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खामोश शहर, सूनी सड़कें.. फिर भी मैं खुश हूं…

-झालावाड़ स्थापना दिवस आज... -182 वर्ष का हुआ झालावाड़: ऐसा सन्नाटा कभी नहीं देखा

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Silent city, lonely roads .. Still I am happy

खामोश शहर, सूनी सड़कें.. फिर भी मैं खुश हूं...

- झालावाड़ की जुबानी...

हरिसिंह गुर्जर
झालावाड़... मैं झालावाड ! आज 182 बरस का हो गया। अपने जन्म से अब तक मैंने मुगल साम्राज्य, ब्रिटिश शासन, स्वतंत्रता आंदोलन, आजादी और इसके बाद लोकतंत्र देखा। हर्ष से भरे पर्व देखे, तो रियासती संघर्ष भी देखे। चन्द्रभागा कार्तिक व गौमती सागर पशु मेलों का कोलाहल, तो पीड़ा से भरा 56 का अकाल भी देखा। लहलहाती फसलें, तो उजड़ते चमन देखे। प्रेम, भाईचारा व सौहार्द के साथ अनगिनत हड़ताल, बंद व महामारी का दंश भी देखा-झेला। लेकिन, सुख-दु:ख की किसी भी घड़ी में मुझे सूनापन कभी नहीं भाया। गली-कूचों में उधम मचाते बच्चों का कलरव, यार दोस्तों की गपशप, मेल जोल भरी हंसी-ठिठोली व सड़कों की चहलकदमी मेरी अनादि आदत रही...।
पर इतिहास में पहली बार मुझे शहर का ऐसा सन्नाटा अच्छा लग रहा है। क्योंकि इस खामोशी के पीछे लोगों में मेरी खुशी की चिंता छिपी है। वह मुझे आबाद व खुशहाल देखना चाहते हैं।
उन्हें पता है कि संवत 1972 की महामारी में हजारों बिलखते-तड़पते-मरते अपनों का वो खौफनाक मंजर मेरी आंखों से अब तक ओझल नहीं हुआ है। मुझे छलनी कर दफनाए गए मेरे अपनों के ही शवों के घाव व मेरे सीने में अब भी रहे हैं। मुझे गर्व है कि मेरे अपने घर में रहकर सभ्य व समझदार नागरिक होने का कर्तव्य और जरुरतमंदों की मदद कर मानव धर्म को भी दिखा-निभा रहे हैं... मुझे नाज कोरोना मरीजों के उपचार में जुटे मेरे चिकित्सक, सड़कों पर सेवा दे रहे पुलिस जवान, स्वच्छता में जुटे सफाईकर्मी सपूतों पर भी है, जो संकट की इस घड़ी में अपनी सेवा के संकल्प से नहीं डिगे है। मुझे यकीन है कि प्रकोप के पीछे प्रकृति की छिपी मानवता की पुकार सुनते हुए...आप आगे भी अपने संवैधानिक कर्म के साथ मानव धर्म निभाते रहेंगे। ताकि मेरे अगले जन्म दिवस-झालावाड़ दिवस को हम उल्लास व उमंग से मना सके...यही मेरे इस जन्म दिवस का उपहार भी होगा....आपका साथी झालावाड़।

इतिहास के पन्नों से ....
-झालावाड़ नगर की स्थापना, 1791 में कोटा के दिवान झाला झालिमसिंह ने की थी।
- झालावाड़ राज्य की स्थापना 1838 में राजा मदनसिंह ने की थी, राजधानी -झालरापाटन को बनाया था।
- झालावाड़ अर्थात- झालाओं से रक्षित प्रदेश
- 1899 से 1929 तक झालावाड़ के शासक भवानीसिंह हुए उनके पुत्र राजेन्द्रसिंह सुधाकर ने 1943 तक शासन किया।
- राज्य के अंतिम शासक हरिश्चन्द्र 1943 से 1948 तक रहे, छोटी सी रियासत होने के बावजूद प्रजा हितैषी नीतियों के कारण इन्हें जिलेवासी हमेशा याद करते रहेंगे।
- उपनाम - ब्रज नगर,उम्मेदपुरा छावनी

क्षेत्रफल- 6219 वर्ग कि.मी.
जनसंख्या -14,11,129 जनसंख्या 2011 के अनुसार
-जनसंख्या घनत्व-227 प्रतिवर्ग किमी
साक्षरता- 61.50 प्रतिशत
पुरूष साक्षरता-75.75 प्रतिशत
महिला साक्षरता- 46.53 प्रतिशत
महिलाएं प्रति हजार पुरुष - 946
उपखंड- 8
तहसील- 12, नगर परिषद-1, नगर पालिका-4
पंचायत समिति- 8
ग्राम पंचायत -252

क्या कहते है इतिहासकार...
1. अंगेजों के जमाने में बनी हमारी छोटी सी झालावाड़ रियासत ने अपने प्रजा वत्सल और होनहार शासकों के नेतृत्व में बड़ी-बड़ी मुश्किलों को आसानी से पार किया, फिर वह संवत 1956 सन1899 का छप्पनियां अकाल हो या 1942 का अन्न संकट। मुुझे विश्वास है कि हम अपनी समझदारी और संयम से इस कोरोना महामारी से अभी तक सुरक्षित है और आगे भी आसानी से पार पा लेंगे, अगले वर्ष हम उल्लास के साथ झालावाड़ स्थापना दिवस मनाएंगे।
डॉ. सज्जन पोसवाल, विभागाध्यक्ष, इतिहास राजकीय स्नाताकोत्तर, महाविद्यालय,झालावाड़।

2.1838 ईसवी में अपनी स्थापना से लेकर अब तक झालावाड़ राज्य के सामाजिक इतिहास में जन स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। यहां के शासक चिकित्सा एवं महामारियों की रोकथाम के प्रति सदैव सतर्क रहे हैं। इस बार झालावाड़ स्थापना दिवस नहीं मनाया जा रहा है,लेकिन इस कोरोना रूपी वैश्विक महामारी पर जिले की जनता जीत हांसिल करेगी।
डॉ. प्रवणदेव, एसोसिएट प्रोफेसर, इतिहास विभाग, पीजी कॉलेज, झालावाड़।
3.झालावाड़ राज्य की स्थापना 8 अपे्रेल 1838 को हुई थी, लेकिन अभी संकट का समय है। परिरिस्थतियां ऐसी बनी है कि महामारी के चलते झालावाड़ अपना स्थापना दिवस नहीं मना पा रहा है,फिर भी झालावाड़ का इतिहास गौरवशाली रहा है। सभी लोगों से अपील है कि घरों में रहकर ही सोशल डिस्टेंस में स्थापना दिवस मनाए, ताकि अगले वर्ष हम हर्ष और उल्लास के साथ झालावाड़ का जन्म दिन मनाए। सभी लॉकडाउन का पालन करें।
राज्यपाल शर्मा, इंटेक जिला संयोजक,झालावाड़।

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