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झांसी की सड़कों पर खड़े दिख रहे चंबल के डाकू, इस परंपरा में शामिल होते थे फूलन देवी के गुरु

दिवाली पर हर साल की तरह इस साल भी बुंदेलखंड की ट्रेडिशनल परंपरा को निभाया जा रहा है। यहां की सड़कों पर लोग डाकू के वेशभूषा में नजर आ रहे हैं। इनका ये अंदाज किसी को डराने का नहीं बल्कि हंसाने का है।

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Bandits on the streets of Jhansi

डकैतों की वेशभूषा में हाईवे पर उतरे लोग।

यूपी के झांसी में आप हाईवे पर सफर कर रहे हैं तो जरा सावधान होकर चलिए। यहां एक दम से डाकू आकर आपका रास्ता रोक सकते हैं। आप पर बंदूक भी तानी जा सकती है। लेकिन डरने की जरूरत नहीं है। ये आपको लूटेंगे नहीं बल्कि आपसे दान मांगेंगे। यह बुंदेलखंड की प्राचीन परंपरा है। जिसे आज भी निभाया जा रहा है। ऐसा खुद के अंदर से रावण, डाकू और राक्षस जैसे शैतानों को अपने अंदर से निकालने के लिए किया जाता है।

फूलन देवी के गुरु मांगते थे दान

झांसी के एरच में 10 दिन तक रामलीला और रावण वध का कार्यक्रम चलता है। जिसका अब समापन हो चुका है। इस दौरान डाकुओं का भेष रखकर कुछ लोग राहगीरों से दान मांग रहे थे। बुजुर्ग बताते हैं कि पहले फूलन देवी के गुरु बाबा मुस्तकीम रावण वध मेले के समय इसी परंपरा को निभाते थे। वे अपनी पूरी टीम को डाकुओं की वेशभूषा में तैयार करते थे और फिर लोगों से इसी अंदाज में दान मांगते थे।

लोगों का होता है मनोरंजन

स्थानीय लोग बताते हैं कि झांसी का एरच थाना क्षेत्र बेतवा नदी के किनारे बसा है। यहां के आस पास कई बड़े डाकुओं के गैंग रहे हैं। अब इस क्षेत्र में कोई भी डकैत नहीं है। ऐसे में इस परंपरा को निभाकर लोगों का मनोरंजन किया जाता है।