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बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज सोसाइटी में आया नया मोड़, मैनेजमेंट कमेटी का आरोप- गुमराह करके जोड़े गए नाम

झांसी के प्रसिद्ध बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज से सोसाइटी में गलत तरीके से 256 सदस्यों के नाम जोड़ने का मामला सामने आ रहा है। मैनेजमेंट कमेटी ने आरोप लगाए हैं कि सभी नामों को गुमराह करके जोड़ा गया है। जबकि कॉलेज कमेटी में अभी तक सिर्फ 129 सदस्य ही हैं।

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बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज।

बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज की कमेंट्री को लेकर विवाद फिर सामने आ गया है। चिटफंड रजिस्ट्रार कार्यालय को 256 नए सदस्यों की सूची भेजी गयी है। इस सूची को फर्जी बताकर कॉलेज की प्रबन्ध समिति ने सभी सदस्यों के शुल्क वापस करने का निर्णय लिया है। कॉलेज की प्रबन्ध समिति ने इन सभी सदस्यों को फर्जी तरीके से जोड़ने का आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ कुछ लोगों ने सिंडिकेट बनाकर कॉलेज पर कब्जे का आरोप लगाया है।


ये है पूरा मामला

महानगर के प्रतिष्ठित बुन्देलखण्ड महाविद्यालय की कॉलेज सोसायटी तथा प्रबंध समिति कई वर्षों से सुर्खियों में है। कॉलेज सोसायटी की सदस्यता, प्रबन्ध समिति के चुनाव को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। लगभग एक वर्ष पहले हुई कॉलेज प्रबंध समिति के चुनाव मे कॉलेज बायलॉज को दरकिनार करने के आरोप लगे थे। मामला तत्कालीन क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी तक पहुँचा था । प्रबन्ध समिति को बुन्देलखण्ड विवि से अनुमोदन के लिए भेजा गया, तो इस पर आपत्ति दर्ज करायी गयी। विवि प्रशासन ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रबन्ध समिति का अनुमोदन कर दिया। इसके बाद प्रबन्ध समिति ने कार्य संभाल लिया।

फिर से होने लगा विवाद

अब कॉलेज सोसायटी को लेकर फिर विवाद उठ गया। चिटफंड रजिस्ट्रार कार्यालय में 10 जुलाई 23 को कॉलेज सोसायटी के सदस्यों की नयी सूची भेजी गयी, जिसमें 256 सदस्यों को शामिल होना बताया गया, जबकि बुन्देलखण्ड कॉलेज सोसायटी में 129 सदस्य हैं, जो प्रबंध समिति के चुनाव में हिस्सा लेते हैं। चिट फण्ड सोसायटि को भेजे गये पत्र में कहा गया कि वर्ष 2020-21 में इन सभी सदस्यों से शुल्क लिया गया था। इन सभी सदस्यों के नाम सोसायटि में जोड़ दिए जाएं। चिटफण्ड सोसायटि ने इस सूची को लेकर प्रबन्ध समिति से पूरी जानकारी माँगी, तो हड़कम्प की स्थिति बन गयी। इस नयी सूची से कॉलेज सोसायटी में पूरी तस्वीर बदल सकती है।


फर्जी सूची पर हुई निंदा

इस पर सक्रिय हुई प्रबन्ध समिति ने 2 सितम्बर 2023 को एक बैठक कर चिटफंड रजिस्ट्रार को फर्जी तरीके से सूची भेजने की निंदा की और सभी का शुल्क वापस करने को कहा। प्रबन्ध समिति की तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया। वर्ष 2020 के बाद बने सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी। इन सभी सदस्यों की शुल्क वापस की जा रही है। इसके बाद कॉलेज सोसायटी को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आ गया है।