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झांसी. जिला पंचायत की ऑडिट रिपोर्ट में 8.86 करोड़ से ज्यादा की रकम का गड़बड़झाला सामने आया है। यह मामला समाजवादी पार्टी के दो जिला पंचायत अध्यक्षों के कार्यकाल का है। इनमें कहीं वसूली में लापरवाही के चलते सरकारी पैसा फंस गया तो कहीं बचा हुआ पैसा सरकारी खजाने में जमा ही नहीं किया गया। और तो और इस राशि का कोई हिसाब-किताब तक नहीं मिल रहा। ऑडिट में वित्तीय अनियमितताएं पकड़े जाने के बाद जिला पंचायत में हड़कंप मच गया है।
वर्ष 2015-16 से अब तक की गड़बड़ी सामने आई-
जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायत द्वारा कराए गए ऑडिट में जिला पंचायत में व्यापक पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं पकड़ी गई हैं। वर्ष 2015-16 में वैभव कर के रूप में 1,21,11,990 रुपये की वसूली होनी थी, लेकिन 19,92,520 रुपये की ही वसूली हो सकी और 1,11,19,520 रुपये का नुकसान हुआ। लेखा परीक्षण के दौरान संस्थावार व्यक्तिगत विवरण न मिलने से माना गया कि वसूली संभव नहीं है। इसी तरह जिला पंचायत की 227 दुकानों के किराएदारों से 16,10,139 रुपये वसूले जाने थे, लेकिन समय से इनकी वसूली न होने के कारण जिला पंचायत को आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। वर्ष 2015 से 2018 तक के लिए आठ ठेकेदारों को कृषि भूमि का ठेका दिया गया था। इन लोगों से 1,34,700 रुपये की वसूली नहीं की जा सकी। अनुदान में तो और भी बड़ा खेल खेला गया। राज्य वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान का संचालन पीएनबी की शहर शाखा से किया जाता है। ऑडिट में पाया गया कि बैंक स्टेटमेंट के अनुसार 31 मार्च 2016 को 12,90,23,278.47 रुपये जमा दर्शाया गया जबकि अनुदान रजिस्टर के अनुसार 12,36,56,010.47 रुपये का उपयोग नहीं किया गया और इसे अवशेष में दर्शा दिया गया। इस तरह 53,67,268.47 रुपये बैंक खाते में अधिक जमा होना पाया गया, जिसका समाधान विवरणपत्र तैयार नहीं किया गया। 35,20,053 रुपये का ब्याज बैंक द्वारा दिया गया लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में मिले ब्याज का रिकॉर्ड उपलब्ध है। चूंकि ब्याज की राशि का प्रयोग जिला पंचायत नहीं कर सकती ऐसे में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता मानी गई है। इसी तरह तेरहवें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान का मिलान भारतीय स्टेट बैंक शाखा से किया गया जिसमें 1,97,20,960.15 रुपये की गड़बड़ी पकड़ी गई।
अनियमितताएं यहीं नहीं रुकीं। पीएलए खाते में 6,88,246.57 रुपये होना बताया गया जिसे खर्च न कर सकने की स्थिति में राजकोष में जमा किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया जिससे विकास कार्य अवरुद्ध रहे। लेखा परीक्षा विभाग ने जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों सहित शासन को भेज दी है।
कई हैं संदेह के घेरे में-
जिन वर्षों की अनियमितताएं पकड़ी गई हैं, उस दौरान सपा की मीरा विष्णु राय 25 जनवरी 2013 से 13 जनवरी 2016 तक एवं सपा की ही प्रतिमा यादव 14 जनवरी से वर्तमान तक जिला पंचायत की कुर्सी संभाले रहीं। इसके अलावा इस दौरान ज्योति कुमार दीक्षित, केके सिंह, राकेश साहू व कमलेश सिंह अपर मुख्य अधिकारी, कमला प्रसाद, अशेषचंद शर्मा व अरविंद कुमार वित्तीय सलाहकार रहे। जांच में तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी, लेखाकार व वित्तीय परामर्शदाता को अनियमितताओं में उत्तरदायी माना गया है।
सीडीओ ने मांगा स्पष्टीकरण-
वित्तीय अनियमितताएं पकड़े जाने के बाद मुख्य विकास अधिकारी अन्नावि दिनेशकुमार ने जिला पंचायत को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय तक जवाब प्रस्तुत न करने या जवाब से अंसतुष्ट होने पर दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
19 Dec 2017 04:59 pm
Published on:
19 Dec 2017 02:28 pm
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