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सरकारी स्कूलों में नौनिहालों को लगेगा श्रीकृष्ण भोग

आमजन को जोड़ने की सरकार की पहल : बच्चों संग बांट सकेंगे खुशियां

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Young children will be offered Shri Krishna Bhog in government schools.

सुनेल कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक झालावाड़।

सुनेल राज्य सरकार द्वारा मिड-डे मील योजना के बाद शुरू की गई श्रीकृष्ण भोग योजना सरकारी स्कूलों में आपसी सामंजस्य, सदभाव, विद्यार्थियों के ठहराव व नामांकन बढ़ोतरी में मददगार होगी।

जानकारी के अनुसार आमजन को जोडऩे के लिए अब नई योजना शुरू की है। इसमें किसी व्यक्ति के घर में सामाजिक कार्यक्रम, विवाहोत्सव, जन्म दिन, नौकरी की खुशी, वैवाहिक वर्षगांठ, धार्मिक यात्रा से लौटने आदि आयोजनों की खुशी विद्यार्थियों के साथ साझा की जा सकती हैं। इन आयोजनों में विद्यार्थियों को भागीदार बनाकर खास दिनों को यादगार बना सकते हैं।
इसके साथ ही अन्य खास दिनों को यादगार बनाने व खुशी बांटने के लिए विद्यालयों में मिड-डे मील के तहत भोज का आयोजन किया जा सकता है। इस योजना को श्रीकृष्ण भोग नाम दिया है। इसमें भोज करने के साथ अन्य कई तरीकों से खुशी बांटी जा सकती है।

मिड-डे-मील के साथ इनका भी होगा वितरण

श्रीकृष्ण भोग योजना के तहत मिलने वाली सहायता की मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। एक रजिस्टर में इन्द्राज किया जाएगा। यह रिपोर्ट आयुक्त मिड-डे मील को भेजनी होगी। इसमें श्रीकृष्ण भोग में मिड-डे मील के नियमित परोसे जाने वाले भोजन के साथ अतिरिक्त पौष्टिक खाद्य सामग्री (फल,शहद, मिष्ठान, दूध, दही, गुड़, मूंगफली, चिक्की आदि) वितरित किए जा सकते हैं। विद्यालयों में किसी भी प्रकार की अन्य खाद्य सामग्री (जिसका उपयोग शिक्षा विभाग की व्यवस्था के अनुसार भोजन पकाने में किया जा सकता है, जैसे घी, तेल, दाल, मसाले, शक्कर आदि) इस योजना के तहत दी जा सकती है। समाज या आमजन की ओर से दी जाने वाली सामग्री का उपयोग मिड-डे मील योजना के तहत अतिरिक्त भोजन खिलाने के लिए किया जा सकता है। मिड-डे मील के भोजन में गुणात्मक सुधार लाने में किया जा सकता है। यदि राशि प्राप्त होती है तो उसका उपयोग रसोईघर निर्माण, बर्तन आदि खरीदने में भी किया जा सकता है।
भोजन की राशि जमा करवाई जा सकती है
दानदाता व संस्था के साथ किसी व्यक्ति की ओर से खाद्य सामग्री के साथ बर्तन, गैस चूल्हे, दरी पट्टी, फर्नीचर आदि भी उपलब्ध करवाए जा सकते हैं। राशि नकद देने के साथ चेक, डिमांड ड्राफ्ट देने के साथ स्कूल के बैंक खाते में जमा करवाई जा सकती है। उसका उपयोग देने वाले की इच्छा के अनुसार निर्माण कार्य या मिड-डे मील में किया जाएगा।

बच्चे भगवान कृष्ण के रूप ही माने जाते हैं। उनके लिए यह योजना शुरू करने से विद्यालय का विकास होने के साथ बच्चों को मिड-डे मील के तय भोजन के साथ विशेष भोजन दिया जा सकेगा।
सुरेन्द्र जैन, डाइट वरिष्ठ व्याख्याता


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