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54 दावेदारों को पीछे छोड़ मिला टिकट, अब पार्टी में बगावत शुरू

BJP में मजबूत पकड़ रखने वाले बिहारी लाल आर्य 4 बार विधायक और एक बार मंत्री रह चुके हैं। अब झांसी से मेयर पद के उम्मीदवार बने हैं। पूर्व मेयर किरण वर्मा आज निर्दलीय अपना पर्चा भर सकती हैं।

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बिहारी लाल आर्य की फाइल फोटो।

BJP में महापौर सीट के टिकट को लेकर चल रही निर्णायक लड़ाई आखिर पूर्व विधायक बिहारी लाल आर्य ने जीत ली है। पार्टी ने उन्हें महापौर का टिकट देकर मैदान में उतार दिया है। बिहारी ने यह टिकट 54 दावेदारों को पछाड़कर हासिल किया है। अब तक वह मऊरानीपुर क्षेत्र की राजनीति करते रहे हैं, लेकिन अब बुन्देलखण्ड की एकमात्र नगर निगम के रण में ताल ठोकने जा रहे हैं।


54 लोगों ने किए थे आवेदन

महापौर सीट के टिकट को लेकर भाजपा में चल रहा घमासान रविवार की रात थम गया। पार्टी ने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी की, जिसमें झाँसी नगर निगम महापौर पद पर बिहारी लाल आर्य को प्रत्याशी बनाया है। इस पद पर 54 दावेदारों ने आवेदन किए थे।


कांग्रेस से हुई राजनीति की शुरुआत

बिहारी लाल आर्य ने कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरुआत की। फिर लोकतांत्रिक कांग्रेस में शामिल हुए। उसके बाद 1996 में कल्याण सिंह सरकार में लघु उद्योग विभाग के मंत्री बने थे।


2022 विधानसभा में कट गया था टिकट

2022 विधानसभा चुनाव में मऊरानीपुर की सीट अपना दल के खाते में चली गई थी। जिसके चलते उनका टिकट कट गया था। मऊरानीपुर से 4 बार विधायक रह चुके बिहारी लाल आर्य वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गए थे। पार्टी ने उन्हें टिकट दिया और वह चुनाव जीतकर विधायक बन गए। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मऊरानीपुर सीट गठबंधन के कारण अपना दल के खाते में चली गई।

पूर्व मेयर कर सकती हैं बगावत

BJP द्वारा महापौर सीट पर प्रत्याशी घोषित करते ही बगावत शुरू हो गई है। पूर्व महापौर किरण राजू बुकसेलर ने उन्हें बाहरी प्रत्याशी बताते हुए फिलहाल पार्टी के निर्णय पर नाराजगी जताई है। वह अब पार्टी से इस्तीफा देकर निर्दलीय के रूप में मैदान में आ सकती है। महापौर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा में सबसे बड़ा चेहरा किरण वर्मा के रूप में था।


बीजेपी से दे सकती हैं इस्तीफा

किरण वर्मा अपना नामांकन पत्र पहले ही खरीद चुकी हैं। सोमवार को बीजेपी से इस्तीफा देकर निर्दलीय मैदान में उतर सकती हैं। किरण वर्मा को मनाना अब बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी।