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सरकार की स्मृति से गायब हो गया स्मृति वन

. कभी महकती थी तुलसी, गुलाब और औषधीय पौधों की खुशबू. बजट के अभाव में स्मृति वन उजाड़
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झालावाड़

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Ranjeet Singh Solanki

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Updated: 22 Nov 2021, 6:45 PM IST

सरकार की स्मृति से गायब हो गया स्मृति वन

सरकार की स्मृति से गायब हो गया स्मृति वन

झालरापाटन. नव लखा किले की पहाड़ी स्थित स्मृति वन में पहले तुलसी के सैंकड़ों पौधों के साथी कई औषधीय पौधे लोगों को लुभाते थे और यहां आने वाले लोग खुशबू से आनंदित हो जाते थे, लेकिन आज उद्यान राज्य सरकार की अनदेखी से उजाड़ पड़ा है। हालात यह है कि स्मृति वन में हरे भरे पेड़-पौधों की जगह जंगली गाजर घास का बोलबाला है। जबकि यहां आकर आए दिन राजनेता और अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। बावजूद इसके स्मृति वन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां न तो हरियाली बची है और नहीं हरे भरे पेड़-पौधे। पूर्व सरकार के समय करोड़ों रुपए की लागत से बनाया स्मृति वन बजट के अभाव में उजाड़ होता जा रहा है, इससे लोगों को इसका लाभ मिलने के बजाय अब यह आंखों को चुभने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में नवलखा किले की पहाड़ी को पूरे वर्ष हरा भरा रखने और सौन्दर्यीकरण के तहत आमजन के लिए वन विभाग के माध्यम से 60 हैक्टेयर क्षेत्रफल में 1 करोड़ 22 लाख रुपए की लागत से स्मृति वन विकसित किया था।
झूलते तारों से लगती आग
विभागीय जानकार सूत्रों ने बताया कि स्मृति वन के रखरखाव के लिए सालाना 5 लाख रुपए के बजट की जरूरत है। स्मृति वन के ऊपर होकर निकल रही बिजली की लाइन के तार झूल रहे हैं, पूर्व में भी यहां पर कई बार इन तारों के आपस में टकराने से हुई इस स्पार्किंग से आग लगने की घटनाएं हो चुकी है। इन तारों को सही करने के लिए वन विभाग ने कई बार विद्युत निगम को पत्र भी भेजा है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है और हर वर्ष यही समस्या गर्मी का मौसम आते ही शुरू हो जाती है और यहां पर विकराल आग लगने से आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों को दहशत में आना पड़ता है।
वीरान नजर आ रहा
इसमें बरगद, पीपल, नीम, गूलर, अशोक, आंवला, जामुन, कदम, शहतूत, मौलसिरी, तेंदू, चरेल, बैर, करौंदा, बेल, गुलाब, तुलसी के पौधे लगाए थे। यहां पर हरियाली के साथ ही स्मृति वन को देखने के लिए आने वालों की सुविधा के लिए भ्रमण पथ, सोलर लाइट, जल मंदिर, लघु पथ, शौचालय, मूत्रालय बनाए थे। जगह-जगह हवा खोरी के लिए आने वालों के लिए बेंचे लगाई थी, लेकिन वर्तमान सरकार के पिछले 3 वर्ष से इसके रखरखाव के लिए कोई बजट नहीं दिए जाने से यह वन हरा-भरा दिखने के बजाय उजाड़ और वीरान नजर आने लगा है। हरियाली और पेड़-पौधों की जगह घांस फूस, झाड़ झंकार, पंच बत्ती की बेले, कटीली झाडिय़ां नजर आ रही हंै। बजट नहीं दिए जाने से यहां पर मजदूर लगा कर इसकी साफ-सफाई भी नहीं कराई जा रही है इसके साथ ही एक भी चौकीदार इस की रखवाली के लिए नहीं है, इससे परिसर में जंगली जीवों और जानवरों का बोलबाला होने लगा है। सभी पांथवे पर झाड़-झंकार उजाले से घूमने के लिए आने-जाने वालों को अब रास्ता भी दिखाई नहीं देता है और जंगली जीवों का भी खतरा बना रहता है। इसी कारण यहां पर हवा खोरी के लिए आने वालों की संख्या में कमी आने लगी है।