झालावाड़. मेडिकल कॉलेज में इन दिनों मरीजों की लंबी-लंबी कतारे देखी जा रही है। मरीज सर्जरी विभाग में पहुंच भी रहे है, लेकिन उन्हे इलाज नहीं मिली रहा है। इसका कारण है सर्जरी विभाग इन दिनों लकवाग्रस्त है। मरीजों का समय पर ऑपरेशन सहित पेटदर्द आदि का इलाज भी मुहैया नहीं हो पा रहा है।बावजूद इसके राज्य सरकार का इधर कोई ध्यान नहीं है। मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग में पांच यूनिट संचालित है। लेकिन पांचों की हालात बहुत ही नाजक बनी हुई है। संसाधानों के अभाव में मरीज परेशान हो रहे हैं। यहां पीजी की मान्यता भी नहीं मिल पा रही है। कई यूनिट तो सिर्फ यूनिट प्रभारियों के भरोसे ही चल रही है। एक साल पहले यहां एक माह में करीब 200 तक ऑपरेशन होते थे, जो अब घटकर मात्र 50-60 रह गए है।
बरसों पुराना कॉलेज फिर भी नहीं मिल रहे डॉक्टर-
चिकित्सा सूत्रों ने बताया कि झालावाड़ मेडिकल कॉलेज बरसों पुराना है। फिर भी यहां चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं की जा रही है। ऐसे में एक ही डॉक्टर को इमरजेंसी कॉल, ओपीडी, बोर्ड ड््यूटी सहित कई काम करने पड़ रहे है। ऐसे में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। राज्य सरकार ने हाल में नए खोले पाली सहित अन्य मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर लगा दिए है, लेकिन झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर नहीं लगाने से मरीज व डॉक्टर दोनों परेशान हो रहे हैं।
सर्जरी में पीजी नहीं होने से ज्यादा आ रही परेशानी-
मेडिकल कॉलेज झालावाड़ में सर्जरी विभाग में पीजी नहीं खुलने से यहां एसआर व जेआर भी नहीं मिल पा रहे हैं। यहां लगे जेआर का एक साल का कार्यकाल पूरा होनेसे वो भी चले गए है। ऐसे में कई यूनिट में तो यूनिट प्रभारी के अलावा मरीजों को देखने वाला कोई नहीं है। ऐसे में चिकित्सकों को कई दिनों से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।चिकित्सकों ने बताया कि कई लंबे समय से परेशान हो रहे हैंसप्ताह में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो सर्जरी विभाग के सभी डॉक्टर सामूहिक त्यागपत्र देंगे।
5 यूनिट, 7 सर्जन-
मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में 5 यूनिट है, लेकिन उनमें 8 सर्जन में से एक सर्जन तो एसआरजी चिकित्सालय के अधीक्षक है। ऐसे में 7 ही सर्जन है। ऐसे में कई यूनिट आए दिन खाली ही रहती है।जहां मरीजों को घंटों सफर करना पड़ताहै।कई मरीज तो लंबी लाइन देखकर बिना दिखाएं ही निजी की ओर रुख कर लेता है। ऐसे में गरीब तबके लोगों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
ये हाल है पांचों यूनिट के
यूनिट एक- प्रभारी डॉ.संजय पोरवाल, अधीक्षक का भी चार्ज है, इस यूनिट में दो सर्जन व एक रेजिडेंट है
यूनिट दो- इस यूनिट के प्रभारी डॉ. अशोक शर्मा है, एक सर्जन व एक रेजिडेंट है
यूनिट तीन- प्रभारी डॉ.बीसी मेवाड़ा, एक रेजिडेंट है
यूनिट चार- प्रभारी डॉ.सीएम व्यास है, 2 रेजिडेंट है।
यूनिट पांच- प्रभारी डॉ.हुकम मीणा,अन्य कोई डॉक्टर व रेजिडेंट नहीं है।
ये है नियम-
हर यूनिट में एक प्रोफेसर, एक सहायक आचार्य, एक एसआर का होना जरुरी है। लेकिन यहां ऐसा नहीं है। कई विभागों में 50 फीसदी फैकल्टी नहीं है। ऐसे में 200 सीटों की मान्यता खतरे में हैं।
एक ही व्यक्ति को कई जिम्मेदारी-
हमेंं मरीजों का इलाज करने में बहुत परेशानी आ रही है। जेएमसीटीए के सभी पदाधिकारी एक बार जयपुर जाकर चिकित्सा मंत्री से मिलेंगे। फिर भी कोई सुनवाई नहीं होती है तो आगे का निर्णय लेंगे। शुक्रवार को सर्जरी विभाग में मैं अकेला था, ऐसे में ओपीडी व वार्ड में मरीजों को देखना,बोर्ड में ड्यूटी, पोस्टमार्टम में ड्यूटी, रात के समय ऑन कॉल ड्यूटी सहित अन्य कार्य में बहुत ज्यादा परेशानी आ रही है। सभी डॉक्टर खासे परेशान है।
डॉ.हुकमचन्द मीणा, प्रभारी यूनिट पांच, मेडिकल कॉलेज झालावाड़।
फैकल्टी की कमी है-
हां ये सही है कि यहां 50 फीसदी फैकल्टी ही है। इस बारे में जयपुर बात की है। राजमेस में साक्षात्कार चल रहे हैं, अप्रेल तक यहां भी डॉक्टरों की नियुक्ति होने की उम्मीद है।कमी के बारे में हर माह ही लिखते हैं।
डॉ.शिवभगवान, डीन मेडिकल कॉलेज,झालावाड़ ।