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झालावाड़

बीमारी ने घेरा तो बन गए योग गुरु, अब दूसरों को सीखा रहे योग

-करें योग रहे निरोग

झालावाड़Jun 21, 2024 / 11:45 am

harisingh gurjar

– विश्व योग दिवस विशेष

हरिसिंह गुर्जर

झालावाड़.पूरे विश्व में 21 जून को उत्साह और उमंग के साथ योग दिवस मनाने की शुरू हुई परंपरा के बाद हर कोई व्यक्ति खुद को स्वस्थ रखने के लिए योग को अपने जीवन का अहम हिस्सा बना चुका है। लेकिन 21 जून को जब योग दिवस आता है तो उत्साह और अधिक बढ़ जाता है, हर बार की तरह इस बार भी अंतरराष्ट्रीय योग जिलेभर में मनाया जाएगा। योग गुरुओं का कहना है कि योग करना ऊपर से क्रिया करना मात्र नहीं है ये अंर्तमन की भी शुद्धि का माध्यम है। इससे मानसिक तनाव व रोग तो दूर होते ही है, योग तन व मन की भी शुद्धि करता है। योग दिवस पर पत्रिका ने नियमित योग सीखे रहे योग गुरुओं से बात की तो उन्होनें ऐसे साझा किए अपने विचार।
स्वयं को मोटापा था,योग से मिली राहत-

योग गुरु ओम प्रकाश मेहर 18 साल से नि:शुल्क योग करा रहे हैं। इनके योग की शुरूआत स्वयं को मोटापा कम करने से हुई। धीरे-धीरे इन्होने शुरू किया तो मोटापे में राहत मिली। तो योग को जीवन का आधार बना लिया, नियमित योग किया तो ढ़ाई नंबर का आंखों का चश्मा भी उतर गया।अब कई शिविरों में योग कराते हैं, ग्रोथ सेंटर पार्क में नि:शुल्क योग करा रहे हैं।
पेट संबंधी बामारी में मिली राहत-

योग गुरु योगेन्द्र राठौर ने बताया कि उन्हे पेट संबंधी बीमार थी, जब नियमित योग किया तो उसमें काफी राहत मिली। उसके बाद उन्होंने नियमित योग करने के साथ लोगों को सीखना शुरू किया। अभी नियमित रूप से पाटन चौपाटी पर योग सीखा रहे हैं।
महिलाओं को बना रही सशक्त-

निर्मला सोमानी पिछले 12 साल से योग करा कर महिलाओं को बाहरी व अंर्तमन से सशक्त बना रही है। सोमानी नियमित रूप से गढ़ पार्क में सुबह महिलाओं को योग सीखा रही है।जिसमें कपालभाती, प्राणायाम, मुक्तासन सहित कई महिलाओं से जुड़े योग करा कर उन्हे निरोगी बनाने में अहम योगदान दे रही है।सोमानी ने बताया कि महिलाओं कई रोग होते हैं उन्हे योग से काफी फायदा मिलते हैं, योग के दौरान उन्हे इसके बारे में समझाते हैं।योग अंर्तमन की शुद्धि का योग है।
केशियर से मिला योग का ज्ञान-

योग गुरू ललित कुमार पहाडिय़ा (56 वर्ष) ने बताया कि मेरे योग की शुरुआत 2005 से हुई। हमारे एलआईसी का केरियर लंच बाद आधे दिन का अवकाश लेकर गया उससे पूछ तो उसने बताया कि टीवी पर योग क्लास देखने के लिए अवकाश लिया। मैंने भी देखा तो अच्छा लगा तब से योग कर रहे दूसरों को भी सीखा रहे हैं। नियमित रूप से शहर में योग करा रहे हैं। योग से नीतू जैन को स्लीप डिस्क में राहत मिली पहले वह बैठ नहीं पाती थी, अब पूरे एक घंटे तक योग करती है। इंद्र कुमार जैन को अस्थमा की समस्या थी उन्हे भी अब आराम है।
एक्सपर्ट व्यू…

कल्पवृक्ष की भांति आनेकोन्मुखीहै: योग

झालावाड़. मानसिक क्षेत्र में देखें तो श्रीमद् भगवगीता के आरंभ में अर्जुन किंकत्र्तव्य विमूढ़ है, मोहग्रस्त है, एक प्रकार से डिप्रेशन में है, उसका मन दुविधा में है, चंचल है। श्रीकृष्ण चित्त और इंद्रियों की क्रिया को वश में करते हुए, मन को एकाग्र करके, अंत:करण की शुद्धि के लिए अभ्यास योग युक्तेनचेतसानान्यगामिनाश् कहकर चित्त के विचलन का समाधान करते हैं। अस्तु मानसिक संयम, संतुलन और तनाव मुक्ति का सुगम मार्ग है योग। आध्यात्मिक क्षेत्र में देखें तो श्री कृष्ण अर्जुन से समत्वं योग मुच्येत, कहकर अनासक्त भाव से कर्म करते हुए आत्म भाव में लीन होने की बात कहते हैं। मैं से हम बनने की यात्रा है योग। निर्विरोधिता की यात्रा है योग। वैयक्तिक चेतन का सार्वभौम चेतना में विलय है योग। योग हमें आत्म साक्षात्कार तक सहज ही पहुंचा सकता है।भौतिक क्षेत्र की बात करें तो योग व्यक्ति को कर्म कुशल बनाता है। यहां योग का अर्थ इंद्रिय,मन, बुद्धि और हृदय के संपूर्ण जुड़ाव से है। शारीरिक क्षेत्र में योग हमें शारीरिक-मानसिक व्याधियों से मुक्त कर,जीवन में एक नई ताजगी की संजीवनी का संचार करता है। अत: योग कल्पवृक्ष की भांति हमारे लिए सर्वफलदायी सिद्ध होता है।
गोपाल कृष्ण दुबे विचारक एवं साहित्यकार, झालावाड़।

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