रटलाई (झालावाड़). कई प्रकार के मंदिर व मठों के बारे में लोगों ने सुना है और देखा भी होगा लेकिन तंत्रपीठ या तांत्रिक मंदिर के बारे में कम ही लोग जानते होंगे। तंत्रपीठ के चलते रटलाई कस्बे को तांत्रिक नगरी भी कहते हैं। पुरानी पंचायत भवन के पास लाल पत्थर के खंभों एवं शिलाओं से बने स्थान को स्थानीय लोग ढाबा कहते हैं लेकिन इतिहास में यह उल्टा मंदिर या तंत्रपीठ के नाम से दर्ज है। कस्बे के लक्ष्मीनारायण नाथ, रामदयाल पालीवाल, प्रेमप्रकाश शर्मा आदि बुजुर्गों के अनुसार कुछ तांत्रिक तंत्र विद्या से इस मठ को हवाई मार्ग से उड़ाकर अज्ञात स्थान पर ले जा रहे थे। इसी बीच रटलाई के लोगों को पत्थर के ढांचे को आसमान में देखा तो दंग रह गए और उन्होंने शोर मचाया। ऐसे में तांत्रिकों ने इसे रटलाई में उतारने का निर्णय लिया और अपनी तंत्र विद्या से कठोर चट्टानों पर उल्टा उतार दिया। तब से इसे उल्टा ढाबा या उल्टा मंदिर कहते हैं।