Kalisindh Bridge....किसानों की जमीन पर सियासत का पुल

राज्य सरकार ने कालीसिंध नदी पर उच्च स्तरीय पुल और एप्रोच रोड बनाने के लिए पांच साल पहले किसानों जमीन ली थी। जमीन पर पुल तैयार हो गया और सरपट वाहन दौड़ रहे हैं, लेकिन किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। किसान अपनी ही जमीन के लिए मुआवजे के लिए शासन और प्रशासन के चक्कर लगाने को विवश है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

By: Ranjeet singh solanki

Published: 31 Jul 2021, 05:09 PM IST

झालावाड़. राज्य सरकार ने कालीसिंध नदी पर उच्च स्तरीय पुल और एप्रोच रोड बनाने के लिए पांच साल पहले किसानों जमीन ली थी। जमीन पर पुल तैयार हो गया और सरपट वाहन दौड़ रहे हैं, लेकिन किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। किसान अपनी ही जमीन के लिए मुआवजे के लिए शासन और प्रशासन के चक्कर लगाने को विवश है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। हर बार आश्वासन देकर टरका देते हैं। किसानों के मुआवजे का हक लालफीताशाही की फाइलों में दब गया है। राज्य सरकार ने 2016-17 में कालीसिंध नदी पर उच्च स्तर का पुल बनाने तथा एप्रोच रोड बनाने के लिए मुंडरी गांव और रायपुर की तरफ भूमाड़ा के किसानों की जमीन अवाप्त की थी। जमीन अवाप्ति के वक्त भूमि अवाप्ति अधिकारी ने किसानों को जमीन का तत्काल मुआवजा देने का आश्वासन दिया था। किसानों ने अधिकारियों पर भरोसा जताते हुए पुल और रोड के लिए अपनी जमीन दे दी थी, लेकिन अब उसकी जमीन के मुआवजे के लिए चक्कर को विवश है। स्थिति है कि किसानों के हाथ से जमीन भी गई और मुआवजा भी नहीं मिला है। मुआवजे में देरी का कारण अधिकारी बजट की कमी बता रहे हैं। जबकि नियमों के तहत किसानों को तय सीमा में ही जमीन का मुआवजा देने का प्रावधान हैं। पुलिया निर्माण की एजेन्सी पीडब्ल्यूडी था। दोनों पुलिया के लिए अवाप्त की गई जमीन का मुआवजा करीब 3.71 करोड़ रुपए है। इसमें 2.67 करोड़ का मुआवजा मुंडरी पुलिया के लिए अवाप्त की गई जमीन का है तथा शेष मुआवजा भूमाड़ा पुलिया के लिए अवाप्त की गई जमीन है। किसानों को अभी तक जमीन का फूटी कौड़ी भी मुआवजा नहीं मिला है।किसानों ने कहा कि जमीन 2017 में अवाप्त की गई थी। केन्द्रीय भूमि अवाप्ति के नए नियमों के तहत डीएलसी का छह गुणा मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन उनका तो पुरानी दर से ही मुआवजा स्वीकृत किया गया था, लेकिन वभी भी अटका रखा है। किसान मोतीलाल, बाबूलाल, पन्नालाल, रामलाल आदि का कहना है कि सरकार ने जमीन भी ले ली है, लेकिन अभी तक मुआवजा नहीं दिया है। साहूकारों से ब्याज पर रुपए लेकर काम चलाना पड़ रहा है। इस कारण कर्ज का भार बढ़ गया है। जनप्रतिनिधियों ने भी भरोसा तोड़ाकिसानों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने भी साथ नहीं दिया है, उनका भरोसा तोड़ दिया है। किसानों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अलावा, जिला कलक्टर तथा प्रभारी मंत्री को भी ज्ञापन देकर मुआवजा दिलाने का आग्रह कर चुके हैं, लेकिन किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। पन्नालाल मेरोठा की पीडि़ता है कि मुआवजे के लिए पांच साल से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जमीन का शीघ्र मुआवजा मिलना चाहिए। बाबूलाल मेरोठा का कहना है कि मुआवजा नहीं मिलने से कर्ज लेकर काम चलाना पड़ रहा है। सरकार को शीघ्र मुआवजा देना चाहिए। गोपाल लाल का कहना है कि जिला कलक्टर और प्रभारी मंत्री को भी मुआवजा दिलाने के लिए कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मुआवजा नहीं दिया गया तो आत्मधाती कदम उठाने को विवश होना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन आरके सोनी के अनुसार मुंडेरी और भूमाड़ा के किसानों की अवाप्त जमीन का करीब 3.71 करोड़ का मुआवजा स्वीकृत हो चुका है। बजट आते ही संबंधित किसानों को एसडीएम के माध्यम से मुआवजा दिला दिया जाएगा। दो दिन पहले ही उच्चाधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराया गया है।

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