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एसआरजी में दवाइयों का टोटा, बाहर से मंगवा रहे, मरीजों पर भार

  - डीडीसी केन्द्रों के काट रही मरीज चक्कर

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झालावाड़.जिले के सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह फ्री है। एसआरजी अस्पताल में भी ओपीडी रजिस्ट्रेशन शुल्क भी मरीजों से नहीं लिया जा रहा है लेकिन दवा की कमी से मरीज मजबूरी में जेब कटवा रहे हैं। वहीं एसआरजी अस्पताल में दवा काउंटर पर दवा उपलब्ध नहीं होने से उसे एक दूसरे डीडीसी काउंटर पर भेजा जा रहा है जहां भी मरीज को निराशा ही हाथ लग रही हैं।

बस चक्कर लगाते जाओ-
एसआरजी अस्पताल की ओपीडी में दिखाने के लिए आने वाला मरीज दवा के लिए चक्कर लगाता रहता है। पहले रजिस्ट्रेशन और फिर डॉक्टर को दिखाने के लिए कतार में लगता है। इसके बाद डॉक्टर के दवा लिखने पर डीडीसी काउंटर पर पहुंचता है तो उसकी पर्ची पर दवा नहीं होने की स्थिति पर फार्मासिस्ट मरीज या उसके परिजन को दूसरे डीडीसी काउंटर पर भेज देता है। जहां भी दवा नहीं मिलती तो बाहर से मिलने की बात कही जाती है। जहां पर भी मरीज पहले कतार में लगता है। अगर फिर दवा उपलब्ध है तो उसे दवापर्ची और आइडी की फोटोकॉपी करवा कर लाने के लिए कहा जाता है और फिर तीन दवा में से एक दवा मिल जाती है। इस प्रकिया में मरीज को करीब दो -तीन घंटे तक लग रहे है। दवा उपलब्ध नहीं होने के कारण हालात यह है कि एक डीडीसी पर भीड़ बढ़ गई है और मरीजों को कई दवा बाहर से खरीदनी पड़ रही है,जिससे उनकी जेब कट रही है। एसआरजी में कई दवाइयां नहीं मिलने से बाहर से लाने के लिए बोला जा रहा है।

इन दवाईयों की है कमी-
एंटीकोल्ड सीरप, दवा डाइक्लोपेरा मांसपेशियों में दर्द, दांत में दर्द, पेंटोसिड डीएसआर पेट में दर्द, जलन कैल्शियम, विटामिन बी.कॉम्पलेक्स,डाइक्लोफेनेक पेरासिटामोल बुखार, सिरदर्द, रेनिटिडिन अल्सर और सौम्य गैस्ट्रिक अल्सर के उपचार के लिए पैंटोप्राजोल एसिडिटी, डोमपेरिडन मैट्रोनिडाजोल उल्टी रोकने के लिए जैसी सामान्य दवाएं अस्पताल के डीडीसी कम संख्या में आ रही है। वहीं खांसी, जुखाम, बुखार, पेट दर्द जैसी बीमारियों की दवाइयां का भी टोटा है। तो बच्चों की एन्टीकोल्ड सीरप, फ्यूड आदि की भी कमी चल रही है।

700 में से कई उपलब्ध नहीं-
डीडीसी में करीब 700 की संख्या में दवा आती ड्रग स्टोर से उपलब्ध होती है। रविवार को बड़ी संख्या में दवाइयां ऐसी थी जो दवा काउंटरों पर उपलब्ध नहीं थी। ऐसे में मरीज दवा के लिए पहले अस्पताल में चक्कर लगाते रहते हैं और फिर अस्पताल में दवा नहीं मिली तो बाहर से दवा खरीद लेते है। जबकि प्रदेश की सरकार ने मरीजों को असुविधा नहीं हो इसके लिए आइपीडी से लेकर ओपीडी तक में इलाज व दवा को फ्री कर दिया है लेकिन सरकार की योजनाओं पर अस्पताल की अव्यवस्थाएं पानी फेर रही है।

सप्लाई नहीं आती समय पर-
एसआरजी अस्पताल में दवाइयों का स्टॉक पूरा होने पर उसकी लिस्ट बनाकर ड्रग स्टोर को भेज देते है। जो दवा उपलब्ध होती है वहां से भिजवा दी जाती है। कई बार इस सप्लाई में देरी हो जाती है। इसके बाद भी जो दवा नहीं मिलती उस दवा को खरीदने के लिए भेजा जाता है। जो दवा नहीं है उसके लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से खरीदने के लिए डिमांड भेजी जाती है। अगर फिर भी यहां भी उपलब्ध नहीं है तो अस्पताल सीधे टेंडर जारी कर सकता है।

बाजार से खरीदवा लेते हैं-

अभी फ्लूट की कमी है, लेकिन ऐसा नहीं है कि खत्म हो गया हो, जो दवाई काउंटर पर नहीं मिल रही है उसे टंैडर कर बाजार से खरीदवा लेते हैं। हो सकता है किसी ने बाहर से लाने के लिए मरीज को बोला हो। डीसीसी काउंटर पर काम करने वाले कई लोग जा चुके हैं, नए आए है उन्हे प्रशिक्षण की जरुरत है,जल्द ही प्रशिक्षण देंगे।

डॉ.संजय पोरवाल, अधीक्षक, एसआरजी चिकित्सालय, झालावाड़।