
झांसी नगर निगम की इस तस्वीर को सोशल मीडिया से लिया गया है।
नगर निगम पर प्राइवेट भवनों का तो भारी-भरकम गृहकर बकाया है ही, सरकारी विभागों ने भी कई साल से गृह कर की अदायगी नहीं की है। इन दिनों नगर निगम का गृह विभाग बड़े बकायेदारों के रिकॉर्ड खंगाल रहा है। इसमें 7 विभागों पर लाखों रुपये की देनदारी निकली है। इन सभी को नोटिस भेजे जा रहे है। वहीं, नोटिस पाने के बाद बकायेदारों में अफरा-तफरी मची हुई है।
बहाना पड़ रहा पसीना
नगर निगम महानगर क्षेत्र में स्थित भवनों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से क्षेत्रफल के हिसाब से गृहकर वसूल करता है। यही नगर निगम की आय का मुख्य जरिया है। वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और निजी भवनों से वसूली के लिए तो नगर निगम का कानूनी डंडा चल जाता है, लेकिन सरकारी भवनों से वसूली के लिए उसे पसीना बहाना पड़ रहा है।
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने किए जमा
सबसे अधिक 18.54 करोड़ रुपये बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय पर गृहकर के रूप में बकाया था। इसको लेकर पिछले दिनों नोटिस भेजा गया था। जिसके चलते बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय ने 1 करोड़ 36 लाख रुपये से अधिक जमा कर दिए। जबकि बुन्देलखण्ड इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी पर 5.64 करोड़, मुख्य अभियन्ता विद्युत पर 5.54 करोड़, आयकर विभाग पर 93.44 लाख, राजकीय महिला महाविद्यालय पर 59.40 लाख, पुलिस अधीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन पर 8.96 लाख एवं अधिशासी अभियन्ता राजघाट नहर परियोजना मध्य प्रदेश पर 12.20 लाख रुपये का गृहकर बकाया है। वहीं, घनाराम मैरिज गार्डन से 15,32,042 रुपये जमा कराए गए।
विभागों को नहीं मिला सरकार से पैसा
सरकारी विभागों को बिजली का बिल, गृहकर एवं जलकर अदा करना पड़ता है। हर विभाग में विद्युत विभाग ने मीटर लगा रखे हैं और खपत के अनुसार बिल बनाकर भेजा जाता है, जिसे सम्बन्धित विभाग प्रदेश मुख्यालय भेज देता है। उसी हिसाब से शासन बिजली विभाग को बिल का भुगतान कर देता है, लेकिन गृहकर और जलकर का भुगतान सरकारी स्तर से नहीं होता। विभाग प्रमुखों का कहना है कि अभी तक इन विभागों ने भुगतान मांग पत्र नहीं भेजे, जिससे कहा नहीं जा सकता कि गृहकर एवं जलकर का भुगतान किस स्तर से होगा।
Published on:
27 Oct 2023 10:29 am
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