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मन से कृतज्ञता की भावना रखना ही श्राद्ध

  -गायत्री शक्ति पीठ पर 15 साल साल से हो रहा नि:शुल्क तर्पण

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Shradh is to keep the feeling of gratitude in the heart

मन से कृतज्ञता की भावना रखना ही श्राद्ध



हरिसिंह गुर्जर

झालावाड़.शहर में भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से श्राद्ध पक्ष शुरू हो गए है। लोग अपने पितरों का तर्पण कर आशीर्वाद पाने के लिए प्रसन्न कर रहे हैं। पितृ पक्ष में पितरों की आत्मशांति के लिए झालावाड़ में विभिन्न स्थानों पर यज्ञ व तर्पण सहित अन्य अनुष्ठान किए जा रहे हैं। गायत्री परिवार की ओर से गायत्री शक्ति पीठ में तर्पण सहित अन्य अनुष्ठान नि:शुल्क करवाए जा रहे हैं। ये सिलसिला जिले में पिछले 15 सालों से अनवरत चल रहा है। इस बार 25 सितम्बर को नि:शुल्क तर्पण करवाया जाएगा।

पितृ अमावस्या पर होगा तर्पण-
झालावाड़.बारां उप जोन सह समन्वयक गोपाल लाल शर्मा ने बताया कि हम लोग गायत्री परिवार की ओर से जिले में करीब 15 साल से पितरों का तर्पण करवा रहे हैं। पितृ श्राद्ध का महत्व ये है कि आत्माएं है उनके लिए भौतिक स्वरुप से कुछ नहीं कर पाते हैं ऐसे में जल ही एक ऐसा माध्यम से जिसके माध्यम से आत्मा को शांति दी जाती है। आत्मा के प्रति श्रद्धा बनी रहेए श्राद्ध पक्ष करने से दिवंगत आत्मा की कृपा हमें मिलती है।

पितरों के साथ छह तर्पण होते हैं-
गायत्री शक्ति पीठ के गोपाल लाल शर्मा ने बताया कि पितरों के साथ छह तरह के तर्पण होते हैं। जिसमें देव तर्पणए ऋषि तर्पण, दिव्य मानव तर्पण, दिव्य पितृ तर्पण, यम तर्पणए मनुष्य पितृ तर्पण आदि तर्पण होते है। गायत्री शक्ति पीठ पर एकल तर्पण भी करवाया जाता है।

यज्ञ भी करते है-
शक्ति पीठ पर तर्पण के साथ ही विधि विधान से देव पूजन व यज्ञ भी किया किया जाता है। जिसमें करीब 200 लोग आते हैं। इसमें देव पूजनए रक्षा विधान के बाद तर्पण करवाया जाता है। जो शांति कुंज हरिद्वार की तरह ही करवाया जाता है। पिंड दान आदि करवाये जाते हैं। वहीं 12 कुण्डीय यज्ञ करवाया जाता है।

25 को होगा नि :शुल्क तर्पण-
गायत्री शक्ति पीठ के प्रवक्ता ओम पाठक ने बताया कि शहर में गायत्री मंदिर पर गायत्री शक्ति पीठ की ओर से 25 सितंबर को सुबह 6.30 बजे से तर्पण के बाद हवन करवाया जाएगा। इसमें सभी सामग्री निरूशुल्क दी जाती है। जो पूरे विधि विधान के साथ करवाया जाता है। इसमें पित्तरों के निमित्त यम गायत्री मंत्र की विशेष आहुतियां अर्पित की जा रही हैं। असहाय सहित हर तबके के लोगों के लिए भी निरूशुल्क तर्पण आदि की मदद की जाती है।


श्रद्धापूर्वक करें श्राद्ध-
गोविन्द श्रंगी ने बताया कि श्रद्धा से श्राद्ध शब्द बना है। श्रद्धापूर्वक किए गए कार्य को श्राद्ध कहते हैं। सत् कार्यों के लिएए सत्पुरुषों के लिएए सद्भाव के लिए अंदर की कृतज्ञता की भावना रखना श्राद्ध कहलाता है। उपकारी तत्वों के प्रति आदर प्रकट करना जिन्होंने अपने को किसी प्रकार लाभ पहुंचाया हैए उनके लिए कृतज्ञ होना श्रद्धालु का कर्तव्य है।

सोलह दिनों तक होगी पितरों की मनुहार
इस वर्ष श्राद्ध पक्ष 16 दिनों तक आश्विन कृष्ण अमावस्या पर 25 सितंबर तक रहेगा। 16 दिन तक शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। 12 साल बाद इस बार फिर श्राद्ध पक्ष 16 दिन का रहेगाए जिसे शुभ नहीं माना जा रहा है। हालांकि इस बीच 17 सितंबर को कोई श्राद्ध नहीं होगा। इससे पहले साल 2011 में 16 दिन का श्राद्ध पक्ष रहा है। पंडितों ने बताया कि इस बार 16 दिन का श्राद्ध पक्ष रहेगा। श्राद्ध पक्ष बढऩा जनता के लिए शुभ नहीं होता हैए अशांति का माहौल रहता है।