिगड जाती है। बरसात के दौरान घांस, झाडिय़ों और गंदगी वाले क्षेत्र में यह कीट अधिक पाया जाता है।
16 दिन में आए 90 मरीज माह स्क्रब टाइफस मरीजों की संख्या
जनवरी 50
फरवरी 43
मार्च 18
अप्रेल 31
मई 22
जून 29
जुलाई 25
16 अगस्त तक 90
इसलिए फैलती है
बीमारी कीट आमतौर पर झाड़ीदार और नमी वाले इलाकों में पाया जाता है। बरसात के दौरान घांस,झाडयि़ों और गंदगी वाले क्षेत्र में मवेशियों से कीट चिपक जाता है और मवेशियों के संपर्क में आकर घरों पर लोगों को काट लेता है।
मवेशी और जानवरों वाले घरों में कीट का खतरा ज्यादा-
इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों से स्क्रब टाइफस संक्रमित मरीज की संख्या ज्यादा आ रही है। इस बीमारी में रोगी को सांस की परेशानी, पीलिया, उल्टी, जी मिचलाना, जोड़ों में दर्द और तेज बुखार आता है। शरीर पर काले चकत्ते और फफोले भी पड़ जाते हैं। ये झाडियों, पेड़-पौधे के पास रहने वाले लोगों मेें ज्यादा हो रहा है। इसका असर लिवर किडनी और ब्रेन पर भी पड़ता है। इसलिए लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल जाकर चिकित्सक की सलाह लें।
डॉ. रघुनन्दन मीणा, वरिष्ठ फिजीशियन, एसआरजी चिकित्सालय, झालावाड़।
Published on:
23 Aug 2023 10:36 am
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