
छात्रों ने बनाया मिनी ड्रोन-लाईफाई
एक्सक्लूसिव
हरिसिंह गुर्जर
जिले के राजकीय आद्यौगिक प्रशिक्षण संस्थान के विद्यार्थियों ने कमाल कर दिखाया है। करीब डेढ़ साल बाद संस्थान के विद्यार्थियों को मिनी ड्रोन व लाईफाई बनाने में सफलता मिली है। जिला मुख्यालय पर आईटीआई के विद्यार्थियों को नए साल में दो प्रोजेक्ट बनाने में सफलता मिली है। छात्रों द्वारा मिनी ड्रोन व लाईफाई बनाने की दिशा में किया जा रहा प्रयोग सफल होता नजर आ रहा है। विद्यार्थियों ने नए साल के पहले दिन मिनी ड्रोन को उड़ाकर देखा है, वहीं दूसरे प्रोजेक्ट लाईफाई से भी वाइस डेटा को ट्रांसफर करने में सफलता मिली है। दोनों प्रोजेक्ट इलेक्ट्रॉनिक एवं मैकेनिक ट्रेड के विद्यार्थियों ने बनाए है।
अभी छोटा बनाया, अब बड़े पर फोकस-
आईटीआई के छात्र निकेश कुमार प्रजापत ने बताया कि अभी हमने मिनी ड्रोन बनाया है। अब हमारा अगला मकसद बड़ा ड्रोन बनाने का है। मिनी ड्रोन को बनाने में करीब 5 हजार रुपए का खर्चा आया है। पंखुडियां व मोटर बाजार से खरीदी है। बॉडी व अन्य सामान संस्थान की कार्यशाला में ही तैयार किए है। अभी ये ज्यादा दूर नहीं जा सकता है, लेकिन हमने मिनी ड्रोन बनाकर देख लिया है, अब हमारा प्रयोग सफल रहा, अब बड़ा बनाने की दिशा में काम करेंगे। इसकी हर क्षेत्र में डिमंाड बढ़ती जा रही है। कोविड के समय दवाई व कोई भी सामान इधर से उधर पहुंचाने में भी इसे काम में लिया जा सकता है।
हर जगह होने लगा है ड्रोन का उपयोग-
छात्र निकेश कुमार, अतुल राहुल ने बताया कि आजकल हर जगह ड्रोन काम में लिया जा रहा है। जिसमें एयर फोर्स में बढ़ी क्षमता के ड्रोन की मदद से हथियार ले जाने और दुश्मन पर नजर रखने के लिए भी ये उपयोगी है। शादी विवाह में भी आजकल ड्रोन से फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी होने लगी है।
खेती में भी उपयोगिता-
छात्र लोकेश गौतम व निलेश ने बताया कि खेती में कीटनाशक दवा व तरल यूरिया के छिड़काव के समय किसानों के लिए ड्रोन उपयोगी साबित हो रहा है। भारत सरकार ने भी कृषि के क्षेत्र में ड्रोन का प्रयोग बढ़ाने की योजना की घोषणा की थी। हमारा प्रयास है कि किसानों को सस्ते दाम पर ड्रोन उपलब्ध हो। इससे किसान परिवार से आइटीआइ करने वाले छात्रों को अपने खेतों में कीटनाशक दवा का छिड़काव करने में मदद मिलेगी।
लाईफाई से वॉइस डाटा भेजना हुआ आसान-
छात्र निलेश कुमार पाटीदार ने बताया कि सीएफसीएल द्वारा अनुरक्षित संस्थान की इलेक्ट्रॉनिक एवं मैकेनिक ट्रेड के विद्यार्थियों ने अनुदेशक रितेश सुमन की मदद से एक डिवाइस बनाया है, जिससे वाइस डाटा को लाईफाई (लाइट फिडिलिटी डिटेक्ट) के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेज पाना संभव हुआ है। ये लाइट से चलता है इसमें ट्रांसमीटर सेक्शन, रिसीवर सेक्शन व पावर एम्लीफायर सेक्शन होते हैं। ये तीनों मिलकर वाइस डेटा को ट्रांसफर करने में मदद करते हैं। अभी हमारा प्रयोग वाइस डेटा का है धीरे-धीरे वीडियो व फोटो के डाटा को भी भेजने के लिए काम करेंगे। इसमें सौलर पैनल,9 वॉट की बेट्री, एक स्पीकर व एलईडी बल्ब काम में लिया गया है। इसे बनाने में मात्र 600 रुपए का खर्चा आया है। इसे राहुल महावर, अंकुश पाटीदार, निलेश तीनों ने मिलकर बनाया है।
हर जगह ड्रोन का उपयोग-
हमारे इलेक्ट्रॉनिक व मेकेनिक ब्रांच के विद्यार्थियों ने अभी मिनी ड्रोन बनाया है, इस फिल्ड में केरियर की अच्छी संभावना है, अभी हर जगह ड्रोन का उपयोग होने लगा है। इसी टे्रड के विद्यार्थियों ने लाईफाई भी बनाया है, जिससे वाइस डाटा ट्रांसफर किया जा सकता है।
पीसी गुप्ता, उप निदेशक, सीएफसीएल द्वारा अनुरक्षित राजकीय आईटीआई,झालावाड़।
Published on:
02 Jan 2024 11:44 am
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