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तंत्र विद्या के लिए जाना जाता था उल्टा मंदिर

तंत्रपीठ के चलते रटलाई कस्बे को तांत्रिक नगरी भी कहते हैं
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झालावाड़

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Jagdish Paraliya

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Updated: 19 Dec 2020, 2:24 PM IST

तंत्र विद्या के लिए जाना जाता था उल्टा मंदिर

तंत्रपीठ के चलते रटलाई कस्बे को तांत्रिक नगरी भी कहते हैं

रटलाई (झालावाड़). कई प्रकार के मंदिर व मठों के बारे में लोगों ने सुना है और देखा भी होगा लेकिन तंत्रपीठ या तांत्रिक मंदिर के बारे में कम ही लोग जानते होंगे। तंत्रपीठ के चलते रटलाई कस्बे को तांत्रिक नगरी भी कहते हैं। पुरानी पंचायत भवन के पास लाल पत्थर के खंभों एवं शिलाओं से बने स्थान को स्थानीय लोग ढाबा कहते हैं लेकिन इतिहास में यह उल्टा मंदिर या तंत्रपीठ के नाम से दर्ज है। कस्बे के लक्ष्मीनारायण नाथ, रामदयाल पालीवाल, प्रेमप्रकाश शर्मा आदि बुजुर्गों के अनुसार कुछ तांत्रिक तंत्र विद्या से इस मठ को हवाई मार्ग से उड़ाकर अज्ञात स्थान पर ले जा रहे थे। इसी बीच रटलाई के लोगों को पत्थर के ढांचे को आसमान में देखा तो दंग रह गए और उन्होंने शोर मचाया। ऐसे में तांत्रिकों ने इसे रटलाई में उतारने का निर्णय लिया और अपनी तंत्र विद्या से कठोर चट्टानों पर उल्टा उतार दिया। तब से इसे उल्टा ढाबा या उल्टा मंदिर कहते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मंदिर के स्तम्भ पर 158 अंकित है जो संभवत: इसके निर्माण काल को दर्शाता है। इस आधार पर इस तंत्रपीठ का निर्माण 1800 वर्ष पूर्व हुआ था।

तंत्रपीठ की बनावट
उल्टा मंदिर के निर्माण के लिए नींव नहीं है। इसमें चुनाई भी नहीं है और इसका मुख्य द्वार भी पश्चिम दिशा की ओर है। इसमें किसी भी प्रकार के रेत, चूना या किसी केमिकल का उपयोग नहीं किया गया है। इसका निर्माण लाल से किया है। इसका आकार आयताकार है। 17 पाषाणी खंभों तथा 22 पट्टियों के इस पीठ में दो द्वार है। एक पूर्व में और दूसरा पश्चिम में।

संरक्षण व सारसंभाल नहीं
तंत्रपीठ के नाम से विख्यात मंदिर संरक्षण व सारसंभाल के अभाव में अपनी पहचान खोता जा रहा है। जिले के कई ऐतिहासिक इमारतों एवं मंदिरों के सरंक्षण के लिए पुरातन विभाग के द्वारा कारोड़ों रुपए का बजट भी दिया गया लेकिन उल्टा मंदिर की सुध नहीं ली। अधिकांश मूर्तियां खंडित हो चुकी हैं।