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भगवान की संपत्ति के मालिक नहीं बन सकेंगे किरायेदार

-किरायेदार नहीं कर सकेंगे सबलेट, किराया बढ़ेगा - नई नीति लागू करने पर जोर
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झालावाड़

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Hari Singh Gujar

•

Updated: 22 Dec 2020, 8:28 PM IST

Tenants will not be able to own God's property

भगवान की संपत्ति के मालिक नहीं बन सकेंगे किरायेदार

मंडे मेगा स्टोरी
हरि सिंह गुर्जर @ पत्रिका

झालावाड़.भगवान की सम्पतियों पर किरायादार बन बैठकर मनमर्जी करने वालों पर अब बड़ी सख्ती बरती जाएगी।
नाममात्र की किराया वसूली दर भी अब बदल जाएगी और किराएदारों की ओर से संपदा को सबलेट करने पर भी पूर्ण रोक लगाई जाएगी। ऐसे में झालावाड़ जिले में आधा दर्जन मंदिरों की दुकानों पर भी अब किराया दर बढ़ जाएगी।
प्रदेश में देवस्थान विभाग की संपत्तियों को किराया देने के लिए बनाई नई किराया नीति पर जल्द मुहर लग जाएगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नई किराया नीति का ड्रॉफ्ट तैयार कर सरकार को भेज दिया गया है, और राज्य सरकार से हरी झंडी मिलते ही देवस्थान विभाग होईकोर्ट में इसे पेश कर प्रदेश में लागू करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

जिले में इन मंदिरों के अधीन है इतनी है दुकानें-
1.मंदिर गोवर्धन नाथ (रूपाबाईजी),झालावाड़- 6 दुकाने, किराया 600 से 16 हजार तक प्रतिमाह

2.मंदिर जैसलमेरी जी मंगलपुरा - एक भंडार 291 रुपए प्रतिमाह
3.मंदिर भुराबाई सा धानमंडी झालावाड़- एक दुकान 404 रुपए प्रतिमाह

4.मंदिर मेडतनी जी पुरानी कोतवाली के पास- कोई दुकान नहीं

5.मंदिर बालाजी खेजड़ी,मूर्ति चौराहा- 7 दुकाने, 650 से 3000 रुपए प्रतिमाह

6.मंदिर द्वारकाधीश झालरापाटन 4 दुकानें, झालावाड़ में सत्यनारायण मंदिर के पास 1076 से 1200 रुपए तक

7.सूर्य मंदिर 14 दुकानें, 600 से 3000 रुपए प्रतिमाह

8.श्रीराम मंदिर सुनेल- एक हजार से 2100 रुपए किराया प्रतिमाह

नई किराया नीति में यह खास होगा-
- सबलेटपर प्रतिबंध होगा।
- किराया दुगुना से तीन गुणा तक होगा।
- नियम-शर्तों में बदलाव होगा।
- सरकारी संपत्ति सरकार की रहेगी, इसके लिए सख्त प्रावधान।

पुरानी किराया नीति से विभाग को हो रहा नुकसान
- पुरानी नीति में कई खामियां है, जिससे देवस्थान को कई जगह नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- किराया बहुत कम होने से राजस्व भी कम मिल रहा है, न्यूनतम 500 से 10 हजार रूपए तक किराया।
- किराएदार ही अपने स्तर पर संपदा को सबलेट कर देते थे।
- किराएदार वर्षों से जमा रहते और मालिक बनकर बैठ जाते हैं।

नई नीति से अच्छी आय होगी-
झालावाड़ सहित प्रदेश व इसके बाहर देवस्थान विभाग के मंदिरों के अधीन दुकानों, आवासीय, व्यावसायिक परिसर किराए पर दिए हुए है। झालावाड़ जिले में करीब 12 लाख रुपए प्रतिवर्ष दुकानों से आय होती है। वहीं प्रदेश की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2018 -19 में 3.95 करोड़, वर्ष 2019-20 में जनवरी, 2020 तक 3.95 करोड़ रुपए की आय हुई। इसके अलावा करीब 150 से ज्यादा संपत्तियों पर अवैध कब्जे है, जिन पर विधिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई चल रही है।

लागू करेंगे-
मंदिरों की दुकानों के लिए नई किराया नीति का ड्राफ्ट विभाग द्वारा सरकार के पास भेजा गया है।सरकार के स्तर पर लागू करने के बाद झालावाड़ में भी लागू किया जाएगा। जिले में आठ मंदिरों के अधीन दुकानों है। जिनसे प्रतिमाह करीब एक लाख रूपए किराया आता है।
विक्रमसिंह राजावत,प्रबन्धक,देवस्थान विभाग, झालावाड़।