
परम्परागत कुश्ती के लिए नई पीढ़ी को तैयार करने का जज्बा
परम्परागत कुश्ती के लिए नई पीढ़ी को तैयार करने का जज्बा
-दो दशक से बंद व्यायामशाला को शुरु कर निशुल्क तैयार किए जा रहे पहलवान
-मिट्टी से भावनात्मक रिश्ता बनाने का प्रयास
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. मिट्टी के अखाड़े में परम्परागत कुश्ती के लिए शहर में करीब दो दशक से बंद पड़ी व्यायामशाला को शुरु कर निशुल्क पहलवान तैयार करने का बीड़ा उठाया है अखिल भारतीय मिक्स मार्शल फ्री स्टाईल गोल्ड मेडल विजेता जिले के युवक देवराज गुर्जर ने। वर्तमान में विदेशो में मेट पर कुश्ती हो रही है वहीं पहले हमारे यहां परम्परागत तरीके से मिट्टी के अखाड़े में कुश्ती होती थी इससे पहलवानों में अपनी मातृभूमि व मिट्टी से भावनात्मक रिश्ता बनता था। नई पीढ़ी में शारीरिक, मानसिक, बौद्विक विकास व भावनात्मक रुप से मिट्टी से जुड़ाव के उद्देश्य को लेकर एक युवा पहलवान से यह पुनित पहल की है।
-गोल्ड मेडलिस्ट है देवराज
झालावाड़ के निकट गंाव गुवाड़ी निवासी करीब बीस वर्षीय देवराज गुर्जर ने 27 जून 2017 को पंजाब के सोनीपत में आयोजित ऑल इण्डिया बॉक्सिंग प्रतियोगिता में 75 किलोभार वर्ग में उपविजेता का खिताब जीता था। इस दौरान उन्होने करीब ढाई दर्जन पहलवानों के बीच पांच फाईटिंग की। इसके बाद उत्तर प्रदेश के नोयडा में अगस्त 2018 में आयोजित मिक्स मार्शल आर्ट फ्री स्टाईल में उत्तर प्रदेश के पहलवान गौरव गौरवंशी को पराजित कर पूरे राष्ट्र में विजेता बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहले उन्होने जिला स्तरीय व उसके बाद राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी गोल्ड मेडल जीते।
-कुश्ती के अखाड़े का अभाव बनी कसक
देवराज के मन में जिले में कुश्ती के लिए मिट्टी के अखाड़े का अभाव कसक बना हुआ था इसी बीच उसने पता चलने पर झालावाड़ में बंद पड़ी श्री वीर हनुमान व्यायामशाला में निशुल्क अखाड़ा शुरु किया। यहां वह प्रतिदिन शाम को 5.30 बजे से रात करीब 8 बजे तक करीब 5 साल से करीब 25 साल आयु वर्ग तक के करीब तीन दर्जन बच्चें, किशोर व युवाओं को अखाड़े के गुर, दांव पेज आदि सिखाते है। यहां करीब पांच साल के कान्हा व करीब 25 साल के सन्नी चौधरी नियमित पहलवानी सीखने आते है।
-खुद तैयार करते है अखाड़ा
व्यायामशाला में देवराज की अगुवाई में पहलवानों से स्वयं मिट्टी खोदकर अखाड़ा तैयार किया व मिट्टी में दूध, छाछ, हल्दी, सरसो का तेल,गेरु आदि का मिश्रण डाला। इससे पहलवानों के शरीर पर ज्यादा चोट नही लगती है व जल्दी ठीक हो जाती है।
-सबसे पहले होती है प्रार्थना
अखाड़े में सबसे पहले प्रार्थना होती है इसके बाद योगा व व्यायाम किया जाता है। बाद में अखाड़े में कुश्ती का अभ्यास किया जाता है। इससे नई पीढ़ी में शारीरिक, मानसिक व बौद्विक विकास होता है। अखाड़े में उम्र व वजन के हिसाब से जोड़े बनाए जाते है व कुश्ती का अभ्यास कराया जाता है। देवराज का लक्ष्य है कि वह जिले से राज्य स्तर व राष्ट्र स्तर तक पहलवान पहुंंचाए व विजेता बना कर जिले का नाम रोशन करे।
Published on:
08 Jun 2019 11:15 am
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