
चिकित्सक जहां एक ओर लोगों का उपचार कर उन्हें स्वस्थ जीवन प्रदान करते हैं, वहीं शहर के दो चिकित्सक ऐसे भी हैं जो पर्यावरण की सेहत सुधारने का भी बीड़ा उठाए हुए हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल गुप्ता और चर्मरोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल विजय पिछले आठ वर्षों से लगातार पौधरोपण और पौधों के संरक्षण में जुटे हुए हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उनकी यह पहल समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।
दोनों चिकित्सकों ने अपने अभियान की शुरुआत व्यक्तिगत स्तर पर की थी, लेकिन समय के साथ यह एक जनभागीदारी अभियान का रूप ले चुका है। उनका मानना है कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल दवाइयां ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि स्वच्छ हवा, हरियाली और संतुलित पर्यावरण भी उतना ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ उन्होंने हजारों पौधे लगाकर शहर की हरियाली बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
शहर के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल गुप्ता पिछले आठ वर्षों से खेल संकुल क्षेत्र में पौधारोपण कर रहे हैं। उनके लगाए गए कई पौधे अब बड़े वृक्षों का रूप ले चुके हैं। शुरुआत में यह कार्य उन्होंने स्वयं शुरू किया था, लेकिन धीरे-धीरे उनका स्टाफ और समाज के लोग भी इस अभियान से जुड़ते गए।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि पौधारोपण और संरक्षण में मेड़तवाल समाज का भी विशेष सहयोग रहता है। समाज में विवाह समारोहों के दौरान मिलनी पर वर-वधू पक्ष की ओर से 500 से 1500 रुपए तक की राशि पौधारोपण के लिए दी जाती है। इसके अलावा किसी व्यक्ति के बारहवें कार्यक्रम में भी पर्यावरण संरक्षण के लिए सहयोग राशि दी जाती है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती गर्मी को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय अधिक से अधिक पौधे लगाना और उन्हें संरक्षित करना है। यदि प्रत्येक व्यक्ति हर वर्ष अपनी क्षमता के अनुसार पौधे लगाए और उन्हें बड़ा करने का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।
शहर के चर्मरोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल विजय ने नई जेल के पीछे लोगों की सेहत के साथ पर्यावरण को भी दे रहे जीवनदान दे रहे है। उन्होंने मियावाकी पद्धति से करीब 250 पौधे लगाए हैं। यह जापानी तकनीक कम जगह में घना और तेजी से विकसित होने वाला वन तैयार करने के लिए जानी जाती है। आज उनके लगाए पौधे लगभग 25 फीट ऊंचे वृक्ष बन चुके हैं और पूरे क्षेत्र को हरियाली से आच्छादित कर रहे हैं।
डॉ. विजय ने बताया कि मियावाकी पद्धति में पौधारोपण से पहले मिट्टी को जैविक रूप से उपजाऊ बनाया जाता है। इसके बाद विभिन्न प्रजातियों के पौधों को घनत्व के साथ लगाया जाता है, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों की वृद्धि सामान्य पद्धति की तुलना में कई गुना तेज होती है। उन्होंने बताया कि करीब तीन वर्ष पहले लगाए गए पौधे अब विकसित वृक्षों का रूप ले चुके हैं।
उनका कहना है कि हर वर्ष बढ़ती गर्मी को लेकर चिंता जताने के बजाय लोगों को पौधारोपण और पौध संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। जहां पौधे पहले से मौजूद हैं, उनकी सुरक्षा करें और जहां हरियाली नहीं है, वहां नए पौधे लगाएं।
दोनों चिकित्सकों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उनके प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति संकल्प के साथ छोटे स्तर पर शुरुआत करे तो बड़े बदलाव संभव हैं।
हजारों पौधों के रूप में खड़ी यह हरियाली न केवल पर्यावरण संरक्षण की मिसाल है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का आधार भी है।
Updated on:
5 Jun 2026, 8:54 PM IST
Published on:
5 Jun 2026, 8:53 PM IST
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