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बाहर नहीं जाएगी थर्मल की तीसरी इकाई, कालीसिंध में ही लगेगी- नागर

ऊर्जा राज्य मंत्री बोले-प्रस्तावित इकाइयों के विस्तार को रोकने का कोई इरादा नहीं

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Third thermal unit will not go outside, will be installed in Kalisindh only - Nagar

झालावाड़ थर्मल पावर प्लांट।

झालावाड़। ऊर्जा राज्यमंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि काली सिंध थर्मल पावर प्लांट की प्रस्तावित तीसरी नई इकाई को झालावाड़ या राजस्थान से कहीं बाहर ले जाने का राज्य सरकार का कोई इरादा नहीं है। यह काली सिंध में ही लगेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मामले में ओछी राजनीति कर जनता को गुमराह कर रही है। आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी संभावित हार को देख बौखलाए कांग्रेस नेता अपने राजनीतिक फ ायदे के लिए प्रदेश एवं हाड़ौती के विकास से जुड़े विषयों पर भी भ्रम फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
पांच साल में एक भी प्लांट नहीं लगाया

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल में प्रदेश में एक भी नया पावर प्लांट नहीं लगाया। वर्ष 2015 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने उदय योजना के माध्यम से प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों का करीब 62 हजार करोड़ रुपए का ऋ णभार अपने ऊपर लेते हुए उन्हें आर्थिक संकट से बाहर निकाला था, लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार के कुप्रबन्धन के कारण सभी बिजली कंपनियों पर घाटा बढ़कर एक लाख 39 हजार करोड़ पहुंच गया। ऐसे में हमारी सरकार को बिजली संकट विरासत में मिला है।

प्रदेश का पहला प्लांट
जानकारों के अनुसार कालीसिंध थर्मल प्रदेश का पहला प्लांट है, जहां 800 मेगावाट अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल इकाई की स्थापना होनी है। अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी सबसे अत्याधुनिक तकनीक है, जो वर्तमान में प्रचलित सुपर क्रिटिकल तकनीक की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक दक्ष है। इससे कम कोयले की खपत पर ज्यादा बिजली उत्पादन किया जा सकता है। ऐसे में जो दो इकाई पहले से चल रही है, उनसे भी कम कोयलले की जरूरत इस इकाई में होगी। इसलिए कोयले पर ज्यादा खर्चा भी नहीं आएगा।

तीसरी इकाई के लिए इतना बजट

जानकारों के अनुसार तीसरी इकाई के लिए 6 हजार 100 करोड़ का बजट प्रस्तावित है। वहीं भेल ने पर्यावरण स्वीकृति के लिए पूरा अध्ययन कर लिया है। पर्यावरण की सैद्धांतिक स्वीकृति भी मिल चुकी है।

झालावाड़ थर्मल के पास अभी ये है सुविधा
- करीब 2300 बीघा जमीन थर्मल परिसर में है
- 1900 एमसीएफटी पानी उपलब्ध हैए अभी तो 1200 ही काम में आ रहा हैए शेष पानी बचत में है।
- अभी रेल परिवहन की सुविधा है। कुछ दिनों बाद भोपाल लाइन से जुडऩे के बाद कोटा- बीना-गुना होकर आने का करीब 100 किमी का चक्कर कम हो जाएगा। इससे कोयले के परिवहन का खर्च कम होगा। समय की बजट होगी।
-अभी 10 लाख क्यूबिक मीटर का पानी का तालाब बना हुआ है, जो तीसरी यूनिट के लिए भी पर्याप्त है। 11 केवी का एक पंप और लगाना है, जिससे आसानी से पानी थर्मल में आ जाएगा।
- यहां अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल इकाई की स्थापना होने से करीब 1200 लोगों को रोजगार मिल सकेगा।

'' हमारी सरकार बिजली उत्पादन में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। इसके लिए हाड़ौती व अन्य स्थानों पर विद्युत इकाइयों का विस्तार करेंगे। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी हम राजस्थान को देश में सिरमौर बनाएंगे। कालीसिंध थर्मल की तीसरी इकाई झालावाड़ या राजस्थान से बाहर कहीं नहीं जाने वाली है। इसे बाहर ले जाने का मैंने कोई बयान नहीं दिया।

हीरालाल नागर, ऊर्जा राज्यमंत्री