
झालावाड़ ब्लड बैंक में रक्तदान करता युवा।
World Blood Donor Day : आज प्रदेश में लाखों लोग ऐसी बीमारियों से ग्रसित है जिनको बार-बार ब्लड की जरूरत रहती है लेकिन ये रक्तदाता हीं है जिनकी वजह से इनकी जिंदगी बची रहती है। सच में ये भी उनके लिए किसी भगवान से कम नहीं जो अपना ब्लड देकर किसी की जान बचाते है। आज भीषण गर्मी में ब्लड की कमी आई तो ये लोग पीछे नहीं हटे। शहर में ऐसे कई रक्तदाता हैं जो सरकारी या निजी अस्पताल में मरीजों को ब्लड की जरूरत होने पर तुरंत पहुंच जाते हैं या फिर स्वैच्छिक रक्तदाता खोज लाते हैं। ये ऐसे रक्तदाता हैं जो रात और दिन चौबीस घंटे दूसरों का जीवन बचाने के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं।
विश्व रक्तदान दिवस पर जब हमने ऐसे रक्तदाताओं से बात की जो सालों से रक्तदान कर रहें है। इन रक्तदाताओं का कहना था अब तो एक नियम बना लिया कि हमें रक्तदान करना हीं है।
हमारे द्वारा किए गए रक्तदान से कई लोगों की जिंदगी बचती है। रक्तदान का कितना महत्व है इसका अहसास हमें तब होता है जब हमारा कोई निकटतम व्यक्ति जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा होता है। रक्तदान कर हम जहां एक और किसी की जान बचाते हैं तो हमें आत्म संतुष्टि मिलती है। रक्त न किसी कारखाने में बनता है और नहीं इसे पैसे से खरीदा जा सकता है। बिना रक्त के शरीर हाड मांस का ढांचा है। शरीर के सुचारू संचालन के लिए रक्त की आवश्यकता होती है। खून की कमी से मनुष्य का जीवन खतरे में पड़ जाता है। खून की जरूरत होने पर समय पर इसकी पूर्ति न की जाए तो किसी की जान चली जाती है।
मैंने अब तक 22 बार रक्तदान किया है, ये पुण्य का काम है, अन्य लोगों को भी नियमित रूप से तीन माह में एक बार रक्तदान करना चाहिए।
- मनीष सोनी, समाजसेवी।
मैंने अब तक 11 बार रक्तदान किया है परंतु कभी भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। रक्तदान के प्रति लोगों में गलत धारणा है जबकि ऐसा नहीं है स्वस्थ व्यक्ति को तीन माह में एक बार अवश्य रक्तदान करना चाहिए।
- यशोवर्धन बाकलीवाल, अध्यक्ष व्यापार सेवा समिति।
5 जब भी घर में कोई विशेष दिन आता है तो मैं उस दिन रक्तदान जरूर करता हूं। मैं एक साल में दो बार जरुर रक्तदान करता हूं बेटे आशीष के 21 मई को व बेटी विधि के 8 नवंबर को जन्मदिन पर रक्तदान करता हूं। मेरा ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। अभी तक 19 बार रक्तदान कर चुका हूं। अन्य लोगों से भी अपील है कि शादी की सालगिरह, जन्मदिन व अन्य अवसर पर आप रक्तदान करें, इससे बड़ा कोई दान नहीं है। हमारे रक्त से किसी को जीवनदान मिल सकता हैं।
- सियाराम बाकोंदिया, टेक्नीशियन प्रभारी, मेडिकल कॉलेज, झालावाड़।
आधी रात में भी किसी को ब्लड के लिए फोन आ जाता है तो मैं चल उठता हूं। मैंने मेरे साथ कई युवाओं को भी रक्तदान के लिए प्रेरित किया और आज वो भी हर बार रक्तदान करते है। मेराब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है। उम्र 27 साल है मैंने 41 बार एसडीपी व 19 बार साधारण रक्तदान किया है। मेरा तो यही कहना है कि थैलिसिमिया के अलावा अन्य मरीजों के परिजनों को इधर-उधर से ब्लड के लिए फोन लगाने की बजाए पहले स्वयं रक्तदान करें, फिर ब्लड बैंक से रक्त लें ताकि कमी नहीं हो। रक्तदान महादान है।
- विजय लोधा,नर्सिंगकर्मी गोविन्दपुरा।
रक्तदान अब तो आदत बन गई है रक्तदान करना हीं है। जो लोग कहते है रक्तदान से कमजोरी आती है मैं तो उनको कहना चाहता हूं यह बिल्कुल गलत है। बल्कि रक्तदान करने के 12 घंटे के बाद ही आप वैसी ही स्थिति में आ जाते है जो रक्तदान करने से पहले थे। मेरा ग्रुप ओ नेगेटिव है,हर तीन माह में रक्तदान करता हूं। अभी तक 18 बार कर चुका हूं। जब भी रक्तदान करने जाएं खाना खाकर जाएं, रक्तदान के बाद 15 मिनट आराम करें कोई दिक्कत नहीं होगी। रक्तदान से ब्लड सर्कुलेशन अच्छा रहता है।
- सीएम मीणा, एक्सईएन, परवन सिंचाई परियोजना।
मैं 76 वर्ष की आयु में अब तक 108 बार रक्तदान कर चुका हूं। मुझे रक्तदान कर बड़े आनंद की अनुभूति होती है।
- तेजमल खंडेलवाल।
मैंने अब तक 67 बार रक्तदान किया है। रक्तदान करने से कभी कोई कमजोरी महसूस नहीं हुई। इससे आत्मविश्वास और आत्म संतोष की प्राप्ति होती है।
- जगदीश कुमार गुप्ता समाजसेवी।
सन 1999 से अब तक 46 बार रक्तदान किया है। रक्तदान करने से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
- चेतन खंडेलवाल समाजसेवी।
मैं 23 बार रक्तदान कर चुका हूं इससे शरीर में कोई कमजोरी नहीं आती है,12 घंटे बाद पूरी रिकवरी हो जाती है।
- संजय बडज़ात्या।
मेरा ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है। मैं अभी तक 20 बार रक्तदान कर चुका हूं। जब हम रक्तदान कर किसी की जान बचाते है तो इससे बड़ा ओर कोई पुण्य का काम नहीं हो सकता है। मेरी सभी युवाओं से अपील है कि हर तीन माह में एक बार नियमित रुप से रक्तदान जरुर करें।
- सौरभ शर्मा, झालावाड़।
मेरा ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव है। अभी तक 52 बार रक्तदान कर चुका हूं। पहले मैंने एक साल में 6 बार रक्तदान किया है। अब नियम बना लिया है,साल में तीन बार रक्तदान करता हूं। एक बार एक बच्चे की प्लेट् लेट्स तीन हजार ही रह गई उसे एसडीपी दी तो वो 33 हजार पर पहुंच गई। इससे मन को बहुत सुकून मिला। रक्तदान महादान है, अपने रक्त से किसी को जीवन दान मिल रहा तो इससे बढ़कर ओर क्या हो सकता है।
- मनोहरलाल शर्मा, नसीराबाद।
कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। 18 से अधिक आयु के लोग जिनका वजन 50 किलोग्राम से अधिक है वह रक्तदान कर सकते हैं। नियमित अंतराल यानी 3 महीने बाद रक्तदान करते रहने से हमारे शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है और रक्तदाता को हृदयघात की संभावना नहीं रहती। नियमित रक्तदान करने से कैंसर सहित अन्य बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है। रक्तदान से सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हमारे शरीर का वजन, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, मलेरिया, एचबीएसएजी, एचसीवी, वीडीआरएल आदि जांच हो जाती है। सभी जिलेवासियाें से अपील हैं की समय समय पर हर 3 माह में रक्तदान करते रहे। ताकि स्वयं के लिए भी फायदेमंद रहे और किसी का जीवन भी बचें।
- डॉ.डीके जैन, सेवानिवृत्त राज्य क्षय रोग अधिकारी।
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Updated on:
14 Jun 2024 01:50 pm
Published on:
14 Jun 2024 11:07 am
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