6 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आज से 13 अप्रेल तक मलमास लगने से शुभ कार्यो पर लगा विराम

अब 14 अप्रेल से शुभ कार्यो के लिए मुहूर्त शुरू होंगा

3 min read
Google source verification
There is a pause on auspicious works due to Malmas from today till 13th April.

सुनेल आज से 13 अप्रेल तक मलमास लगने से शुभ कार्यो पर लगा विराम।

सुनेल.सनातन कैलेंडर के अनुसार गुरूवार से खरमास यानि मलमास लग जाएगा जो 13 अप्रेल तक रहेगा। ऐसे में इस एक माह तक शादी, मुंडन, गृह प्रवेश, नींव मुहूर्त सहित कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे। इसके बाद फिर 14 अप्रेल से शुभ कार्यो के लिए मुहूर्त शुरू होंगे। धनु और मीन राशि के स्वामी देवगुरू बृहस्पति है। वहीं, इस दौरान सूर्य के संपर्क में आने से देवगुरू बृहस्थति का शुभ प्रभाव कम या क्षीण हो जाता है। अत:सूर्य देव के धनु और मीन राशि में गोचर करने के दौरान खरमास लगता है। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार धार्मिक मान्यता है कि खरमास में किसी भी तरह का शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। एक वर्ष में दो बार खरमास लगता है। एक खरमास मध्य र्मा से मध्य अप्रेल के बीच और दूसरा खरमास मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी तक होता है। 14 मार्च गुरूवार को सूर्य दोपहर 11:57 मिनट पर कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य देव के कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास शुरू होगा। इस दोरान सूर्य देव 17 मार्च को उत्तराभाद्रपद और 31 मार्च को रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इसके बाद 13 अप्रेल को सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य देव के मेष राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। ज्योतिषाचार्य पंडित राजेन्द्र कुमार जोशी ने बताया कि खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि मंागलिक कर्मो के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहते हैं। इन दिनों में मंंत्र जप, दान, नदी स्नान और तीर्थ दर्शन करने की परंपरा है। इस परंपरा की वजह से खरमास के दिनों में सभी पवित्र नदियों में स्नान के लिए काफी अधिक लोग पहुंचते है। साथ ही पौराणिक महत्व वाले मंदिरों में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। खरमास पूजा-पाठ के नजरिए से पुण्यदायी है। इस महीने में शास्त्रों का पाठ करने की परंपरा है।
सूर्य करते हैं अपने गुरू की सेवा
पंडित जोशी ने बताया कि गुरू ग्रह यानी देवगुरू बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी है। सूर्य ग्रह सभी 12 राशियों में भ्रमण करता है और एक राशि में करीब एक माह ठहरता है। इस तरह सूूर्य एक साल में सभी 12 राशियों का एक चक्कर पूरा कर लेता है। इस दौरान सूर्य जब धनु और मीन राशि में आता है, तब खरमास शुरू होता है। इसके बाद सूर्य जब इन राशियों से निकलकर आगे बढ़ जाता है तो खरमास खत्म हो जाता है। ज्योतिष की मान्यता है कि खरमास में सूर्य देव अपने गुरू बृहस्पति के घर में रहते हैं और गुरू की सेवा करते हैं।
खरमास में क्यों नहीं रहते हैं शुभ कार्य
सूर्य एक मात्र प्रत्यक्ष देवता और पंचदेवों में से एक है। किसी भी शुभ काम की शुरूआत में गणेश, शिव, विष्णु, देवी दुर्गा और सूर्यदेव की पूजा की जाती है। जब सूर्य अपने गुरू की सेवा में रहते हैं तो इस ग्रह की कमजोर स्थिति की वजह से मांगलिक कर्म न करने की सलाह दी जाती है। विवाह के समय सूर्य और गुरू ग्रह अव्छी स्थिति में होते हैं तो विवाह सफल होने की संभावनाएं काफी अधिक रहती है। दान करने से तीर्थ स्नान जितना पुण्य फल मिलता है। इस महीने में निष्काम भाव से ईश्वर के नजदीक आने के लिए जो व्रत किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है और व्रत करने वाले के सभी दोष खत्म हो जाते है। इस दौरान जरूरतमंद लोगों, साधुजनों और दुखियों की सेवा करने का महत्व है। खरमास में दान के साथ ही श्राद्व और मंत्र जाप का भी विधान है। पूजा-पाठ के साथ ही जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल का दान जरूर करें। किसी गोशाला में हरी घास और गायों की देखभाल के लिए अपने सामथ्र्य के अनुसार दान कर सकते हैं।