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‘इस क्षेत्र में हैं विकास और ख्याति की अपार संभावनाएं’

'इस क्षेत्र में हैं विकास और ख्याति की अपार संभावनाएं'

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'इस क्षेत्र में हैं विकास और ख्याति की अपार संभावनाएं'

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. वीके सहगल ने कहा कि कला के संसार में विकास और ख्याति की अपार संभावनाएं हैं। परिश्रम और साधना से इस क्षेत्र में अहम् मुकाम हासिल किया जा सकता है। वह यहां ललित कला संस्थान में कलाविद् डा. भगवानदास गुप्त की 87वीं जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित चित्रकला, मूर्तिकला और पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं के पुरस्कार वितरण समारोह में जुटे लोगों को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन कलाविद् स्व. भगवानदास गुप्ता कला शैक्षणिक उत्थान समिति जबलपुर और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई
प्रो. सहगल ने ललित कला संस्थान के विद्यार्थियों की सक्रियता और उनकी उपलब्धियों की सराहना भी की। उन्होंने उम्मीद जताई कि संस्थान के विद्यार्थी आगे अपने अच्छे कामों से संस्थान और विश्वविद्यालय का नाम रोशन करेंगे। कुलसचिव डा. चतुर्भुजी गुप्त ने झांसी रेलवे स्टेशन पर संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों का जिक्र करते हुए प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे आने वाले समय में संस्थान के बच्चे और बेहतर प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय का नाम पूरी दुनिया में चमकाएंगे। निर्णायक मंडल की सदस्य डा. शुभ्रा कनकने और प्रख्यात रंगकर्मी आरिफ शहडोली ने भी विद्यार्थियों की हौसला अफजाई की। शहडोली ने विद्यार्थियों को सलाह दी की कि जिज्ञासा को सदैव बनाए रखें। कभी भी किसी प्रकार की हीन भावना को मन में स्थान दिए बगैर कला साधना में लगे रहें। मेहनत रंग लाएगी। शुरुआत में संस्थान की समन्वयक डा. श्वेता पाण्डेय ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
कला-साधना के फायदे बताए
मुख्य अतिथि प्रो. मनोज कुमार ने कला साधना से जीवन और समाज को मिलने वाले फायदों के बारे में विस्तार जानकारी दी। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. देवेश निगम ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। बाद में निर्णायक मंडल के सदस्यों और अतिथियों ने विविध प्रतियोगिताओं के विद्यार्थियों को प्रशस्तिपत्र और पुरस्कार वितरित किए। पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में विवेकशील प्रथम, शिवम राजपूत द्वितीय और रिया सिंह को तृतीय पुरस्कार मिला। सांत्वना पुरस्कार काजल ओझा को दिया गया। पेंटिंग में अजय कुमार को प्रथम, आशीष कुमार को द्वितीय और प्रीतम को तृतीय पुरस्कार मिला। सांत्वना पुरस्कार देव नामदेव को दिया गया। मूर्तिकला में राज को पहला और नरेंद्र प्रजापति को दूसरा स्थान मिला। सांत्वना पुरस्कार विक्रम को दिया गया। रंगोली के लिए गजेंद्र को विशेष पुरस्कार दिया गया। गजेंद्र ने अटल बिहारी वाजपेयी की सुंदर रंगोली बनाई, जिसकी सभी लोगों ने भरपूर सराहना की। समारोह में सभी अतिथियों और निर्णायकों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन समाज कार्य संस्थान के डा. मुहम्मद नईम ने किया। अंत में डा. अजय कुमार गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में हिंदी विभागाध्यक्ष डा. मुन्ना तिवारी, डा. सीपी पैन्यूली, डा. सुनीता, डा. कौशल त्रिपाठी, जय सिंह, उमेश शुक्ल, केएल सोनकर, दिलीप कुमार, जयराम कुटार, राघवेंद्र दीक्षित, अभिषेक कुमार, दिनेश प्रजापति समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।